Ola Electric के शेयरों में गुरुवार को चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजों के बाद तेज दबाव देखने को मिला। कंपनी के शेयर शुरुआती कारोबार में 4 फीसदी से ज्यादा टूट गए। निवेशकों की चिंता की सबसे बड़ी वजह कंपनी के रेवेन्यू में आई भारी गिरावट और लगातार घाटे का बने रहना है। हालांकि कंपनी ने घाटे में कमी दर्ज की है, लेकिन बाजार फिलहाल केवल “कम घाटा” नहीं बल्कि मजबूत ग्रोथ और स्थिर बिजनेस मॉडल देखना चाहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल स्टॉक तकनीकी रूप से कमजोर बना हुआ है और आने वाले दिनों में इसमें और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। खासकर इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बिक्री की धीमी रफ्तार निवेशकों को सतर्क बना रही है।
Q4 रिजल्ट के बाद क्यों टूटा शेयर?
ओला इलेक्ट्रिक ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के नतीजों में बताया कि कंपनी का शुद्ध घाटा सालाना आधार पर करीब 43 फीसदी घटकर 500 करोड़ रुपये रह गया। पिछले साल समान तिमाही में कंपनी को लगभग 870 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। पहली नजर में घाटा कम होना सकारात्मक लग सकता है, लेकिन बाजार की चिंता कहीं ज्यादा बड़ी है।
असल दबाव कंपनी के रेवेन्यू पर दिखा। जनवरी-मार्च तिमाही में ओला इलेक्ट्रिक का रेवेन्यू 56 फीसदी से ज्यादा गिरकर केवल 265 करोड़ रुपये रह गया। एक साल पहले यह आंकड़ा 611 करोड़ रुपये था। इतनी बड़ी गिरावट यह संकेत देती है कि कंपनी अभी भी बिक्री और मांग को स्थिर करने के लिए संघर्ष कर रही है।
इसके अलावा EBITDA स्तर पर भी कंपनी घाटे में चली गई। पिछले साल जहां कंपनी को EBITDA स्तर पर मामूली मुनाफा हुआ था, वहीं इस बार 82.2 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया गया। इसका मतलब यह है कि ऑपरेशनल स्तर पर कंपनी पर अभी भी दबाव बना हुआ है।
बाजार को किस बात की सबसे ज्यादा चिंता?
विश्लेषकों का मानना है कि निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता कंपनी की भविष्य की ग्रोथ को लेकर है। भारत का इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार तेजी से प्रतिस्पर्धी हो चुका है। अब केवल शुरुआती ब्रांड वैल्यू के दम पर बिक्री बनाए रखना आसान नहीं है।
ओला इलेक्ट्रिक को अब कई मोर्चों पर चुनौती मिल रही है: पारंपरिक ऑटो कंपनियों की EV एंट्री, सर्विस नेटवर्क को लेकर शिकायतें, बढ़ती प्रतिस्पर्धा, कीमतों का दबाव, बैटरी और सप्लाई चेन लागत हालांकि कंपनी ने कहा है कि उसने ऑपरेटिंग खर्चों में कटौती की है और ग्रॉस मार्जिन बेहतर हुआ है, लेकिन निवेशक फिलहाल रेवेन्यू ग्रोथ और स्थिर बिक्री का इंतजार कर रहे हैं।
एक्सपर्ट ने बताए अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल
आनंद राठी इन्वेस्टमेंट सर्विसेज के सीनियर मैनेजर जिगर एस पटेल के मुताबिक, ओला इलेक्ट्रिक के शेयर के लिए 33.5 रुपये का स्तर बेहद अहम है। अगर यह स्तर टूटता है तो शेयर में और बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि:
- ₹33.5 = मजबूत सपोर्ट
- ₹38 = निकट रेजिस्टेंस
- ₹41 के ऊपर क्लोजिंग = नई तेजी का संकेत
तकनीकी चार्ट के हिसाब से फिलहाल स्टॉक कमजोर दायरे में बना हुआ है। अप्रैल से यह शेयर लगभग 33 से 41 रुपये के दायरे में फंसा हुआ है। इसका मतलब है कि निवेशक अभी स्पष्ट दिशा का इंतजार कर रहे हैं।
क्या 30 रुपये के नीचे जा सकता है शेयर?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अगर कंपनी अगले एक-दो तिमाहियों में मजबूत बिक्री वृद्धि नहीं दिखा पाती है तो शेयर पर दबाव और बढ़ सकता है। खासकर अगर 33 रुपये का स्तर टूटता है तो तकनीकी रूप से अगला सपोर्ट 30 रुपये के आसपास माना जा सकता है।
हालांकि दूसरी तरफ, अगर कंपनी: बिक्री में सुधार दिखाती है, घाटा लगातार घटाती है, EV मार्केट शेयर बचाने में सफल रहती है, और FY27 आउटलुक के मुताबिक रेवेन्यू बढ़ाती है, तो शेयर में रिकवरी भी देखने को मिल सकती है।
FY27 आउटलुक से क्या संकेत मिला?
