देश में रबी सीजन के दौरान गेहूं खरीद का अभियान अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है और इस बार सरकारी खरीद ने नया रिकॉर्ड बनाने की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। केंद्र सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक 21 मई 2026 तक सरकारी एजेंसियों ने 33.39 मिलियन टन गेहूं की खरीद कर ली है। यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 13 प्रतिशत अधिक है। पिछले वर्ष इसी समय तक लगभग 29.64 मिलियन टन गेहूं की खरीद हुई थी।
इस बार केंद्र सरकार ने रिकॉर्ड उत्पादन अनुमान को देखते हुए 34.5 मिलियन टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा था और मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि सरकार इस लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच चुकी है। खास बात यह है कि पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों ने खरीद में शानदार प्रदर्शन किया है। कुछ राज्यों ने तो तय लक्ष्य से भी अधिक खरीद कर ली है।
रिकॉर्ड उत्पादन के बीच बढ़ी सरकारी सक्रियता
भारत दुनिया के सबसे बड़े गेहूं उत्पादक देशों में शामिल है और इस साल मौसम की चुनौतियों के बावजूद उत्पादन मजबूत रहने का अनुमान लगाया गया। कृषि मंत्रालय और खाद्य मंत्रालय के शुरुआती अनुमानों में कहा गया था कि 2025-26 रबी सीजन में गेहूं उत्पादन रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने खरीद लक्ष्य भी बढ़ाया।
सरकारी खरीद बढ़ने का सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिलता है क्योंकि इससे उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसल बेचने का भरोसा मिलता है। इस बार सरकार ने गेहूं का MSP बढ़ाकर किसानों को राहत देने की कोशिश भी की थी। ऐसे में मंडियों में सरकारी एजेंसियों की सक्रियता बढ़ी और कई राज्यों में खरीद केंद्रों की संख्या भी बढ़ाई गई।
पंजाब में गुणवत्ता समस्या के बावजूद मजबूत खरीद
देश के सबसे बड़े गेहूं खरीद केंद्रों में शामिल पंजाब ने इस बार भी मजबूत प्रदर्शन किया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार पंजाब में 12.16 मिलियन टन गेहूं की खरीद की गई है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 11.92 मिलियन टन था। यानी राज्य में लगभग 2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
हालांकि इस बार पंजाब में गेहूं की गुणवत्ता बड़ी चिंता बनी रही। मार्च और अप्रैल में कई जिलों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण गेहूं की चमक कम हो गई थी। बड़ी मात्रा में गेहूं निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतर पाया। इसके बावजूद सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए रियायती विनिर्देश यानी URS श्रेणी के तहत खरीद की अनुमति दी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार गुणवत्ता मानकों में ढील नहीं देती तो पंजाब के हजारों किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता था।
हरियाणा ने लक्ष्य से अधिक खरीद कर चौंकाया
हरियाणा इस बार गेहूं खरीद के मामले में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल रहा। राज्य में 15 मई तक खरीद पूरी होने पर लगभग 8.12 मिलियन टन गेहूं खरीदा गया, जबकि लक्ष्य 7.2 मिलियन टन का था। यह आंकड़ा पिछले मार्केटिंग सीजन की तुलना में भी बेहतर है। पिछले साल हरियाणा से केंद्र सरकार ने करीब 7.14 मिलियन टन गेहूं खरीदा था। यानी इस बार राज्य ने रिकॉर्ड स्तर की खरीद दर्ज की।
हरियाणा सरकार ने खरीद प्रक्रिया को तेज करने के लिए डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और मंडियों में अतिरिक्त स्टाफ की व्यवस्था की थी। इसका असर खरीद आंकड़ों में साफ दिखाई दिया।
