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Reading: Electricity Bill: पंखा-AC बंद रहे या घर पर ताला लगा हो, फिर भी देना पड़ सकता है ज्यादा बिजली बिल! सरकार बढ़ा सकती है फिक्स चार्ज
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Electricity Bill: पंखा-AC बंद रहे या घर पर ताला लगा हो, फिर भी देना पड़ सकता है ज्यादा बिजली बिल! सरकार बढ़ा सकती है फिक्स चार्ज

Namam Sharma
Last updated: 2026/06/27 at 10:54 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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8 Min Read
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Highlights

  • बिजली बिल में बढ़ सकता है फिक्स मंथली चार्ज
  • कम बिजली इस्तेमाल करने वालों पर भी पड़ेगा असर
  • रूफटॉप सोलर लगाने वालों के लिए अलग टैरिफ की तैयारी
  • डिस्कॉम कंपनियों के घाटे की भरपाई के लिए आया प्रस्ताव

नई दिल्ली: पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और एलपीजी की बढ़ती कीमतों के बाद अब आम जनता को बिजली बिल के मोर्चे पर भी बड़ा झटका लग सकता है। आने वाले समय में आपके बिजली बिल का एक ऐसा हिस्सा बढ़ सकता है, जिसे आपको हर हाल में चुकाना होगा, चाहे आपने महीने भर बिजली का इस्तेमाल किया हो या नहीं। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने बिजली कंपनियों के लिए फिक्स मंथली चार्ज बढ़ाने का बड़ा प्रस्ताव तैयार किया है।

Contents
Highlightsआखिर क्या होता है फिक्स चार्ज?क्यों बढ़ाना चाहती हैं बिजली कंपनियां?कितना बढ़ सकता है बिजली बिल?कैसे चलता है बिजली कंपनियों का पूरा सिस्टम?सोलर लगाने वालों पर भी बढ़ सकता है बोझआम आदमी पर क्या होगा असर?क्या सभी राज्यों में तुरंत लागू होगा नियम?बिजली सेक्टर में क्यों बढ़ रही है चिंता?आगे क्या हो सकता है?

अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो घर में पंखा-एसी बंद रहने या परिवार के बाहर जाने के बावजूद भी उपभोक्ताओं को हर महीने ज्यादा बिजली बिल देना पड़ सकता है। इसका असर खासकर मध्यम वर्ग, किराएदारों, छोटे परिवारों और कम बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं पर ज्यादा दिखाई दे सकता है।


आखिर क्या होता है फिक्स चार्ज?

बिजली बिल आमतौर पर दो हिस्सों में बंटा होता है। पहला हिस्सा वह होता है जो आपकी बिजली खपत यानी यूनिट के हिसाब से तय होता है। दूसरा हिस्सा फिक्स चार्ज कहलाता है, जिसे हर महीने अनिवार्य रूप से देना पड़ता है।

फिक्स चार्ज का संबंध आपके बिजली उपयोग से नहीं बल्कि बिजली कंपनियों की स्थायी लागत से होता है। इसमें बिजली नेटवर्क का रखरखाव, ट्रांसमिशन लाइन, कर्मचारियों की सैलरी, ग्रिड संचालन और बिजली उत्पादन कंपनियों को भुगतान जैसी लागत शामिल होती है। अभी तक ज्यादातर राज्यों में फिक्स चार्ज अपेक्षाकृत कम रखा गया है, लेकिन अब इसे धीरे-धीरे बढ़ाने की तैयारी हो रही है।


क्यों बढ़ाना चाहती हैं बिजली कंपनियां?

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में तेजी से बढ़ रहे रूफटॉप सोलर सिस्टम बिजली कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में अमीर परिवारों, हाउसिंग सोसायटी, फैक्ट्रियों और बड़े संस्थानों ने अपनी छतों पर सोलर पैनल लगाना शुरू किया है। इससे वे सरकारी बिजली कंपनियों से कम बिजली खरीद रहे हैं।

हालांकि, जरूरत पड़ने पर ये उपभोक्ता सरकारी ग्रिड और ट्रांसमिशन नेटवर्क का इस्तेमाल जारी रखते हैं। ऐसे में डिस्कॉम कंपनियों का कहना है कि उनकी स्थायी लागत लगातार बनी रहती है लेकिन बिजली बिक्री से कमाई घट रही है।

यही वजह है कि अब फिक्स चार्ज बढ़ाकर घाटे की भरपाई करने की तैयारी की जा रही है।


कितना बढ़ सकता है बिजली बिल?

