भारत अब पेट्रोल-डीजल पर अपनी निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। केंद्र सरकार अगले दो वर्षों में देशभर में 5,000 E100 यानी 100% इथेनॉल ईंधन स्टेशन खोलने की तैयारी कर रही है। अगर यह योजना बड़े स्तर पर सफल होती है तो आने वाले वर्षों में भारत के ट्रांसपोर्ट सेक्टर की तस्वीर बदल सकती है।
सरकार का दावा है कि इससे विदेशी कच्चे तेल पर खर्च कम होगा, किसानों की आय बढ़ेगी और लोगों को पेट्रोल से सस्ता विकल्प मिल सकेगा। शुरुआती चरण में दिल्ली, मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे शहरों में 150 E100 आउटलेट शुरू किए जाएंगे।
क्या है E100 इथेनॉल फ्यूल?
E100 का मतलब है ऐसा ईंधन जिसमें 100 प्रतिशत इथेनॉल का इस्तेमाल हो। इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से बनाया जाता है। भारत पहले ही पेट्रोल में 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) की दिशा में तेजी से काम कर रहा है, लेकिन अब सरकार इससे एक कदम आगे जाकर पूरी तरह इथेनॉल आधारित फ्यूल इकोनॉमी तैयार करना चाहती है।
ब्राजील जैसे देशों में फ्लेक्स-फ्यूल वाहन और इथेनॉल आधारित ईंधन मॉडल पहले से सफल माने जाते हैं। भारत अब उसी दिशा में बड़े पैमाने पर निवेश की तैयारी कर रहा है।
अगले एक महीने में खुलेंगे 150 नए आउटलेट
सरकारी रोडमैप के मुताबिक अगले एक महीने में दिल्ली, मुंबई, पुणे और नागपुर में 150 E100 रिटेल आउटलेट शुरू किए जाएंगे। इसके बाद अगले 6 से 12 महीनों में इसका विस्तार दिल्ली-NCR, महाराष्ट्र, बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता और हैदराबाद तक किया जाएगा।
सरकार का लक्ष्य है कि अगले 24 महीनों के भीतर देशभर में 5,000 E100 स्टेशन चालू हो जाएं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस योजना को लेकर ऑटोमोबाइल कंपनियों और तेल विपणन कंपनियों के साथ कई दौर की उच्चस्तरीय बैठकें भी की हैं।
क्यों बदलना चाहती है सरकार पूरा फ्यूल मॉडल?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85-90% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने पर देश का आयात बिल तेजी से बढ़ जाता है, जिसका असर सीधे पेट्रोल-डीजल की कीमतों, महंगाई और रुपये की स्थिति पर पड़ता है।
वित्त वर्ष 2026 में भारत ने कच्चे तेल के आयात पर करीब 10.9 लाख करोड़ रुपये खर्च किए। सरकार मानती है कि यदि ट्रांसपोर्ट सेक्टर में इथेनॉल का उपयोग बड़े स्तर पर बढ़ता है तो इस भारी खर्च में कमी लाई जा सकती है। यही वजह है कि इथेनॉल को केवल वैकल्पिक ईंधन नहीं बल्कि रणनीतिक आर्थिक हथियार के तौर पर देखा जा रहा है।
किसानों को कैसे होगा फायदा?
इथेनॉल उत्पादन का सबसे बड़ा फायदा कृषि क्षेत्र को मिल सकता है। गन्ना, मक्का और अन्य फसल आधारित बायोफ्यूल की मांग बढ़ने से किसानों की आय में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
इंडियन शुगर एंड बायोएनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के महानिदेशक दीपक बलानी के अनुसार भारत में इथेनॉल का पूरा उत्पादन घरेलू स्तर पर होता है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और करोड़ों किसानों को सीधा फायदा मिल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि E100 मॉडल सफल होता है तो चीनी मिलों, बायोएनर्जी कंपनियों और कृषि आधारित उद्योगों में निवेश तेजी से बढ़ सकता है।
क्या आपकी मौजूदा गाड़ी E100 पर चल पाएगी?
नहीं। E100 ईंधन के लिए फ्लेक्स-फ्यूल वाहन (FFV) की जरूरत होगी। ये ऐसी गाड़ियां होती हैं जो पेट्रोल और इथेनॉल दोनों पर चल सकती हैं।
मारुति सुजुकी, हुंडई, टाटा मोटर्स, टोयोटा, महिंद्रा, हीरो मोटोकॉर्प और टीवीएस जैसी कंपनियां पहले ही फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल तैयार कर चुकी हैं। हालांकि अब तक देश में पर्याप्त E100 फ्यूल स्टेशन नहीं होने के कारण इन वाहनों को बड़े स्तर पर लॉन्च नहीं किया गया था।
सरकार के नए रोडमैप के बाद अब कंपनियां अपने फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल बाजार में तेजी से उतार सकती हैं।
क्या सच में आधी हो जाएगी पेट्रोल की कीमत?
