भारत के कृषि निर्यात क्षेत्र के लिए एक बड़ी चिंता सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय सोयामील (Soyameal) की कीमतें तेजी से बढ़ने के कारण इसका निर्यात अब पिछले चार साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। इसका सीधा असर देश के लाखों सोयाबीन किसानों पर पड़ सकता है, खासकर मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे बड़े उत्पादक राज्यों में।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव, ग्लोबल सप्लाई चेन संकट और अमेरिकी टैरिफ नीतियों के बीच भारतीय कृषि उत्पाद पहले से दबाव में हैं। अब सोयामील निर्यात में गिरावट ने नई चिंता पैदा कर दी है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले महीनों में कीमतों में नरमी नहीं आई, तो भारत वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी और खो सकता है।
आखिर क्यों घट रहा है भारतीय सोयामील का निर्यात?
दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय सोयामील की कीमतें प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में काफी ज्यादा हो गई हैं। यही सबसे बड़ी वजह बन रही है कि विदेशी खरीदार अब भारत की बजाय दक्षिण अमेरिका के देशों से खरीदारी कर रहे हैं।
Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले महीने भारतीय सोयामील की कीमतों में करीब 47 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पाद महंगा हो गया।
कीमतों में कितना अंतर?
| देश/क्षेत्र | सोयामील कीमत (प्रति टन) |
|---|---|
| भारत | लगभग 680 डॉलर |
| दक्षिण अमेरिका | लगभग 430 डॉलर |
करीब 250 डॉलर प्रति टन का यह अंतर विदेशी आयातकों के लिए बड़ा फैक्टर बन गया है। नतीजा यह हुआ कि भारतीय निर्यातकों को नए ऑर्डर मिलना लगभग बंद हो गए हैं।
चार साल के निचले स्तर पर पहुंच सकता है निर्यात
उद्योग के अनुमान के मुताबिक मौजूदा सीजन में भारत का सोयामील निर्यात घटकर लगभग 9 लाख टन रह सकता है। पिछले साल यह आंकड़ा करीब 29 लाख टन के आसपास था। यानी एक ही साल में लगभग 20 लाख टन की गिरावट संभव है। यदि ऐसा होता है तो यह 4 साल का सबसे कमजोर प्रदर्शन होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा लगातार कमजोर हो रही है क्योंकि: घरेलू उत्पादन कम हुआ है, कच्चे सोयाबीन की कीमतें ऊंची हैं, प्रोसेसिंग लागत बढ़ गई है, लॉजिस्टिक्स खर्च भी ज्यादा है.
किसानों पर क्या असर पड़ेगा?
सोयामील निर्यात में गिरावट का सबसे बड़ा असर किसानों की आय पर पड़ सकता है। जब निर्यात घटता है तो घरेलू बाजार में स्टॉक बढ़ने लगता है। इससे मंडियों में कीमतों पर दबाव आता है।
सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं ये राज्य
मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान इन राज्यों में बड़ी संख्या में किसान सोयाबीन की खेती पर निर्भर हैं। इस बार कई कारणों से उत्पादन पहले ही प्रभावित रहा: बेमौसम बारिश, कमजोर मानसून वाले क्षेत्र, खेती का रकबा कम होना, अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता.
कई किसानों ने इस साल सोयाबीन की खेती कम कर दी थी क्योंकि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के दौरान आयात नीति को लेकर असमंजस बना हुआ था।
West Asia War और Global Trade Tension का भी असर
पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर सिर्फ कच्चे तेल तक सीमित नहीं है। इसका असर कृषि कमोडिटी ट्रेड पर भी दिखाई दे रहा है। समुद्री मालभाड़ा बढ़ने, बीमा लागत महंगी होने और डॉलर में मजबूती के कारण भारतीय निर्यातकों की लागत और बढ़ गई है। दूसरी ओर ब्राजील और अर्जेंटीना जैसे देश बड़े पैमाने पर सस्ते सोयामील की सप्लाई कर रहे हैं।
यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय खरीदार अब भारतीय माल से दूरी बना रहे हैं।
क्या आने वाले समय में कम होंगे सोयामील के दाम?
फिलहाल इसकी संभावना कम दिखाई दे रही है। उद्योग जगत का मानना है कि घरेलू बाजार में सोयाबीन की सप्लाई अभी भी सीमित बनी हुई है।
लातूर के प्रमुख सोयाबीन प्रोसेसर अशोक भुताडा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि:
“आपूर्ति कम होने के कारण सोयाबीन की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। अगले कुछ महीनों तक सोयामील के दाम ऊंचे रह सकते हैं।”
यानी यदि उत्पादन में बड़ी बढ़ोतरी नहीं होती, तो भारतीय सोयामील की कीमतें जल्दी नीचे आने की उम्मीद कम है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है Soyameal Export?
सोयामील मुख्य रूप से पशु आहार उद्योग में इस्तेमाल होता है। भारत लंबे समय से एशियाई बाजारों में इसका बड़ा सप्लायर रहा है।
भारत से प्रमुख निर्यात गंतव्य: बांग्लादेश, नेपाल, वियतनाम, दक्षिण-पूर्व एशियाई देश लेकिन अब दक्षिण अमेरिकी देशों की आक्रामक सप्लाई भारत के बाजार पर दबाव बना रही है।
क्या सरकार को दखल देना पड़ सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्यात में गिरावट लंबे समय तक जारी रहती है, तो सरकार को: निर्यात प्रोत्साहन, लॉजिस्टिक्स राहत, किसानों के लिए MSP समर्थन, प्रोसेसिंग उद्योग को राहत जैसे कदमों पर विचार करना पड़ सकता है।
क्योंकि सोयाबीन सिर्फ एक फसल नहीं बल्कि खाद्य तेल, पशु आहार और कृषि निर्यात से जुड़ी बड़ी आर्थिक श्रृंखला का हिस्सा है।
आगे क्या?
अगले कुछ महीने भारतीय सोयाबीन सेक्टर के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं। यदि: वैश्विक कीमतों में नरमी आती है, घरेलू उत्पादन सुधरता है, और निर्यात प्रतिस्पर्धा बेहतर होती है, तो स्थिति संभल सकती है।
लेकिन फिलहाल संकेत यही बता रहे हैं कि भारतीय सोयामील उद्योग दबाव में है और इसका असर किसानों की कमाई से लेकर कृषि निर्यात तक दिखाई दे सकता है।
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