CEA के प्रस्ताव के अनुसार घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं के लिए फिक्स चार्ज को कुल बिजली लागत के लगभग 25 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। वहीं फैक्ट्रियों, मॉल, बड़े कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और उद्योगों के लिए यह हिस्सा साल 2030 तक 100 प्रतिशत तक ले जाने की सिफारिश की गई है।

अगर ऐसा होता है तो कम बिजली खर्च करने वालों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। उदाहरण के तौर पर अगर कोई परिवार महीने में बहुत कम यूनिट खर्च करता है, तब भी उसे हर महीने भारी फिक्स चार्ज देना पड़ सकता है। इसका असर उन लोगों पर भी होगा:

  • जो लंबे समय तक घर से बाहर रहते हैं
  • जिनके घर खाली पड़े रहते हैं
  • छोटे परिवार
  • किराएदार
  • ग्रामीण उपभोक्ता
  • कम आय वाले परिवार

कैसे चलता है बिजली कंपनियों का पूरा सिस्टम?

CEA ने अपने प्रस्ताव में बताया है कि बिजली कंपनियों की कुल लागत का 38% से 56% हिस्सा फिक्स कॉस्ट होता है। इसमें शामिल हैं ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर, बिजली लाइनों का रखरखाव, कर्मचारियों का वेतन, ग्रिड संचालन, बिजली उत्पादकों को क्षमता भुगतान, लेकिन कंपनियों को फिक्स चार्ज से कुल राजस्व का केवल 9% से 20% हिस्सा ही मिल पाता है। बाकी रकम की भरपाई प्रति यूनिट बिजली दर बढ़ाकर की जाती है।

यही कारण है कि डिस्कॉम कंपनियां अब टैरिफ ढांचे में बड़ा बदलाव चाहती हैं।


सोलर लगाने वालों पर भी बढ़ सकता है बोझ

सरकार और बिजली कंपनियां अब रूफटॉप सोलर उपभोक्ताओं के लिए अलग टैरिफ मॉडल पर भी विचार कर रही हैं। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि नेट-मीटरिंग सिस्टम का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं से अलग तरह का शुल्क लिया जाए।

अभी सोलर सिस्टम लगाने वाले लोग दिन में अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेच देते हैं और जरूरत पड़ने पर ग्रिड से बिजली लेते हैं। बिजली कंपनियों का तर्क है कि इससे ग्रिड पर दबाव तो बना रहता है लेकिन कंपनियों की आमदनी कम हो जाती है। अगर अलग टैरिफ लागू होता है, तो भविष्य में सोलर सिस्टम लगाने वालों को भी अतिरिक्त फिक्स चार्ज देना पड़ सकता है।


आम आदमी पर क्या होगा असर?

बिजली बिल में फिक्स चार्ज बढ़ने का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ेगा। पहले ही पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, एलपीजी और खाद्य महंगाई से जूझ रहे मध्यम वर्ग के लिए यह एक नया वित्तीय दबाव बन सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर फिक्स चार्ज ज्यादा बढ़ा दिए गए, तो ऊर्जा बचत करने वाले उपभोक्ताओं को भी राहत नहीं मिलेगी। यानी बिजली बचाने का फायदा कम हो जाएगा, कम खपत के बावजूद बिल ज्यादा आएगा, किराए के मकानों का मासिक खर्च बढ़ सकता है, छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा.


क्या सभी राज्यों में तुरंत लागू होगा नियम?

फिलहाल यह केवल एक प्रस्ताव है जिसे फोरम ऑफ रेगुलेटर्स के सामने रखा जाना है। इसके बाद राज्य बिजली नियामक आयोग अपने-अपने राज्यों में इस पर फैसला लेंगे।

इसलिए यह जरूरी नहीं कि सभी राज्यों में एक साथ फिक्स चार्ज बढ़ा दिए जाएं। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में बिजली टैरिफ संरचना में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।


बिजली सेक्टर में क्यों बढ़ रही है चिंता?

भारत तेजी से ऊर्जा परिवर्तन की तरफ बढ़ रहा है। एक तरफ सरकार सोलर एनर्जी और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा दे रही है, दूसरी तरफ पारंपरिक डिस्कॉम मॉडल दबाव में आता जा रहा है।

बिजली कंपनियों का कहना है कि अगर फिक्स कॉस्ट की भरपाई नहीं हुई, तो भविष्य में बिजली वितरण व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है।

वहीं उपभोक्ता संगठनों का तर्क है कि बढ़ते फिक्स चार्ज ऊर्जा बचत की भावना को नुकसान पहुंचा सकते हैं और आम आदमी पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल सकते हैं।


आगे क्या हो सकता है?

विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में बिजली बिल का ढांचा पूरी तरह बदल सकता है। संभावित बदलाव ज्यादा फिक्स चार्ज, टाइम आधारित बिजली दरें, सोलर उपभोक्ताओं के लिए अलग टैरिफ, पीक आवर में महंगी बिजली, कम खपत पर भी न्यूनतम बिल ऐसे में आने वाले महीनों में बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर दबाव और बढ़ सकता है।

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By Namam Sharma Senior Editor – Newsjagran
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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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