ओला इलेक्ट्रिक ने पहली तिमाही FY27 के लिए 500–550 करोड़ रुपये के कंसोलिडेटेड रेवेन्यू का अनुमान दिया है। यह संकेत देता है कि कंपनी आने वाले महीनों में बिक्री सुधार की उम्मीद कर रही है।
लेकिन बाजार अब केवल अनुमान नहीं बल्कि वास्तविक नतीजे देखना चाहता है। पिछले कुछ महीनों में EV सेक्टर के कई स्टॉक्स में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है और निवेशक अब केवल भविष्य की कहानी पर भरोसा करने के बजाय मुनाफे और स्थिर ग्रोथ को ज्यादा महत्व दे रहे हैं।
लिस्टिंग के बाद कैसे रहा शेयर का सफर?
अगस्त 2024 में लिस्टिंग के बाद ओला इलेक्ट्रिक के शेयरों ने करीब 164 रुपये का रिकॉर्ड हाई बनाया था। उस समय EV सेक्टर को लेकर निवेशकों में जबरदस्त उत्साह था। लेकिन बाद में: कमजोर तिमाही नतीजे, बढ़ती प्रतिस्पर्धा, प्रॉफिटेबिलिटी को लेकर चिंता, और बाजार में बिकवाली की वजह से शेयर लगातार टूटता गया।
एक समय यह स्टॉक 22 रुपये तक फिसल गया था। फिलहाल शेयर उस निचले स्तर से ऊपर जरूर है, लेकिन अभी भी अपने हाई से काफी नीचे कारोबार कर रहा है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल इस स्टॉक में जल्दबाजी में बड़ी खरीदारी से बचना चाहिए। जिन निवेशकों के पास पहले से शेयर हैं, उन्हें 33.5 रुपये के स्तर पर नजर रखनी चाहिए। वहीं नए निवेशकों को तब तक इंतजार करना चाहिए जब तक शेयर 41 रुपये के ऊपर मजबूती से बंद न हो जाए।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कंपनी का भविष्य काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि वह बिक्री कितनी तेजी से बढ़ाती है, घाटा कितनी जल्दी कम करती है, और भारतीय EV बाजार में अपनी स्थिति कितनी मजबूत रख पाती है।
निष्कर्ष
ओला इलेक्ट्रिक के Q4 नतीजों में घाटा जरूर कम हुआ है, लेकिन रेवेन्यू में भारी गिरावट ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल स्टॉक तकनीकी रूप से कमजोर नजर आ रहा है और 33.5 रुपये का स्तर बेहद अहम माना जा रहा है। आने वाली तिमाहियों में कंपनी की बिक्री और प्रॉफिटेबिलिटी तय करेगी कि शेयर में रिकवरी आएगी या गिरावट और गहरी होगी।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सूचना के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर करें।
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