PM Kisan Yojana 23rd Installment Update: खरीफ सीजन से पहले किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अब खराब सिबिल स्कोर (CIBIL Score) होने पर भी किसानों को फसल ऋण यानी क्रॉप लोन मिल सकेगा। महाराष्ट्र सरकार ने बैंकों को साफ निर्देश दिए हैं कि केवल सिबिल स्कोर के आधार पर किसानों के लोन आवेदन खारिज नहीं किए जाएं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यह घोषणा ऐसे समय में की है जब लाखों किसान पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं।
किसानों को बड़ी राहत, CIBIL Score अब नहीं बनेगा रुकावट
अब तक ज्यादातर बैंक किसानों को फसल ऋण देने से पहले उनका सिबिल स्कोर जांचते थे। खराब क्रेडिट हिस्ट्री या पुराने लोन बकाया होने की स्थिति में कई किसानों के आवेदन खारिज कर दिए जाते थे। इससे छोटे और सीमांत किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी होती थी।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा बैठक में बैंकों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि किसानों के फसल ऋण को सिबिल स्कोर से जोड़ना गलत है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि खेती मौसम और प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर करती है, इसलिए किसानों को सामान्य लोन धारकों की तरह नहीं देखा जा सकता।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने यह निर्देश मुख्यालय स्तर से लेकर बैंक शाखाओं तक पहुंचा दिए हैं। साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अधिकारियों ने भी इस फैसले को लेकर सहमति जताई है।
सिर्फ महाराष्ट्र के किसानों को मिलेगा फायदा
फिलहाल यह फैसला महाराष्ट्र के किसानों के लिए लागू किया गया है। हालांकि, इस घोषणा के बाद देश के अन्य राज्यों के किसान भी ऐसी ही राहत की मांग कर सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह मॉडल सफल रहता है तो भविष्य में अन्य राज्य सरकारें भी इसे अपनाने पर विचार कर सकती हैं।
महाराष्ट्र देश के उन प्रमुख राज्यों में शामिल है जहां बड़ी संख्या में किसान खेती के लिए बैंक ऋण पर निर्भर रहते हैं। सोयाबीन, कपास, गन्ना और दलहन की खेती करने वाले किसानों के लिए समय पर ऋण मिलना बेहद जरूरी होता है।
30 जून से पहले कर्ज माफी का भरोसा
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री फडणवीस ने कृषि ऋण माफी योजना को लेकर भी बड़ा अपडेट दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की घोषित कर्ज माफी योजना पर तेजी से काम चल रहा है और 30 जून से पहले पात्र किसानों को राहत देने का प्रयास किया जाएगा।
मुख्यमंत्री के अनुसार, कुछ जिलों से आंकड़े आने बाकी हैं। जैसे ही सभी जिलों की रिपोर्ट पूरी होगी, सरकार अंतिम प्रक्रिया शुरू करेगी। इस ऐलान से राज्य के लाखों किसानों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस बार महाराष्ट्र में खरीफ खेती का रकबा लगभग 152 लाख हेक्टेयर रहने का अनुमान है। इसमें करीब 88 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन और कपास की बुआई होने की संभावना है।
कमजोर मानसून की आशंका से बढ़ी चिंता
इस साल मौसम विभाग ने जून से सितंबर के बीच बारिश धीरे-धीरे कम होने की संभावना जताई है। ऐसे में किसानों के सामने उत्पादन और सिंचाई को लेकर नई चुनौती खड़ी हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मानसून सामान्य से कमजोर रहता है तो किसानों की लागत बढ़ सकती है। ऐसे समय में सस्ता और आसान फसल ऋण किसानों के लिए बड़ी राहत साबित होगा। इसी वजह से सरकार बैंकिंग प्रक्रिया को आसान बनाने पर जोर दे रही है।
खाद डीलरों पर सरकार की सख्ती
मुख्यमंत्री फडणवीस ने उर्वरक डीलरों को भी कड़ी चेतावनी दी है। कई जगहों से शिकायतें मिल रही थीं कि किसान जब डीएपी या यूरिया खरीदने जाते हैं तो उन्हें जबरन दूसरे उत्पाद भी खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है।
सरकार ने साफ कहा है कि अगर किसान को केवल डीएपी या यूरिया चाहिए तो डीलर उसे अतिरिक्त सामान खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। नियमों का उल्लंघन करने वाले डीलरों पर कार्रवाई शुरू भी हो चुकी है।
राज्य सरकार के अनुसार अब तक 400 से ज्यादा उर्वरक डीलरों के लाइसेंस निलंबित या रद्द किए जा चुके हैं। सरकार का कहना है कि किसानों के शोषण को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
PM Kisan की 23वीं किस्त पर क्यों बढ़ी उम्मीद?
केंद्र सरकार की पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि तीन किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है।
अब किसान 23वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में महाराष्ट्र सरकार की यह घोषणा किसानों के लिए डबल राहत की तरह देखी जा रही है। एक तरफ किसानों को फसल ऋण मिलने में आसानी होगी, वहीं दूसरी ओर पीएम किसान की अगली किस्त भी जल्द आने की उम्मीद बनी हुई है।
कृषि क्षेत्र पर क्या पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसानों को बिना सिबिल स्कोर बाधा के समय पर ऋण मिल जाता है तो इससे खेती की तैयारी मजबूत होगी। बीज, खाद, कीटनाशक और सिंचाई जैसे जरूरी खर्च समय पर पूरे किए जा सकेंगे।
इसके अलावा साहूकारों और निजी उधारदाताओं पर किसानों की निर्भरता भी कम हो सकती है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी प्रवाह बढ़ने से कृषि बाजार को भी फायदा मिल सकता है।
हालांकि बैंकिंग क्षेत्र के कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे एनपीए (NPA) का जोखिम बढ़ सकता है। लेकिन सरकार का तर्क है कि किसानों को राहत देना मौजूदा समय में ज्यादा जरूरी है।
निष्कर्ष
महाराष्ट्र सरकार का यह फैसला किसानों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। खराब सिबिल स्कोर के कारण फसल ऋण से वंचित रहने वाले किसानों को अब खरीफ सीजन से पहले मदद मिल सकेगी। साथ ही कर्ज माफी और खाद डीलरों पर कार्रवाई जैसे फैसलों ने सरकार का रुख साफ कर दिया है कि इस बार खेती और किसानों को प्राथमिकता दी जा रही है।
अगर आने वाले दिनों में अन्य राज्य भी इसी तरह के कदम उठाते हैं तो देशभर के किसानों को बड़ा फायदा मिल सकता है।
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