देश में पेट्रोल की कीमतें एक बार फिर चर्चा में हैं। 18 मई 2026 को मुंबई में पेट्रोल का दाम ₹106.68 प्रति लीटर पर स्थिर बना हुआ है। हालांकि पिछले 10 दिनों में पेट्रोल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है और कई शहरों में रेट्स ₹103 से ₹110 प्रति लीटर के बीच रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की कमजोरी और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स के कारण भारत में पेट्रोल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चा तेल आयातक देशों में शामिल है। देश अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। यही वजह है कि ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़ते ही भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होने लगता है। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स भी पेट्रोल की कीमतों को सीधे प्रभावित करते हैं।
मुंबई में पेट्रोल की कीमत स्थिर, लेकिन कई शहरों में बदलाव
मुंबई में आज पेट्रोल ₹106.68 प्रति लीटर बिक रहा है। बीते दिन के मुकाबले इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। लेकिन देश के कई शहरों में मामूली बढ़ोतरी और गिरावट दर्ज की गई है। खासतौर पर भुवनेश्वर, लखनऊ और हैदराबाद में कीमतों में हल्की तेजी देखी गई, जबकि कोलकाता, जयपुर और पटना में मामूली गिरावट आई।
देश के प्रमुख शहरों में आज पेट्रोल के दाम
| शहर | पेट्रोल कीमत (₹/लीटर) | बदलाव |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | ₹97.77 | 0.00 |
| मुंबई | ₹106.68 | 0.00 |
| कोलकाता | ₹108.70 | -0.04 |
| चेन्नई | ₹103.67 | 0.00 |
| गुरुग्राम | ₹98.47 | +0.05 |
| नोएडा | ₹97.76 | -0.21 |
| बेंगलुरु | ₹106.17 | 0.00 |
| भुवनेश्वर | ₹104.57 | +0.41 |
| चंडीगढ़ | ₹97.27 | 0.00 |
| हैदराबाद | ₹110.89 | +0.04 |
| जयपुर | ₹107.61 | -0.14 |
| लखनऊ | ₹97.72 | +0.33 |
| पटना | ₹108.92 | -0.14 |
| तिरुवनंतपुरम | ₹110.61 | -0.07 |
भारत में पेट्रोल इतना महंगा क्यों है?
भारत में पेट्रोल की कीमत सिर्फ कच्चे तेल की कीमत से तय नहीं होती। इसमें कई तरह के टैक्स और लागत जुड़ती हैं। पेट्रोल की फाइनल कीमत में शामिल होते हैं:
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत
- रुपये और डॉलर का एक्सचेंज रेट
- केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी
- राज्य सरकार का वैट (VAT)
- डीलर कमीशन
- ट्रांसपोर्ट और रिफाइनिंग कॉस्ट
विशेषज्ञों का कहना है कि कई राज्यों में वैट ज्यादा होने के कारण पेट्रोल ₹110 प्रति लीटर तक पहुंच जाता है। यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल की कीमतों में बड़ा अंतर दिखाई देता है।
कच्चे तेल और रुपये की चाल का असर
हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सप्लाई संबंधी चिंताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेजी देखी गई है। इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आने से तेल आयात और महंगा हो गया है।
अगर कच्चा तेल लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है। इससे महंगाई भी बढ़ सकती है क्योंकि परिवहन लागत बढ़ने का असर सब्जियों, दूध, राशन और रोजमर्रा की दूसरी चीजों पर भी पड़ता है।
पड़ोसी देशों के मुकाबले भारत में पेट्रोल महंगा
भारत में पेट्रोल की कीमतें कई पड़ोसी देशों के मुकाबले ज्यादा हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह ऊंचा टैक्स स्ट्रक्चर माना जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर केंद्र और राज्य सरकारें टैक्स में कटौती करें तो उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि सरकार के लिए पेट्रोल और डीजल टैक्स राजस्व का बड़ा स्रोत भी हैं।
आम लोगों पर क्या असर पड़ रहा है?
पेट्रोल की ऊंची कीमतों का सीधा असर मध्यम वर्ग और रोजाना वाहन इस्तेमाल करने वाले लोगों पर पड़ता है। खासकर:
- ऑफिस आने-जाने का खर्च बढ़ता है
- कैब और ऑटो किराया महंगा होता है
- ट्रांसपोर्ट कॉस्ट बढ़ने से सामान महंगा होता है
- छोटे कारोबारियों की लागत बढ़ती है
इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग के पीछे पेट्रोल की लगातार ऊंची कीमतें भी एक बड़ा कारण मानी जा रही हैं।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं तो भारत में पेट्रोल के दाम फिलहाल सीमित दायरे में रह सकते हैं। लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने या रुपये में और कमजोरी आने की स्थिति में तेल कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं।
सरकार पर भी दबाव बढ़ रहा है कि वह टैक्स में राहत देकर आम लोगों को कुछ राहत दे।
स्रोत: Goodreturns, तेल विपणन कंपनियों के दैनिक मूल्य अपडेट
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