रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री एक बार फिर अपनी प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में हैं। फेम इंडिया मैगजीन और एशिया पोस्ट द्वारा जारी ‘श्रेष्ठ जिलाधिकारी-2026’ सर्वेक्षण में उन्हें देश के सबसे प्रभावशाली और चर्चित जिलाधिकारियों की सूची में शामिल किया गया है। इस सूची में देशभर के लगभग 100 जिलाधिकारियों को जगह दी गई है, जबकि चयन प्रक्रिया में करीब 800 जिलों के प्रशासनिक कार्यों का अध्ययन किया गया।
यह उपलब्धि सिर्फ व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि झारखंड और खासकर रांची प्रशासन के लिए भी बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। पिछले कुछ समय में रांची प्रशासन की सक्रियता, त्वरित फैसले और जनहित से जुड़े मामलों में तेज कार्रवाई ने मंजूनाथ भजन्त्री को अलग पहचान दिलाई है।
कई मानकों पर हुआ अधिकारियों का मूल्यांकन
फेम इंडिया और एशिया पोस्ट की ओर से जारी सर्वेक्षण में अधिकारियों का चयन कई अहम बिंदुओं के आधार पर किया गया। इनमें सुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही, प्रशासनिक नवाचार, संकट प्रबंधन, जनसंवाद और विकास कार्यों की रफ्तार जैसे पहलुओं को प्रमुखता दी गई।
सर्वेक्षण टीम ने अधिकारियों के कामकाज का आकलन सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर नहीं किया, बल्कि ग्राउंड रिपोर्ट, मीडिया विश्लेषण, जनभागीदारी और स्थानीय स्तर पर प्रशासन की प्रभावशीलता को भी शामिल किया गया। यही कारण है कि इस सूची में शामिल अधिकारियों को प्रशासनिक रूप से प्रभावशाली माना जा रहा है।
जनसरोकार वाले फैसलों ने दिलाई अलग पहचान
रांची के डीसी मंजूनाथ भजन्त्री को विशेष रूप से आम लोगों से जुड़े मामलों में संवेदनशील प्रशासनिक दृष्टिकोण के लिए सराहा गया। हाल के महीनों में कई ऐसे मामले सामने आए, जिनमें प्रशासन ने तेजी से कार्रवाई कर लोगों को राहत पहुंचाई।
85 वर्षीय बुजुर्ग को 24 घंटे के भीतर आयुष्मान कार्ड और पेंशन योजना का लाभ दिलाने की पहल काफी चर्चा में रही। इस घटना को प्रशासन की मानवीय संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय क्षमता का उदाहरण माना गया।
इसके अलावा जनता अदालत के माध्यम से लोगों की शिकायतों का सीधे समाधान करने और सरकारी स्कूलों में मनमानी पर नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों ने भी प्रशासन की कार्यशैली को चर्चा में रखा।
रांची प्रशासन की सक्रियता बनी चर्चा का विषय
पिछले कुछ समय में रांची जिला प्रशासन लगातार सक्रिय नजर आया है। चाहे योजनाओं के क्रियान्वयन की बात हो या आम लोगों से संवाद की, प्रशासन ने कई स्तरों पर तेज काम करने की कोशिश की है।
सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने, विभागीय समन्वय बढ़ाने और शिकायत निवारण प्रक्रिया को तेज करने जैसे कदमों को प्रशासनिक हलकों में सकारात्मक माना गया। यही वजह रही कि राष्ट्रीय स्तर पर जारी इस सर्वेक्षण में रांची के डीसी को प्रमुखता से स्थान मिला।
झारखंड के लिए क्यों खास है यह उपलब्धि?
झारखंड अक्सर विकास और प्रशासनिक चुनौतियों को लेकर राष्ट्रीय बहस में रहता है। ऐसे में राज्य के किसी अधिकारी का देश के प्रभावशाली जिलाधिकारियों की सूची में शामिल होना प्रशासनिक छवि के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सम्मान से न सिर्फ अधिकारियों का मनोबल बढ़ता है, बल्कि जिलास्तर पर बेहतर प्रशासनिक प्रतिस्पर्धा भी देखने को मिलती है। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति भरोसा मजबूत होता है।
प्रशासनिक नेतृत्व की नई पहचान
मंजूनाथ भजन्त्री की कार्यशैली को लेकर कहा जाता है कि वे फील्ड विजिट, जनसुनवाई और त्वरित फैसलों को प्राथमिकता देते हैं। प्रशासनिक मामलों में सीधे मॉनिटरिंग और योजनाओं की जमीनी समीक्षा को उनकी कार्यप्रणाली का अहम हिस्सा माना जाता है।
रांची में हाल के दिनों में कई अभियानों और योजनाओं को तेजी से लागू करने के पीछे उनकी सक्रिय भूमिका की चर्चा होती रही है। यही वजह है कि उन्हें सिर्फ एक प्रशासक नहीं, बल्कि “जनभागीदारी आधारित प्रशासन” के मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
क्या है ‘श्रेष्ठ जिलाधिकारी-2026’ सर्वे?
फेम इंडिया और एशिया पोस्ट द्वारा हर साल देशभर के जिलाधिकारियों के प्रदर्शन का अध्ययन कर यह सूची जारी की जाती है। इसका उद्देश्य ऐसे अधिकारियों को पहचान देना होता है, जिन्होंने प्रशासनिक स्तर पर प्रभावशाली काम किया हो और आम जनता के बीच सकारात्मक छवि बनाई हो।
इस सर्वेक्षण में शामिल अधिकारियों का मूल्यांकन कई चरणों में किया जाता है। इसमें विकास कार्य, संकट प्रबंधन, कानून व्यवस्था, डिजिटल प्रशासन, जनसंवाद और सामाजिक प्रभाव जैसे मानकों को शामिल किया जाता है।
निष्कर्ष
रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री का देश के प्रभावशाली जिलाधिकारियों की सूची में शामिल होना प्रशासनिक कार्यशैली और जनहित आधारित फैसलों की बड़ी पहचान माना जा रहा है। यह उपलब्धि बताती है कि तेज फैसले, संवेदनशील प्रशासन और जमीनी स्तर पर सक्रियता आज भी किसी अधिकारी को राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान दिला सकती है।
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