Highlights
- खेत तालाब निर्माण पर सरकार दे रही 50% तक सब्सिडी
- सिंचाई, जल संरक्षण और भूजल स्तर सुधारने में मिलेगी मदद
- मत्स्य पालन, सिंघाड़ा और मोती उत्पादन से बढ़ेगी अतिरिक्त आय
- डिजिटल प्रक्रिया से खत्म हुआ सिफारिश और भ्रष्टाचार का खेल
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगातार गिरते भूजल स्तर, अनियमित बारिश और खेती की बढ़ती लागत के बीच राज्य सरकार की ‘खेत तालाब योजना’ किसानों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत चलाई जा रही यह स्कीम अब सिर्फ जल संरक्षण तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक नया मॉडल बनती दिखाई दे रही है।
प्रदेश सरकार का फोकस अब किसानों को केवल पारंपरिक खेती तक सीमित रखने के बजाय उन्हें मल्टीपल इनकम मॉडल की ओर ले जाना है। यही वजह है कि खेत तालाब योजना को सिंचाई, जल संरक्षण, मत्स्य पालन और आधुनिक खेती से जोड़कर लागू किया जा रहा है। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस योजना से हजारों किसानों की आय में बढ़ोतरी देखने को मिली है।
क्यों जरूरी हो गई खेत तालाब योजना?
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पिछले कुछ वर्षों में भूजल स्तर तेजी से नीचे गया है। गर्मियों में ट्यूबवेल और हैंडपंप सूखने की समस्या आम होती जा रही है। वहीं बारिश का पैटर्न भी लगातार बदल रहा है। ऐसे में खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर होती जा रही थी।
सरकार का मानना है कि अगर बारिश के पानी को खेतों में ही रोका जाए तो किसान सालभर सिंचाई के लिए आत्मनिर्भर बन सकते हैं। इसी सोच के साथ खेत तालाब योजना को बड़े स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है।
खेत में बनने वाला तालाब वर्षा जल को स्टोर करता है। बाद में किसान इसी पानी का उपयोग धान, गेहूं, सब्जी और बागवानी जैसी फसलों की सिंचाई में कर सकते हैं। इससे डीजल पंप और भूजल पर निर्भरता कम होती है।
सरकार दे रही आधी लागत
योजना के तहत सरकार किसानों को भारी सब्सिडी उपलब्ध करा रही है। कृषि विभाग के मुताबिक मानक आकार 22 मीटर × 20 मीटर × 3 मीटर वाले तालाब की कुल लागत लगभग ₹1,05,000 तय की गई है। इसमें राज्य सरकार 50 प्रतिशत यानी ₹52,500 तक का अनुदान देती है। यह राशि सीधे किसान के बैंक खाते में DBT के जरिए ट्रांसफर की जाती है।
सरकार का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को भी इस योजना से जोड़ना है ताकि कम जमीन वाले किसान भी जल संरक्षण और अतिरिक्त आय का लाभ उठा सकें।
सिर्फ तालाब नहीं, कमाई का नया मॉडल
खेत तालाब योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह किसानों को सिर्फ सिंचाई सुविधा नहीं देती, बल्कि अतिरिक्त कमाई के नए रास्ते भी खोलती है। किसान तालाब का उपयोग इन गतिविधियों में कर सकते हैं मत्स्य पालन, सिंघाड़े की खेती, मोती उत्पादन, बतख पालन, सब्जियों की सिंचाई, ड्रिप और स्प्रिंकलर आधारित खेती
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसान तालाब को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ें तो सालाना लाखों रुपये तक की अतिरिक्त आय संभव है।
आधुनिक सिंचाई पर भी मिल रही भारी छूट
राज्य सरकार सिर्फ तालाब निर्माण तक सीमित नहीं है। किसानों को आधुनिक सिंचाई अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। योजना के तहत स्प्रिंकलर सेट पर 80% से 90% तक सब्सिडी, पंपसेट पर 50% या अधिकतम ₹15,000 तक की सहायता दी जा रही है।
इससे पानी की बचत के साथ-साथ खेती की लागत भी कम हो रही है। खासकर सब्जी और बागवानी करने वाले किसानों को इसका बड़ा फायदा मिल रहा है।
डिजिटल प्रक्रिया से खत्म हुआ भ्रष्टाचार
पहले सरकारी योजनाओं में आवेदन के लिए किसानों को कई दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। लेकिन अब योगी सरकार ने खेत तालाब योजना को पूरी तरह डिजिटल बना दिया है।
कृषि विभाग के Agri Darshan पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन और बुकिंग की सुविधा दी गई है। किसानों का चयन “First Come, First Served” आधार पर किया जाता है। इस डिजिटल व्यवस्था से सिफारिश खत्म हुई, बिचौलियों की भूमिका कम हुई, प्रक्रिया पारदर्शी बनी, किसानों का समय बचा.
अधिकारी ने क्या कहा?
कानपुर नगर के भूमि संरक्षण अधिकारी आर.पी. कुशवाहा ने योजना को किसानों के लिए बेहद उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ जल संरक्षण योजना नहीं बल्कि खेती को बिजनेस मॉडल में बदलने की पहल है।
उनके अनुसार, खेत तालाब योजना से किसान मौसम की अनिश्चितता से लड़ने में सक्षम हो रहे हैं और सिंचाई के स्थायी समाधान के जरिए उत्पादन बढ़ा रहे हैं।
आवेदन के लिए जरूरी नियम
कौन कर सकता है आवेदन?
- उत्तर प्रदेश का किसान होना जरूरी
- फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य
- कृषि योग्य भूमि होनी चाहिए
टोकन मनी
ऑनलाइन आवेदन के समय ₹1000 की टोकन राशि जमा करनी होगी। बाद में यह राशि वापस कर दी जाएगी।
सब्सिडी कैसे मिलेगी?
सरकार दो चरणों में अनुदान जारी करेगी तालाब की खुदाई पूरी होने पर पहली किस्त, इनलेट और डिस्प्ले बोर्ड लगने के बाद दूसरी किस्त
कितना समय मिलेगा?
आवेदन के 15 दिन के भीतर वेरिफिकेशन, मंजूरी मिलने के 30 दिन के भीतर तालाब तैयार करना होगा
खेती के बदलते मॉडल में अहम भूमिका
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में जल संरक्षण आधारित खेती ही टिकाऊ कृषि का आधार बनेगी। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े कृषि राज्य में खेत तालाब योजना किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। अगर यह योजना बड़े स्तर पर सफल होती है, तो इससे भूजल संकट कम होगा, सिंचाई लागत घटेगी, ग्रामीण रोजगार बढ़ेगा, किसानों की आय में स्थायी सुधार होगा
सरकार की कोशिश है कि आने वाले वर्षों में ज्यादा से ज्यादा किसान इस योजना से जुड़ें और खेती को सिर्फ परंपरागत पेशा नहीं बल्कि लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सके।
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