भारत में ऐसे कई उद्योगपति हुए हैं जिन्होंने बेहद साधारण परिस्थितियों से निकलकर अरबों रुपये का कारोबार खड़ा किया। लेकिन कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो सिर्फ बिजनेस सक्सेस नहीं बल्कि संघर्ष, जोखिम और जिद की मिसाल बन जाती हैं। ऐसी ही कहानी है सत्यनारायण नुवाल की, जिन्होंने रेलवे स्टेशन पर रातें गुजारने से लेकर देश की सबसे बड़ी प्राइवेट विस्फोटक कंपनी खड़ी करने तक का सफर तय किया।
आज उनकी कंपनी Solar Industries India का मार्केट कैप 1.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है और यह भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में औद्योगिक विस्फोटक और रक्षा उत्पाद सप्लाई करती है। लेकिन इस सफलता के पीछे दशकों का संघर्ष, असफलता और लगातार जोखिम उठाने की कहानी छिपी हुई है।
10वीं के बाद छोड़नी पड़ी पढ़ाई
सत्यनारायण नुवाल राजस्थान के भीलवाड़ा के एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं। उनके पिता सरकारी कर्मचारी थे और परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। इसी वजह से उन्हें 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी।
कम उम्र में ही परिवार की जिम्मेदारियां उनके कंधों पर आ गईं। महज 18 साल की उम्र में उन्होंने काम करना शुरू कर दिया। उस समय उनके पास ना कोई बड़ा बिजनेस बैकग्राउंड था और ना ही निवेश के लिए पूंजी। लेकिन कुछ बड़ा करने की इच्छा जरूर थी।
स्याही बेचने से शुरू हुआ कारोबार
आज करोड़ों- अरबों के विस्फोटक कारोबार से जुड़े सत्यनारायण नुवाल ने अपने बिजनेस करियर की शुरुआत स्याही बेचने से की थी। उन्होंने छोटे स्तर पर व्यापार शुरू किया और कई तरह के छोटे-मोटे कारोबार में हाथ आजमाया।
हालांकि शुरुआती दौर में उन्हें लगातार असफलताओं का सामना करना पड़ा। कई बिजनेस बंद हो गए और आर्थिक संकट इतना बढ़ गया कि कुछ समय उन्हें रेलवे स्टेशन पर रात गुजारनी पड़ी। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
यही वह दौर था जिसने उन्हें जोखिम लेना और बाजार को समझना सिखाया।
नौकरी की तलाश में पहुंचे महाराष्ट्र
1970 के दशक में वे काम की तलाश में महाराष्ट्र के चंद्रपुर पहुंचे। यहीं उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया। यहां उनकी मुलाकात एक ऐसे व्यापारी से हुई जो विस्फोटक कारोबार से जुड़ा हुआ था।
उन्होंने 1,000 रुपये महीने के किराए पर एक विस्फोटक लाइसेंस और डिपो लेकर कंसाइनमेंट एजेंट के रूप में काम शुरू किया। धीरे-धीरे उन्हें समझ आने लगा कि भारत में कोयला खदानों, इंफ्रास्ट्रक्चर और माइनिंग सेक्टर में औद्योगिक विस्फोटकों की मांग तेजी से बढ़ रही है। यहीं से उन्होंने तय किया कि भविष्य इसी सेक्टर में है।
60 लाख का कर्ज लेकर शुरू की कंपनी
कई साल तक इस कारोबार को करीब से समझने और नेटवर्क बनाने के बाद सत्यनारायण नुवाल ने बड़ा जोखिम उठाने का फैसला किया। साल 1995 में उन्होंने बैंक से करीब 60 लाख रुपये का कर्ज लिया और अपनी कंपनी Solar Industries India की शुरुआत की।
उस समय यह फैसला आसान नहीं था। विस्फोटक उद्योग में लाइसेंस, सुरक्षा नियम, सरकारी मंजूरियां और भारी निवेश जैसी कई चुनौतियां थीं। लेकिन नुवाल ने धीरे-धीरे कंपनी को बढ़ाया और कोयला कंपनियों तथा माइनिंग सेक्टर से बड़े ऑर्डर हासिल करने शुरू किए।
कैसे बना बारूदी साम्राज्य?
