JP Power News: जेपी पावर के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में बड़ा बदलाव हुआ है। अदाणी समूह की एंट्री के बाद कंपनी के पांच निदेशकों ने इस्तीफा दे दिया है, जबकि अदाणी ग्रुप से जुड़े तीन वरिष्ठ अधिकारियों को बोर्ड में अतिरिक्त निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया है। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब जयप्रकाश समूह की कंपनियों के अधिग्रहण और रेजोल्यूशन प्लान को लागू किया जा रहा है। बाजार में इसे अदाणी समूह की बढ़ती पकड़ और भविष्य की रणनीतिक तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।
Highlights
- JP Power बोर्ड में अदाणी समूह से जुड़े तीन नए चेहरे शामिल
- पांच निदेशकों ने तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दिया
- दो नए निदेशक Adani Power से जुड़े
- तीसरे निदेशक का संबंध Adani Green Energy से
- NCLT और NCLAT से मंजूरी के बाद तेज हुई अधिग्रहण प्रक्रिया
नई दिल्ली। जयप्रकाश पावर वेंचर्स लिमिटेड (JP Power) के बोर्ड में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। कंपनी की ओर से स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी के मुताबिक 22 मई 2026 से कई अहम बदलाव लागू किए गए हैं। एक ओर जहां कंपनी के पांच निदेशकों ने अपने पद छोड़ दिए, वहीं दूसरी तरफ अदाणी समूह से जुड़े तीन वरिष्ठ अधिकारियों को बोर्ड में शामिल किया गया है।
यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब जयप्रकाश समूह की कंपनियों के अधिग्रहण और रेजोल्यूशन प्लान को लागू किया जा रहा है। बाजार विशेषज्ञ इसे सिर्फ बोर्ड बदलाव नहीं बल्कि आने वाले समय में कंपनी की रणनीति, संचालन और प्रबंधन में बड़े बदलावों का संकेत मान रहे हैं।
JP Power बोर्ड में किन लोगों की हुई एंट्री?
कंपनी ने सावन जयेंद्र पटेल, जयदेब नंदा और नरेश तेलुगू को अतिरिक्त निदेशक नियुक्त किया है। तीनों अधिकारियों का लंबे समय से ऊर्जा क्षेत्र में अनुभव रहा है और इनका सीधा संबंध अदाणी समूह की कंपनियों से रहा है।
सावन जयेंद्र पटेल कौन हैं?
सावन जयेंद्र पटेल पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और करीब 28 वर्षों से अदाणी समूह के साथ जुड़े हुए हैं। उन्होंने साल 1998 में समूह जॉइन किया था। फिलहाल वे अदाणी पावर लिमिटेड में चीफ कमर्शियल ऑफिसर (CCO) के पद पर कार्यरत हैं।
कोयला खरीद, बिजली बिक्री, लॉजिस्टिक्स और कमर्शियल ऑपरेशन में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। थर्मल पावर प्लांट्स के लिए फ्यूल मैनेजमेंट और बिजनेस डेवलपमेंट में भी वे महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। ऊर्जा क्षेत्र के जानकार मानते हैं कि उनकी एंट्री से JP Power की फ्यूल सप्लाई और पावर ट्रेडिंग रणनीति में बदलाव देखने को मिल सकता है।
जयदेब नंदा का क्या है अनुभव?
जयदेब नंदा को पावर सेक्टर का अनुभवी चेहरा माना जाता है। उनके पास 34 साल से अधिक का अनुभव है। वे अदाणी पावर में COO और ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस सलाहकार की भूमिका निभा चुके हैं।
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत सरकारी बिजली कंपनी NTPC से की थी और बाद में ईस्टर्न रीजन के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर तक पहुंचे। थर्मल पावर प्लांट्स के संचालन और मेंटेनेंस में उनकी विशेषज्ञता मानी जाती है।
विश्लेषकों का कहना है कि उनकी नियुक्ति JP Power के पावर प्लांट्स की कार्यक्षमता सुधारने और लागत कम करने की दिशा में अहम कदम हो सकता है।
नरेश तेलुगू का Adani Green Energy से संबंध
तीसरे नए निदेशक नरेश तेलुगू हैं, जो वर्तमान में Adani Green Energy Limited में पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट्स और हाइड्रो बिजनेस के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर हैं।
उनके पास भारत समेत एशिया, अफ्रीका और मध्य-पूर्व के बड़े ऊर्जा प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अनुभव है। इंजीनियरिंग और फाइनेंस दोनों क्षेत्रों में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी मौजूदगी JP Power को भविष्य में रिन्यूएबल एनर्जी और हाइड्रो प्रोजेक्ट्स की दिशा में आगे बढ़ाने का संकेत हो सकती है।
पांच निदेशकों ने क्यों दिया इस्तीफा?
कंपनी के अनुसार पांच निदेशकों ने तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दिया है। इनमें सुनील कुमार शर्मा (Vice Chairman & Whole-Time Director), सुरेन जैन (Managing Director & CEO), प्रवीण कुमार सिंह (Whole-Time Director), दिनेश कुमार लिखी (Independent Director), प्रोफेसर सुरेश चंद्र सक्सेना (Independent Director) शामिल हैं।
यह इस्तीफे ऐसे समय में हुए हैं जब कंपनी का नियंत्रण और संचालन धीरे-धीरे नए प्रबंधन ढांचे की ओर बढ़ रहा है। बाजार में इसे “मैनेजमेंट ट्रांजिशन” के तौर पर देखा जा रहा है।
अदाणी समूह की रणनीति क्या हो सकती है?
विशेषज्ञों का मानना है कि JP Power में बोर्ड स्तर पर बदलाव सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं है। इसके जरिए अदाणी समूह कंपनी के संचालन, पावर एसेट्स और भविष्य की निवेश रणनीति पर मजबूत पकड़ बनाना चाहता है।
JP Power के पास थर्मल पावर एसेट्स, हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स, कोल लिंकिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क जैसी महत्वपूर्ण परिसंपत्तियां मौजूद हैं। ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रहे अदाणी समूह के लिए यह अधिग्रहण लंबी अवधि में रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
NCLT और NCLAT से मिली थी मंजूरी
17 मार्च 2026 को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने दिवालिया हो चुकी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के अधिग्रहण के लिए अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की ₹14,535 करोड़ की बोली को मंजूरी दी थी।
बाद में वेदांता समूह ने इस फैसले को NCLAT में चुनौती दी थी। हालांकि 4 मई 2026 को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने वेदांता की अपील खारिज कर दी और NCLT के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद अधिग्रहण प्रक्रिया ने तेजी पकड़ी और अब रेजोल्यूशन प्लान को लागू किया जा रहा है।
JP Power के लिए आगे क्या?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में JP Power में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इनमें शामिल हो सकते हैं: ऑपरेशनल रिस्ट्रक्चरिंग, लागत में कटौती, पावर प्रोजेक्ट्स का विस्तार, रिन्यूएबल एनर्जी पर फोकस, मैनेजमेंट सिस्टम में बदलाव अगर अदाणी समूह JP Power की परिसंपत्तियों का प्रभावी इस्तेमाल करता है, तो कंपनी ऊर्जा क्षेत्र में फिर से मजबूत स्थिति बना सकती है।
हालांकि निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि नया प्रबंधन कंपनी की वित्तीय स्थिति और प्रोजेक्ट्स को कितनी तेजी से स्थिर कर पाता है।
Source: BSE Filing
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