मध्य प्रदेश ने अंतिम दौर में मारी बाजी
इस बार सबसे ज्यादा चर्चा मध्य प्रदेश की खरीद को लेकर रही। शुरुआत में राज्य में खरीद बेहद धीमी थी और अप्रैल के अंत तक हालात चिंताजनक दिख रहे थे। 30 अप्रैल तक खरीद पिछले साल के मुकाबले करीब 59 प्रतिशत कम चल रही थी।
लेकिन मई महीने में अचानक खरीद में तेज उछाल देखने को मिला। 1 मई से 21 मई के बीच राज्य में लगभग 9.2 मिलियन टन गेहूं खरीदा गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा केवल 3.8 मिलियन टन था।
अब तक मध्य प्रदेश में कुल 9.5 मिलियन टन गेहूं की खरीद हो चुकी है, जो पिछले साल के 7.8 मिलियन टन से करीब 22 प्रतिशत अधिक है। विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाने, भुगतान प्रक्रिया तेज करने और किसानों को लगातार प्रोत्साहित करने से अंतिम चरण में खरीद में तेजी आई।
यूपी, राजस्थान और बिहार में भी सुधार
उत्तर प्रदेश में सरकारी खरीद 1.02 मिलियन टन से बढ़कर 1.48 मिलियन टन पहुंच गई है। सरकार ने राज्य में खरीद लक्ष्य भी बढ़ाकर 2.5 मिलियन टन कर दिया है। हालांकि यूपी अभी भी अपने लक्ष्य से पीछे है, लेकिन पिछले साल की तुलना में सुधार जरूर दिखा है।
राजस्थान में खरीद 1.81 मिलियन टन से बढ़कर 2.03 मिलियन टन हो गई है। वहीं बिहार में खरीद लगभग दोगुनी होकर 33,295 टन तक पहुंच गई। पिछले साल यह आंकड़ा 17,609 टन था।
बिहार में सरकारी खरीद की हिस्सेदारी अभी भी काफी कम है, लेकिन वृद्धि दर यह संकेत देती है कि राज्य में सरकारी खरीद व्यवस्था धीरे-धीरे मजबूत हो रही है।
क्यों अहम है सरकारी गेहूं खरीद?
भारत में सरकारी गेहूं खरीद केवल किसानों की आय तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था से भी जुड़ा है। सरकार द्वारा खरीदा गया गेहूं भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य एजेंसियों के गोदामों में रखा जाता है। बाद में इसी अनाज का इस्तेमाल सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), गरीब कल्याण योजनाओं और राशन वितरण में किया जाता है।
अगर सरकारी खरीद कमजोर रहती है तो भविष्य में खाद्यान्न भंडार पर दबाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि सरकार हर साल खरीद लक्ष्य हासिल करने पर जोर देती है।
URS गेहूं का अलग भंडारण क्यों जरूरी?
इस बार बेमौसम बारिश के कारण बड़ी मात्रा में गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित हुई। कई जगहों पर नमी बढ़ गई, दाने सिकुड़ गए और चमक कम हो गई। ऐसे गेहूं को सामान्य गुणवत्ता मानकों में शामिल नहीं किया जा सकता।
इसी वजह से सरकार ने URS (Relaxed Specifications) श्रेणी के तहत खरीद की अनुमति दी है। राज्य एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे गेहूं का अलग भंडारण किया जाए और उसका अलग हिसाब रखा जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि खराब गुणवत्ता वाले गेहूं को सामान्य स्टॉक में मिला दिया गया तो बाद में वितरण और भंडारण में दिक्कतें आ सकती हैं।
किसानों और बाजार पर क्या होगा असर?
रिकॉर्ड सरकारी खरीद का सबसे बड़ा फायदा किसानों को MSP का भरोसा मिलने के रूप में दिखाई देता है। इससे खुले बाजार में कीमतों में बड़ी गिरावट की आशंका कम हो जाती है। दूसरी ओर सरकार के पास पर्याप्त स्टॉक रहने से भविष्य में महंगाई नियंत्रण में रखने में भी मदद मिल सकती है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अगर आने वाले महीनों में मानसून कमजोर रहा या वैश्विक बाजार में गेहूं की कीमतें बढ़ीं तो सरकार पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। फिलहाल मजबूत खरीद आंकड़े सरकार के लिए राहत की खबर माने जा रहे हैं।
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