मुंबई का वर्ली इलाका एक बार फिर देश की सबसे चर्चित रियल एस्टेट डील्स में शामिल हो गया है। Godrej Industries समूह से जुड़ी तान्या दुबाश ने वर्ली सी-फेस स्थित अल्ट्रा-लक्जरी प्रोजेक्ट ‘नमन जाना’ में दो समुद्र-किनारे वाले लग्जरी अपार्टमेंट्स खरीदकर देश के हाई-एंड रियल एस्टेट बाजार में नई चर्चा छेड़ दी है।
मीडिया रिपोर्ट्स और प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट्स के अनुसार, इस डील की कुल वैल्यू ₹294 करोड़ से अधिक बताई जा रही है। प्रति वर्ग फुट कीमत के हिसाब से यह भारत की सबसे महंगी रेसिडेंशियल डील्स में से एक मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि इन अपार्टमेंट्स की कीमत 2.5 लाख रुपये प्रति वर्ग फुट से भी ज्यादा बैठती है, जो मुंबई के प्रीमियम रियल एस्टेट मार्केट की तेजी को दिखाती है।
कौन हैं तान्या दुबाश?
तान्या दुबाश, उद्योगपति Adi Godrej की बड़ी बेटी हैं और गोदरेज समूह की कई प्रमुख कंपनियों के बोर्ड में अहम जिम्मेदारी निभाती हैं। वह Godrej Consumer Products और Godrej Agrovet जैसी कंपनियों से जुड़ी हुई हैं।
कॉर्पोरेट जगत में उनकी पहचान सिर्फ कारोबारी विरासत तक सीमित नहीं है, बल्कि ब्रांड बिल्डिंग और बिजनेस स्ट्रैटेजी में भी उनकी मजबूत भूमिका मानी जाती है। अब यह नई प्रॉपर्टी डील उनके परिवार की मुंबई के अल्ट्रा-लक्जरी रियल एस्टेट बाजार में बढ़ती मौजूदगी को और मजबूत करती है।
कितने बड़े हैं दोनों अपार्टमेंट?
डील से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, दोनों अपार्टमेंट्स वर्ली के प्रीमियम टावर ‘नमन जाना’ की 19वीं और 20वीं मंजिल पर स्थित हैं। प्रत्येक अपार्टमेंट का कारपेट एरिया लगभग 5,812 वर्ग फुट बताया गया है। इसके अलावा करीब 645 वर्ग फुट की बड़ी समुद्र-दृश्य वाली बालकनी भी शामिल है।
अगर सिर्फ कारपेट एरिया की बात करें, तो दोनों फ्लैट्स का कुल क्षेत्रफल 11,500 वर्ग फुट से ज्यादा बैठता है। इसके साथ 8 कार पार्किंग स्लॉट्स भी दिए गए हैं, जो मुंबई जैसे शहर में खुद एक बड़ी लक्जरी मानी जाती है।
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि मुंबई के प्राइम लोकेशंस में बड़े साइज वाले समुद्र-दृश्य अपार्टमेंट्स की सप्लाई बेहद सीमित है। यही वजह है कि ऐसे प्रोजेक्ट्स में कीमतें लगातार नए रिकॉर्ड बना रही हैं।
किससे खरीदे गए फ्लैट?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 19वीं मंजिल पर मौजूद अपार्टमेंट को ‘श्री नमन रेजिडेंसी’ से खरीदा गया है, जो इस प्रोजेक्ट का डेवलपर है। वहीं 20वीं मंजिल पर स्थित दूसरे अपार्टमेंट का सौदा ‘शौला रियल एस्टेट्स’ और ‘कार्प एस्टेट’ के जरिए हुआ है, जिसका संबंध गोदरेज समूह से जुड़ी संस्थाओं से बताया जा रहा है।
इस तरह यह डील सिर्फ एक हाई-वैल्यू प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट और फैमिली-होल्डिंग स्ट्रक्चर के लिहाज से भी चर्चा में है।
