Foreign Exchange Reserves: ईरान-इजरायल युद्ध और वैश्विक बाजारों में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय रुपये पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तरों के करीब पहुंच गया है। इस दबाव को संभालने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को खुले बाजार में बड़ी मात्रा में डॉलर बेचने पड़े। इसका सीधा असर देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) पर पड़ा है, जिसमें एक ही सप्ताह में $8.094 billion की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
मुंबई: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने दुनिया भर के वित्तीय बाजारों को हिला दिया है। ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष गहराने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, वहीं निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश यानी अमेरिकी डॉलर की तरफ बढ़ा है। इसका असर भारतीय रुपये पर भी देखने को मिल रहा है। रुपया लगातार कमजोर हो रहा है और इसे संभालने के लिए रिजर्व बैंक को बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा।
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा शुक्रवार को जारी साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार 15 मई 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $8.094 billion घटकर $688.894 billion रह गया। इससे एक सप्ताह पहले इसमें $6.295 billion की बढ़ोतरी हुई थी। गौरतलब है कि फरवरी 2026 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $728.494 billion के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया था।
क्यों घटा विदेशी मुद्रा भंडार?
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी मुद्रा भंडार में आई इस बड़ी गिरावट की सबसे बड़ी वजह RBI का हस्तक्षेप है। रुपये को अचानक तेज गिरावट से बचाने के लिए केंद्रीय बैंक ने डॉलर बेचकर बाजार में तरलता बढ़ाई।
जब विदेशी निवेशक डॉलर खरीदते हैं और रुपये बेचते हैं, तब रुपये पर दबाव बढ़ता है। ऐसी स्थिति में RBI अपने भंडार से डॉलर बेचकर रुपये की मांग को सहारा देता है। लेकिन ऐसा करने से विदेशी मुद्रा भंडार घटता है।
हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, पश्चिम एशिया संकट, डॉलर इंडेक्स में मजबूती, विदेशी निवेशकों की बिकवाली. इन सभी वजहों से भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ा है।
FCA में सबसे ज्यादा गिरावट
रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी मुद्रा आस्तियां यानी Foreign Currency Assets (FCA) में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। समीक्षाधीन सप्ताह में FCA $6.483 billion घटकर $545.904 billion रह गया।
यह कुल विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होता है। इसमें डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और जापानी येन जैसी प्रमुख विदेशी मुद्राएं शामिल होती हैं। इन मुद्राओं के मूल्य में उतार-चढ़ाव का असर भी FCA पर पड़ता है। एक सप्ताह पहले FCA में $562 million की बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन इस बार वैश्विक मुद्रा बाजारों में भारी अस्थिरता देखने को मिली।
सोने के भंडार की वैल्यू भी घटी
विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट की दूसरी बड़ी वजह गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में कमी रही। RBI के गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में $1.536 billion की गिरावट आई है। अब देश के गोल्ड रिजर्व का मूल्य घटकर $119.317 billion रह गया है।
हालांकि RBI के पास मौजूद सोने की वास्तविक मात्रा में कोई बदलाव नहीं हुआ है। मार्च 2026 के अंत तक RBI के पास 880.52 टन सोना था। लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट आने से इसकी वैल्यू कम हो गई।
वर्तमान में भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में गोल्ड रिजर्व की हिस्सेदारी करीब 16.7% है। पिछले कुछ वर्षों में RBI ने लगातार सोने की खरीद बढ़ाई है ताकि डॉलर पर निर्भरता कम की जा सके।
SDR और IMF रिजर्व में भी कमी
रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार Special Drawing Rights (SDR) में भी मामूली गिरावट दर्ज की गई है। 15 मई 2026 को समाप्त सप्ताह में SDR $49 million घटकर $18.824 billion रह गया।
इसी तरह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास रखे भारत के रिजर्व में भी $25 million की कमी आई है। अब यह घटकर $4.850 billion रह गया है। हालांकि यह गिरावट बहुत बड़ी नहीं मानी जा रही, लेकिन यह दर्शाती है कि वैश्विक वित्तीय अस्थिरता का असर भारत के रिजर्व पोर्टफोलियो के लगभग हर हिस्से पर पड़ा है।
क्या विदेशी मुद्रा भंडार में यह गिरावट चिंता की बात है?
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक फिलहाल भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत स्थिति में बना हुआ है। करीब $689 billion का रिजर्व अभी भी भारत को कई महीनों के आयात खर्च को कवर करने की क्षमता देता है।
हालांकि लगातार गिरावट चिंता बढ़ा सकती है, खासकर अगर कच्चा तेल और महंगा होता है, पश्चिम एशिया संकट लंबा चलता है, विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहती है, रुपया और कमजोर होता है.
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। ऐसे में तेल की कीमतों में तेजी सीधे तौर पर डॉलर की मांग बढ़ाती है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डालती है।
रुपये पर आगे क्या असर पड़ सकता है?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि ब्रेंट क्रूड $110 प्रति बैरल के ऊपर टिकता है और पश्चिम एशिया संकट और गहराता है, तो रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में RBI को आगे भी डॉलर बेचकर हस्तक्षेप करना पड़ सकता है।
हालांकि भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, बेहतर बैंकिंग सिस्टम और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार फिलहाल स्थिति को नियंत्रित रखने में मदद कर रहे हैं। लेकिन आने वाले हफ्तों में: अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, कच्चे तेल की कीमतें, पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक माहौल, विदेशी निवेशकों का रुख ये सभी कारक तय करेंगे कि रुपये और विदेशी मुद्रा भंडार की दिशा क्या रहती है।
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का ताजा हाल
| घटक | ताजा स्तर |
|---|---|
| कुल विदेशी मुद्रा भंडार | $688.894 billion |
| FCA | $545.904 billion |
| गोल्ड रिजर्व | $119.317 billion |
| SDR | $18.824 billion |
| IMF रिजर्व | $4.850 billion |
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