यही सबसे बड़ा सवाल है। अभी सरकार ने E100 की आधिकारिक कीमत तय नहीं की है, लेकिन ऑटो उद्योग से जुड़े संगठनों ने मांग की है कि इसकी कीमत सामान्य पेट्रोल से कम से कम 30% कम रखी जाए।
सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) का कहना है कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का माइलेज सामान्य पेट्रोल की तुलना में थोड़ा कम होता है। ऐसे में यदि ईंधन सस्ता नहीं हुआ तो उपभोक्ताओं को बड़ा फायदा महसूस नहीं होगा।
हालांकि कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि सरकार टैक्स में राहत देती है और बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होता है तो लंबे समय में E100 पेट्रोल की तुलना में काफी सस्ता विकल्प बन सकता है।
पहले क्यों नहीं सफल हुआ E100 मॉडल?
इंडियन ऑयल (IOC) ने पहले पायलट प्रोजेक्ट के तहत लगभग 400 आउटलेट्स पर E100 ईंधन उपलब्ध कराया था, लेकिन उस समय बाजार में फ्लेक्स-फ्यूल वाहन लगभग नहीं थे। यही कारण रहा कि बिक्री 0.5% से भी कम रही।
अब स्थिति बदल रही है। सरकार एक साथ तीन स्तर पर काम कर रही है: फ्यूल स्टेशन नेटवर्क बढ़ाना, ऑटो कंपनियों को प्रोत्साहन देना, इथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाना यदि ये तीनों चीजें साथ आगे बढ़ती हैं तो भारत में इथेनॉल आधारित ईंधन व्यवस्था तेजी से फैल सकती है।
ब्राजील मॉडल से क्या सीख रहा है भारत?
ब्राजील दुनिया के सबसे बड़े इथेनॉल आधारित फ्यूल बाजारों में शामिल है। वहां बड़ी संख्या में वाहन फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी पर चलते हैं। कई जगह लोग पेट्रोल की बजाय सीधे इथेनॉल इस्तेमाल करते हैं।
भारत भी अब इसी मॉडल को अपनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन चुनौती यहां कहीं ज्यादा बड़ी है क्योंकि भारत का वाहन बाजार और जनसंख्या दोनों विशाल हैं।
किन कंपनियों को हो सकता है फायदा?
यदि E100 योजना तेजी से आगे बढ़ती है तो कई सेक्टर की कंपनियों को बड़ा फायदा मिल सकता है: शुगर कंपनियां, बायोफ्यूल निर्माता, एग्री-प्रोसेसिंग कंपनियां, फ्लेक्स-फ्यूल वाहन बनाने वाली ऑटो कंपनियां, इथेनॉल सप्लाई चेन से जुड़ी कंपनियां इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में नए निवेश और रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
क्या हैं सबसे बड़ी चुनौतियां?
हालांकि योजना बड़ी है, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं।
सबसे बड़ी चुनौती है पर्याप्त इथेनॉल उत्पादन। यदि मांग अचानक बढ़ती है तो सप्लाई पर दबाव आ सकता है। इसके अलावा फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों की कीमत, इंफ्रास्ट्रक्चर और टैक्स नीति भी अहम भूमिका निभाएगी।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यदि इथेनॉल उत्पादन के लिए जरूरत से ज्यादा कृषि भूमि इस्तेमाल हुई तो खाद्य सुरक्षा और पानी की खपत जैसे मुद्दे भी सामने आ सकते हैं।
भारत में शुरू हो सकती है नई “इथेनॉल क्रांति”
पेट्रोलियम मंत्रालय की नई योजना केवल ईंधन बदलने की कोशिश नहीं है, बल्कि यह भारत की ऊर्जा रणनीति का बड़ा बदलाव माना जा रहा है। यदि सरकार अपने लक्ष्य के अनुसार 5,000 E100 स्टेशन शुरू करने में सफल रहती है तो आने वाले वर्षों में देश का फ्यूल बाजार पूरी तरह बदल सकता है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार E100 की कीमत कितनी रखती है, ऑटो कंपनियां कितनी तेजी से फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां लॉन्च करती हैं और आम लोग इसे कितनी तेजी से अपनाते हैं।
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