पहले भी इसी टावर में खरीद चुके हैं प्रॉपर्टी
दिलचस्प बात यह है कि यह पहली बार नहीं है जब गोदरेज परिवार ने इस प्रोजेक्ट में निवेश किया हो। पिछले वर्ष भी तान्या दुबाश से जुड़ी एक इकाई ने इसी टावर की 30वीं और 31वीं मंजिल पर मौजूद एक डुप्लेक्स अपार्टमेंट करीब ₹225.76 करोड़ में खरीदा था।
उस डुप्लेक्स का कारपेट एरिया 9,214 वर्ग फुट और बालकनी 1,227 वर्ग फुट की बताई गई थी। इससे साफ है कि वर्ली का यह प्रोजेक्ट देश के सुपर-रिच परिवारों के लिए पसंदीदा एड्रेस बन चुका है।
लीना गांधी तिवारी ने भी बनाई थी सुर्खियां
इस टावर में इससे पहले भी कई रिकॉर्ड डील्स हो चुकी हैं। फार्मास्यूटिकल उद्योग से जुड़ी अरबपति कारोबारी Leena Gandhi Tewari ने इसी प्रोजेक्ट में दो डुप्लेक्स अपार्टमेंट लगभग ₹639 करोड़ में खरीदे थे।
बताया गया कि उनकी डील करीब 2.83 लाख रुपये प्रति वर्ग फुट के हिसाब से हुई थी, जिसने भारतीय रियल एस्टेट बाजार में नया रिकॉर्ड बनाया था। इससे यह साफ हो गया कि मुंबई का अल्ट्रा-लक्जरी हाउसिंग सेगमेंट अब वैश्विक स्तर के प्राइस बेंचमार्क की ओर बढ़ रहा है।
क्यों बन रहा है वर्ली ‘Billionaires’ Row’?
पिछले कुछ वर्षों में Mumbai के वर्ली इलाके ने हाई-एंड रियल एस्टेट मार्केट में जबरदस्त तेजी देखी है। इसकी सबसे बड़ी वजह मुंबई कोस्टल रोड जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और समुद्र के सामने बड़े घरों की बढ़ती मांग मानी जा रही है।
रियल एस्टेट सलाहकारों के अनुसार, दक्षिण और मध्य मुंबई में नई जमीन की उपलब्धता बेहद सीमित है। ऐसे में जो भी प्रीमियम प्रोजेक्ट समुद्र-दृश्य और बड़े फ्लोर प्लेट्स ऑफर करते हैं, उनमें अरबपति परिवारों और कॉर्पोरेट दिग्गजों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है।
आज वर्ली का यह इलाका “Billionaires’ Row” के रूप में उभर चुका है, जहां उद्योगपति, बैंकिंग सेक्टर के बड़े नाम, फार्मा प्रमोटर और कॉर्पोरेट घरानों के सदस्य लगातार निवेश कर रहे हैं।
भारत के लक्जरी रियल एस्टेट बाजार के लिए क्या संकेत?
यह डील सिर्फ एक आलीशान घर की खरीद तक सीमित नहीं है। यह भारत के अल्ट्रा-लक्जरी रियल एस्टेट बाजार की बदलती तस्वीर को भी दिखाती है। पिछले कुछ वर्षों में देश में हाई-नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) और अल्ट्रा-HNIs की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसका सीधा असर मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहरों के प्रीमियम हाउसिंग मार्केट पर दिख रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में समुद्र-दृश्य, प्राइवेट एलिवेटर, बड़े फ्लोर एरिया और हाई-सिक्योरिटी वाले प्रोजेक्ट्स की मांग और बढ़ सकती है। यही वजह है कि भारत का लक्जरी रियल एस्टेट सेगमेंट अब सिर्फ रहने की जरूरत नहीं, बल्कि स्टेटस और लॉन्ग-टर्म एसेट के रूप में देखा जा रहा है।
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