भारत में चांदी की कीमतों में गुरुवार, 21 मई 2026 को एक बार फिर तेजी देखने को मिली। घरेलू बाजार में चांदी का भाव ₹285 प्रति ग्राम और ₹2,85,000 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। एक ही दिन में चांदी के दाम में ₹5,000 प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सर्राफा बाजार के जानकारों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और औद्योगिक मांग बढ़ने से चांदी की कीमतों में तेजी बनी हुई है।
पिछले कुछ महीनों से सोने के साथ-साथ चांदी में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, पश्चिम एशिया में तनाव और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ रही है, तब निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की तरफ तेजी से रुख कर रहे हैं। यही वजह है कि चांदी की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।
भारत में आज का चांदी का भाव
| यूनिट | आज का भाव | बदलाव |
|---|---|---|
| 1 ग्राम चांदी | ₹285 | + ₹5 |
| 10 ग्राम चांदी | ₹2,850 | + ₹50 |
| 100 ग्राम चांदी | ₹28,500 | + ₹500 |
| 1 किलो चांदी | ₹2,85,000 | + ₹5,000 |
स्रोत के अनुसार, घरेलू बाजार में चांदी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार और डॉलर-रुपया विनिमय दर के आधार पर तय होती हैं। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने पर भारत में आयातित चांदी महंगी हो जाती है, जिसका सीधा असर खुदरा कीमतों पर पड़ता है।
प्रमुख हिंदी भाषी शहरों में चांदी के दाम
| शहर | 10 ग्राम | 100 ग्राम | 1 किलो |
|---|---|---|---|
| दिल्ली | ₹2,850 | ₹28,500 | ₹2,85,000 |
| जयपुर | ₹2,850 | ₹28,500 | ₹2,85,000 |
| लखनऊ | ₹2,850 | ₹28,500 | ₹2,85,000 |
| पटना | ₹2,850 | ₹28,500 | ₹2,85,000 |
| चंडीगढ़ | ₹2,850 | ₹28,500 | ₹2,85,000 |
| गुरुग्राम | ₹2,850 | ₹28,500 | ₹2,85,000 |
| गाजियाबाद | ₹2,850 | ₹28,500 | ₹2,85,000 |
| नोएडा | ₹2,850 | ₹28,500 | ₹2,85,000 |
| अहमदाबाद | ₹2,850 | ₹28,500 | ₹2,85,000 |
| सूरत | ₹2,850 | ₹28,500 | ₹2,85,000 |
| पुणे | ₹2,850 | ₹28,500 | ₹2,85,000 |
| नागपुर | ₹2,850 | ₹28,500 | ₹2,85,000 |
| अयोध्या | ₹2,850 | ₹28,500 | ₹2,85,000 |
क्यों बढ़ रही हैं चांदी की कीमतें?
विशेषज्ञों के अनुसार चांदी की कीमतों में तेजी के पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे पहला कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की मांग बढ़ना है। अमेरिका और यूरोप में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों में पैसा लगा रहे हैं।
दूसरा बड़ा कारण भारतीय रुपये की कमजोरी है। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से आयात लागत बढ़ जाती है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए रुपये की गिरावट का सीधा असर घरेलू कीमतों पर दिखाई देता है।
तीसरा कारण औद्योगिक मांग में तेजी है। इलेक्ट्रिक वाहन, सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मेडिकल उपकरणों में चांदी का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। यही वजह है कि केवल निवेश ही नहीं बल्कि उद्योगों की मांग भी कीमतों को ऊपर धकेल रही है।
निवेशकों के लिए क्यों अहम है चांदी?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में चांदी केवल ज्वेलरी धातु नहीं रह गई है। अब इसे “इंडस्ट्रियल प्रेशियस मेटल” के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले वर्षों में ग्रीन एनर्जी सेक्टर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विस्तार के कारण चांदी की मांग और बढ़ सकती है।
कई निवेश सलाहकार मानते हैं कि अगर वैश्विक तनाव और डॉलर की मजबूती बनी रहती है तो चांदी की कीमतें आने वाले महीनों में नए रिकॉर्ड स्तर छू सकती हैं। हालांकि, निवेशकों को ऊंचे स्तर पर खरीदारी करते समय सावधानी बरतने की सलाह भी दी जा रही है।
क्या आगे और महंगी होगी चांदी?
कमोडिटी बाजार के जानकारों के मुताबिक यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और भू-राजनीतिक तनाव जारी रहता है, तो डॉलर मजबूत बना रह सकता है। ऐसे में रुपये पर दबाव बढ़ेगा और भारत में चांदी की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।
इसके अलावा त्योहारी सीजन और शादी-विवाह का समय नजदीक आने पर घरेलू मांग में भी तेजी देखने को मिल सकती है। इससे आने वाले हफ्तों में चांदी के दाम ऊंचे स्तर पर बने रहने की संभावना जताई जा रही है।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
चांदी महंगी होने का असर सिर्फ ज्वेलरी खरीदने वालों पर नहीं पड़ेगा। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर उपकरण और कई घरेलू उत्पादों की लागत भी बढ़ सकती है। वहीं छोटे निवेशकों के लिए सिल्वर ETF और डिजिटल सिल्वर जैसे विकल्पों में निवेश महंगा हो सकता है।
हालांकि लंबे समय के निवेशक अभी भी चांदी को सुरक्षित निवेश मान रहे हैं, क्योंकि वैश्विक बाजार में अनिश्चितता के दौर में कीमती धातुओं की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है।
स्रोत: GoodReturns Silver Rates
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