सरकारी बैंकों में निवेशकों की दिलचस्पी एक बार फिर बढ़ती दिखाई दे रही है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक Central Bank of India में सरकार की हिस्सेदारी बिक्री (OFS) को संस्थागत निवेशकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। शुक्रवार को केवल गैर-खुदरा निवेशकों ने ही ₹2380 करोड़ से अधिक की बोलियां लगा दीं।
भारत सरकार बैंक में अपनी 8 प्रतिशत तक हिस्सेदारी बेच रही है। इस कदम का मकसद सिर्फ विनिवेश से पैसा जुटाना नहीं, बल्कि SEBI के न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी नियमों का पालन करना भी है। अब खुदरा निवेशकों की नजर सोमवार को खुलने वाली बोली पर रहेगी।
2.36 गुना ज्यादा सब्सक्रिप्शन
सरकार ने शुरुआती चरण में 4 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री के लिए रखी थी, लेकिन इसमें “ग्रीनशू ऑप्शन” भी शामिल किया गया है। यानी मांग ज्यादा आने पर अतिरिक्त 4 प्रतिशत हिस्सेदारी भी बेची जा सकती है।
शुक्रवार को संस्थागत निवेशकों ने 76.86 करोड़ से अधिक शेयरों के लिए बोलियां लगाईं, जबकि ऑफर में केवल 32.58 करोड़ शेयर उपलब्ध थे। इस तरह यह इश्यू करीब 2.36 गुना सब्सक्राइब हुआ।
सरकार ने OFS के लिए ₹31 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है। इस कीमत पर कुल बोलियों का मूल्य ₹2380 करोड़ से अधिक पहुंच गया।
शेयर कीमत से कम रखा गया फ्लोर प्राइस
सरकार ने OFS का फ्लोर प्राइस बाजार भाव से नीचे रखा है ताकि निवेशकों को आकर्षित किया जा सके।
BSE पर गुरुवार को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का शेयर ₹33.91 पर बंद हुआ था। इसके मुकाबले ₹31 का फ्लोर प्राइस लगभग 8.58 प्रतिशत कम है।
हालांकि OFS की घोषणा के बाद बैंक के शेयरों पर दबाव भी दिखा। गुरुवार को शेयर करीब 7.70 प्रतिशत गिरकर ₹31.30 पर बंद हुआ। अक्सर बड़े OFS में ऐसा देखने को मिलता है क्योंकि बाजार में शेयरों की आपूर्ति अचानक बढ़ जाती है।
खुदरा निवेशकों के लिए सोमवार अहम
अब इस OFS का अगला चरण सोमवार को खुलेगा, जब खुदरा निवेशक बोली लगा सकेंगे। आमतौर पर सरकारी OFS में रिटेल निवेशकों को कुछ अतिरिक्त छूट भी दी जाती है, इसलिए छोटे निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि PSU बैंकिंग सेक्टर में पिछले एक साल से आई तेजी ने सरकारी बैंकों के प्रति निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। यही कारण है कि OFS को मजबूत प्रतिक्रिया मिल रही है।
सरकार क्यों बेच रही हिस्सेदारी?
इस हिस्सेदारी बिक्री का सबसे बड़ा कारण SEBI का Minimum Public Shareholding (MPS) नियम है। SEBI के नियमों के अनुसार हर सूचीबद्ध कंपनी में कम से कम 25 प्रतिशत सार्वजनिक हिस्सेदारी होनी चाहिए। फिलहाल सरकार के पास सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 89.27 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
यदि सरकार पूरा 8 प्रतिशत स्टेक बेच देती है, तो उसकी हिस्सेदारी घटकर लगभग 81.27 प्रतिशत रह जाएगी। इससे बैंक धीरे-धीरे SEBI के नियमों के अनुरूप आ सकेगा।
सरकार का बड़ा विनिवेश लक्ष्य
केंद्र सरकार चालू वित्त वर्ष 2026-27 में विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन से ₹80,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। यह पिछले वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान ₹33,837 करोड़ से काफी अधिक है।
सरकार पहले भी कई सरकारी बैंकों में हिस्सेदारी बेच चुकी है। वित्त वर्ष 2025-26 में: Bank of Maharashtra से लगभग ₹2624 करोड़ जुटाए गए। Indian Overseas Bank से करीब ₹1419 करोड़ प्राप्त हुए।
अब सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का OFS इस वित्त वर्ष का पहला बड़ा बैंकिंग विनिवेश माना जा रहा है।
PSU बैंकिंग सेक्टर में क्यों बढ़ रहा भरोसा?
पिछले दो वर्षों में सरकारी बैंकों की बैलेंस शीट में काफी सुधार आया है। NPA घटे हैं, मुनाफा बढ़ा है, क्रेडिट ग्रोथ मजबूत हुई है, सरकारी पूंजी पर निर्भरता कम हुई है
इसी वजह से विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की रुचि PSU बैंकों में तेजी से बढ़ी है। बैंकिंग इंडेक्स में सरकारी बैंकों का प्रदर्शन भी निजी बैंकों के मुकाबले कई बार बेहतर रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि ब्याज दरों में स्थिरता बनी रहती है और अर्थव्यवस्था मजबूत रहती है, तो PSU बैंकिंग शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी आगे भी बनी रह सकती है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
इस OFS को मिला मजबूत रिस्पॉन्स यह दिखाता है कि बाजार अभी भी सरकारी बैंकिंग सेक्टर में अवसर देख रहा है। हालांकि अल्पकाल में OFS के कारण शेयर कीमतों में दबाव रह सकता है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशक इसे वैल्यू बायिंग के मौके के रूप में देख रहे हैं।
अब बाजार की नजर सोमवार को खुलने वाली रिटेल बिडिंग और इस बात पर रहेगी कि सरकार ग्रीनशू विकल्प का पूरा उपयोग करती है या नहीं।
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