भारत में कोयला उत्पादन, सड़क निर्माण, रेलवे परियोजनाओं और खनन गतिविधियों के विस्तार ने विस्फोटक उद्योग की मांग तेजी से बढ़ा दी। सोलर इंडस्ट्रीज ने इसी मौके को भुनाया।
कंपनी ने सिर्फ विस्फोटक बेचने तक खुद को सीमित नहीं रखा बल्कि माइनिंग सॉल्यूशंस, ड्रिलिंग सपोर्ट, डिफेंस एम्युनिशन, रॉकेट और सैन्य उपकरण, औद्योगिक विस्फोटक, एक्सपोर्ट बिजनेस जैसे कई क्षेत्रों में विस्तार किया। आज कंपनी का कारोबार भारत के साथ-साथ दुनिया के 50 से ज्यादा देशों तक फैला हुआ है।
डिफेंस सेक्टर में भी बड़ी ताकत बन रही कंपनी
पिछले कुछ वर्षों में भारत सरकार ने रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ और घरेलू उत्पादन पर जोर बढ़ाया है। इसका फायदा सोलर इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों को मिला है।
कंपनी अब सिर्फ माइनिंग विस्फोटक नहीं बल्कि रक्षा उपकरण और गोला-बारूद निर्माण में भी तेजी से विस्तार कर रही है। रक्षा क्षेत्र में बढ़ते ऑर्डर कंपनी के लिए भविष्य का बड़ा ग्रोथ इंजन माने जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट तेजी से बढ़ सकता है और सोलर इंडस्ट्रीज इस सेक्टर की बड़ी निजी कंपनियों में शामिल हो सकती है।
25 मैन्युफैक्चरिंग प्लांट, 50 देशों में कारोबार
आज Solar Industries India:
- भारत में औद्योगिक विस्फोटकों की सबसे बड़ी निर्माता कंपनियों में शामिल है
- सालाना करीब 3 लाख टन उत्पादन क्षमता रखती है
- देशभर में 25 मैन्युफैक्चरिंग साइट्स संचालित करती है
- 50 से अधिक देशों को निर्यात करती है
कंपनी की कमाई का बड़ा हिस्सा एक्सपोर्ट और डिफेंस ऑर्डर्स से आता है।
शेयर बाजार में भी धमाकेदार प्रदर्शन
सोलर इंडस्ट्रीज के शेयरों ने पिछले कुछ वर्षों में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। डिफेंस और एक्सपोर्ट सेक्टर में मजबूत ग्रोथ की वजह से कंपनी का मार्केट कैप तेजी से बढ़ा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च बढ़ना, कोयला उत्पादन में विस्तार, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग पर सरकार का फोकस, निर्यात ऑर्डर जैसे फैक्टर कंपनी के बिजनेस को आगे भी मजबूत कर सकते हैं।
संघर्ष से सफलता तक की बड़ी सीख
सत्यनारायण नुवाल की कहानी इस बात का उदाहरण है कि बिजनेस में शुरुआती असफलता अंत नहीं होती। स्याही बेचने से शुरुआत करने वाला एक युवा आज हजारों करोड़ रुपये की कंपनी का मालिक है।
उनकी सफलता यह भी दिखाती है कि सही समय पर सही सेक्टर पहचानना किसी भी कारोबारी के लिए कितना महत्वपूर्ण होता है। भारत में माइनिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और डिफेंस सेक्टर के विस्तार ने जिस उद्योग को नई ऊंचाई दी, उसी मौके को पहचानकर उन्होंने अपना साम्राज्य खड़ा किया।
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