भारत की टॉफी अब सिर्फ बच्चों की पसंद नहीं रही, बल्कि यह देश के तेजी से बढ़ते फूड एक्सपोर्ट सेक्टर का भी अहम हिस्सा बन चुकी है। प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni को ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट करने के बाद भारतीय टॉफी उद्योग एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। सोशल मीडिया पर #Melodi ट्रेंड करने लगा और इसी बीच भारत के टॉफी एक्सपोर्ट से जुड़े चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने बुधवार को बताया कि पिछले 12 वर्षों में भारत के टॉफी निर्यात में करीब 166 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह आंकड़ा बताता है कि भारतीय मिठाइयों और कन्फेक्शनरी उत्पादों की मांग अब वैश्विक बाजारों में लगातार बढ़ रही है।
2013 से 2026 तक कहां से कहां पहुंचा टॉफी एक्सपोर्ट?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत से टॉफी और कन्फेक्शनरी उत्पादों का निर्यात वित्त वर्ष 2013-14 में करीब 49.68 करोड़ रुपये था। वहीं 2025-26 में यह बढ़कर लगभग 132 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यानी एक दशक से थोड़ा ज्यादा समय में यह कारोबार ढाई गुना के करीब पहुंच चुका है।
भारत के टॉफी एक्सपोर्ट का सफर
| वित्त वर्ष | एक्सपोर्ट वैल्यू |
|---|---|
| 2013-14 | ₹49.68 करोड़ |
| 2025-26 | ₹132 करोड़ |
| कुल वृद्धि | लगभग 166% |
यह बढ़ोतरी सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह भारत के फूड प्रोसेसिंग और FMCG सेक्टर की बदलती वैश्विक पहचान को भी दिखाती है।
‘मेलोडी’ गिफ्ट ने फिर बढ़ाई भारतीय टॉफियों की चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी की इटली यात्रा के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा जिस चीज की हुई, वह कोई रक्षा समझौता या राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि एक साधारण सी भारतीय टॉफी थी। मेलोनी ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी उनके लिए “बहुत शानदार टॉफी” लेकर आए थे।
इसके बाद सोशल मीडिया पर ‘मेलोडी’ टॉफी और #Melodi हैशटैग तेजी से ट्रेंड करने लगा। यह हैशटैग पहली बार 2023 में दुबई में आयोजित COP28 सम्मेलन के दौरान वायरल हुआ था, जब मोदी और मेलोनी की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर काफी शेयर हुए थे। अब इस गिफ्ट ने भारतीय ब्रांडिंग और “सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी” को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
भारतीय टॉफियों की विदेशों में क्यों बढ़ रही मांग?
विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय कन्फेक्शनरी बाजार को कई वजहों से फायदा मिल रहा है।
1. भारतीय स्वाद का ग्लोबल विस्तार
विदेशों में रहने वाले भारतीयों की बड़ी आबादी भारतीय ब्रांड्स की मांग बढ़ा रही है। गल्फ देशों, अमेरिका, कनाडा और यूरोप में भारतीय मिठाई और टॉफी उत्पादों की बिक्री लगातार बढ़ रही है।
2. कम कीमत, बेहतर क्वालिटी
भारतीय कंपनियां कम लागत में अच्छे स्वाद और लंबी शेल्फ लाइफ वाले उत्पाद बना रही हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धा मजबूत हुई है।
3. FMCG कंपनियों का विस्तार
Parle Products, ITC Limited, Perfetti Van Melle जैसी कंपनियां लगातार नए बाजारों में पहुंच बना रही हैं।
4. भारत सरकार का फूड एक्सपोर्ट फोकस
केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों से कृषि और प्रोसेस्ड फूड एक्सपोर्ट बढ़ाने पर जोर दे रही है। इसके तहत कई योजनाओं और निर्यात प्रोत्साहन कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया गया है।
किन देशों में सबसे ज्यादा जाती है भारतीय टॉफी?
भारत से निर्यात होने वाली टॉफियों और कन्फेक्शनरी उत्पादों की सबसे ज्यादा मांग इन क्षेत्रों में देखी जा रही है: खाड़ी देश (UAE, सऊदी अरब, ओमान), अमेरिका, कनाडा, अफ्रीकी देश, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया इन बाजारों में भारतीय उत्पादों को “वैल्यू फॉर मनी” कैटेगरी में काफी पसंद किया जा रहा है।
सिर्फ टॉफी नहीं, भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ भी बढ़ी
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मामला सिर्फ एक टॉफी गिफ्ट तक सीमित नहीं है। यह भारत की सांस्कृतिक और उपभोक्ता ब्रांडिंग का भी हिस्सा है। जैसे जापान अपनी चाय और एनीमे संस्कृति के जरिए पहचान बनाता है, वैसे ही भारत भी धीरे-धीरे अपने FMCG और फूड ब्रांड्स को वैश्विक पहचान दिला रहा है।
मोदी द्वारा मेलोडी टॉफी गिफ्ट करना एक तरह से “लोकल ब्रांड को ग्लोबल मंच” देने जैसा माना जा रहा है।
भारतीय कन्फेक्शनरी इंडस्ट्री कितनी बड़ी है?
भारत का कन्फेक्शनरी बाजार तेजी से बढ़ रहा है। मार्केट रिसर्च रिपोर्ट्स के मुताबिक देश का कैंडी और टॉफी बाजार हजारों करोड़ रुपये का हो चुका है। ग्रामीण बाजारों में भी इसकी मजबूत पकड़ है। प्रीमियम और चॉकलेट-आधारित कैंडी सेगमेंट तेजी से बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर निर्यात की यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले वर्षों में भारतीय कन्फेक्शनरी सेक्टर और तेजी से विस्तार कर सकता है।
‘मेलोडी’ ट्रेंड से कंपनियों को भी फायदा?
सोशल मीडिया पर ट्रेंडिंग का सीधा असर FMCG ब्रांड्स पर भी पड़ता है। मार्केटिंग विशेषज्ञों का मानना है कि मेलोडी टॉफी को जो वैश्विक चर्चा मिली है, उसका फायदा संबंधित ब्रांड और पूरे भारतीय कन्फेक्शनरी सेक्टर को मिल सकता है।
इस तरह के “ऑर्गेनिक वायरल मोमेंट्स” कई बार करोड़ों रुपये की मार्केटिंग से भी ज्यादा असर डालते हैं।
भारत-इटली संबंधों पर भी रहा फोकस
प्रधानमंत्री मोदी की इटली यात्रा के दौरान व्यापार, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और तकनीक जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत और इटली दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। ऐसे में एक साधारण भारतीय टॉफी ने भी दोनों देशों के बीच दोस्ताना रिश्तों को सोशल मीडिया पर खास चर्चा दिला दी।
निष्कर्ष
भारत का टॉफी एक्सपोर्ट डेटा दिखाता है कि छोटे दिखने वाले FMCG उत्पाद भी देश की अर्थव्यवस्था और ब्रांड वैल्यू में बड़ा योगदान दे सकते हैं। मोदी-मेलोनी ‘मेलोडी’ मोमेंट ने भारतीय टॉफियों को अंतरराष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है। वहीं 166 फीसदी निर्यात वृद्धि यह संकेत देती है कि आने वाले समय में भारतीय कन्फेक्शनरी उद्योग वैश्विक बाजार में और मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकता है।
Also Read:


