भारत के दो सबसे बड़े कारोबारी घरानों — Gautam Adani और Mukesh Ambani — के बीच अब केवल दौलत की नहीं बल्कि विदेशी निवेशकों के भरोसे की भी जंग तेज होती दिख रही है। पिछले कुछ महीनों में जहां Adani Group की कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है, वहीं Reliance Industries अपेक्षाकृत दबाव में रही है।
इसी बीच अमेरिका की दिग्गज निवेश प्रबंधन कंपनी Capital Group ने अडानी ग्रुप की कंपनियों में बड़ा दांव लगाया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने हाल में अडानी समूह की तीन कंपनियों में करीब 2 अरब डॉलर यानी लगभग ₹19,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश किया है। यह कदम ऐसे समय आया है जब विदेशी निवेशकों का नजरिया अडानी समूह को लेकर तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है।
अडानी ग्रुप की किन कंपनियों में लगा पैसा?
रिपोर्ट के अनुसार, कैपिटल ग्रुप ने: Adani Ports and Special Economic Zone में लगभग 2% हिस्सेदारी खरीदी, Adani Power में 1.5% से 2% तक हिस्सेदारी बढ़ाई, Adani Green Energy में भी हिस्सेदारी खरीदी
बताया जा रहा है कि 5 मई को अडानी पोर्ट्स में खुले बाजार से लगभग ₹7,486 करोड़ की खरीदारी की गई। यह सौदा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कैपिटल ग्रुप दुनिया की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में शामिल है और वह 3.3 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की संपत्ति मैनेज करती है।
आखिर क्यों बदल रहा है विदेशी निवेशकों का नजरिया?
पिछले एक साल में अडानी समूह की कई कंपनियों ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। खासकर: अडानी पावर में करीब 94% तेजी, अडानी ग्रीन में लगभग 35% उछाल, अडानी पोर्ट्स में करीब 25% बढ़त. इसके पीछे कई बड़े कारण माने जा रहे हैं।
1. सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर फोकस
भारत सरकार लगातार: पोर्ट्स, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी, पावर सेक्टर में भारी निवेश कर रही है। अडानी समूह की मौजूदगी इन सभी क्षेत्रों में मजबूत है।
2. कर्ज को लेकर चिंता कम होना
हिंडनबर्ग विवाद के बाद अडानी समूह पर भारी दबाव था। लेकिन पिछले डेढ़ साल में समूह ने: कर्ज कम करने, कैश फ्लो मजबूत करने, विदेशी निवेश जुटाने पर काफी काम किया है। इससे बड़े निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे लौटता दिख रहा है।
3. ग्रीन एनर्जी थीम
दुनिया भर के फंड अब Renewable Energy पर बड़ा दांव लगा रहे हैं। अडानी ग्रीन इस सेक्टर में भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक बन चुकी है। ऐसे में विदेशी निवेशकों के लिए यह लंबी अवधि का बड़ा अवसर माना जा रहा है।
रिलायंस में क्यों घटी हिस्सेदारी?
ब्लूमबर्ग रिपोर्ट के अनुसार, कैपिटल ग्रुप ने Reliance Industries में अपनी हिस्सेदारी लगातार घटाई है।
- मार्च 2017: लगभग 755 मिलियन शेयर
- छह साल पहले: करीब 500 मिलियन शेयर
- मार्च 2026: करीब 142 मिलियन शेयर
यह गिरावट दिखाती है कि कंपनी ने धीरे-धीरे रिलायंस में एक्सपोजर कम किया है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि रिलायंस कमजोर कंपनी बन गई है। बल्कि कई विश्लेषकों का मानना है कि रिलायंस अब एक mature business stage में पहुंच चुकी है जहां explosive growth की संभावना सीमित दिखाई देती है, जबकि अडानी समूह अभी तेजी से विस्तार के दौर में है।
रिलायंस के सामने कौन-सी चुनौतियां?
रिलायंस के शेयरों में पिछले एक साल में लगभग 8% गिरावट आई है। इसके पीछे कई वजहें हैं:
Retail Business Pressure
कंपनी के रिटेल कारोबार की growth उम्मीद से धीमी रही है।
Telecom Competition
Jio Platforms अभी भी मजबूत है, लेकिन telecom sector में ARPU growth उतनी तेज नहीं रही जितनी निवेशक चाहते थे।
Oil-to-Chemical Segment
वैश्विक मांग कमजोर रहने से refining और petrochemical margins पर दबाव बना हुआ है।
क्या अडानी अब रिलायंस को पीछे छोड़ देगा?
यह सवाल अब बाजार में तेजी से पूछा जा रहा है। हालांकि दोनों समूहों का business model काफी अलग है।
| अडानी ग्रुप | रिलायंस |
|---|---|
| इंफ्रास्ट्रक्चर फोकस | Consumer + Telecom + Energy |
| हाई ग्रोथ | Stable Cash Flow |
| ज्यादा volatility | अपेक्षाकृत स्थिर |
| ग्रीन एनर्जी पर बड़ा दांव | Retail और Digital पर फोकस |
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में अडानी समूह high-growth infrastructure play बना रह सकता है जबकि रिलायंस defensive और diversified giant के रूप में मजबूत रहेगा
शेयरों का ताजा हाल
शुक्रवार के कारोबार में: अडानी पोर्ट्स का शेयर ₹1,786 के आसपास ट्रेड करता दिखा, अडानी पावर ₹220 के ऊपर रहा, अडानी ग्रीन में 1% से ज्यादा तेजी रही, रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर भी हल्की बढ़त के साथ ₹1,355 के करीब ट्रेड करता दिखा
हालांकि रिलायंस अभी भी भारत की सबसे वैल्यूएबल कंपनी बनी हुई है, लेकिन बाजार में फिलहाल momentum अडानी समूह के पक्ष में जाता दिखाई दे रहा है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
विदेशी निवेशकों का रुख यह संकेत देता है कि वैश्विक फंड अब: इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी से जुड़े भारतीय सेक्टर्स में बड़ा अवसर देख रहे हैं।
लेकिन निवेशकों को यह भी समझना होगा कि अडानी समूह के शेयरों में volatility काफी ज्यादा रहती है। वहीं रिलायंस अपेक्षाकृत स्थिर और diversified business model वाली कंपनी है। इसलिए निवेश का फैसला केवल तेजी देखकर नहीं बल्कि जोखिम क्षमता और लंबी अवधि की रणनीति के आधार पर करना चाहिए।
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