भारत में स्टार्टअप्स की दुनिया तेजी से बदल रही है। अब सिर्फ टेक्नोलॉजी या फूड डिलीवरी ही नहीं, बल्कि कचरा प्रबंधन यानी वेस्ट मैनेजमेंट सेक्टर भी युवाओं के लिए बड़ा अवसर बनकर उभर रहा है। हैदराबाद के रहने वाले अभिषेक अग्रवाल ने इसी सेक्टर में ऐसा काम किया, जिसे शुरुआत में लोगों ने मजाक समझा। उन्हें ‘कचरेवाला’ कहकर ताने दिए गए। परिवार और समाज ने भी सवाल उठाए। लेकिन, अभिषेक ने हार नहीं मानी। आज उनका स्टार्टअप ‘Goodee Bag’ सालाना करीब 1 करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल कर चुका है।
यह सिर्फ एक बिजनेस की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस सोच की कहानी है जिसमें एक युवा ने समाज की बड़ी समस्या को अवसर में बदल दिया। खास बात यह है कि उनका मॉडल सिर्फ पैसा कमाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और लोगों की आदत बदलने का भी काम कर रहा है।
कॉलेज ड्रॉपआउट से उद्यमी बनने तक का सफर

अभिषेक अग्रवाल का जन्म हैदराबाद के एक मारवाड़ी कारोबारी परिवार में हुआ। परिवार का पारंपरिक बिजनेस था और उम्मीद थी कि वह भी उसी रास्ते पर आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में दाखिला लिया, लेकिन पढ़ाई के दौरान ही उन्हें महसूस होने लगा कि उनका मन पारंपरिक नौकरी या बंद कमरे वाले बिजनेस में नहीं लगता।
साल 2008 में उन्होंने बड़ा फैसला लेते हुए कॉलेज छोड़ दिया। यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि भारतीय समाज में कॉलेज ड्रॉपआउट को अक्सर असफल माना जाता है। हालांकि, अभिषेक ने जोखिम उठाने का फैसला किया।
कॉलेज छोड़ने के बाद उन्होंने टीवीएस की डीलरशिप संभाली और फिर 2011 में अपनी लॉिस्टिक्स कंपनी ‘राघव रोडलाइंस’ शुरू की। इस बिजनेस में उन्होंने काफी सफलता हासिल की। 75 ट्रकों का नेटवर्क तैयार किया और सालाना 3 से 4 करोड़ रुपये तक का कारोबार खड़ा कर दिया।
लेकिन, इस बिजनेस की अपनी चुनौतियां थीं। लगातार यात्रा, भारी जिम्मेदारी और पारिवारिक दबाव के चलते उन्होंने धीरे-धीरे महसूस किया कि यह मॉडल लंबे समय तक उनके लिए सही नहीं है। आखिरकार 2023 में उन्होंने इस सफल लॉजिस्टिक्स बिजनेस को बंद करने का फैसला किया।
लॉकडाउन के दौरान मिला नया आइडिया
कोरोना महामारी और लॉकडाउन के दौरान लोगों की जिंदगी में बड़ा बदलाव आया। क्विक कॉमर्स और ऑनलाइन डिलीवरी तेजी से बढ़ी। हर घर में पैकेजिंग बॉक्स, प्लास्टिक और सूखा कचरा बढ़ने लगा।
अभिषेक ने इस बदलाव को बहुत करीब से देखा। उन्होंने पाया कि कंपनियों और इंडस्ट्री के कचरे को संभालने के लिए तो बड़े सिस्टम मौजूद हैं, लेकिन घरों से निकलने वाले सूखे कचरे के लिए कोई मजबूत व्यवस्था नहीं है।
यहीं से उन्हें नए बिजनेस का आइडिया मिला।
उन्होंने सोचा कि अगर लोगों को कचरा अलग करने के बदले कोई इनाम दिया जाए, तो वे इस काम में रुचि दिखा सकते हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी सोसाइटी के करीब 200 घरों में एक छोटे स्तर पर प्रयोग शुरू किया।
शुरुआत में लोगों ने उड़ाया मजाक

जब अभिषेक ने वेस्ट मैनेजमेंट स्टार्टअप शुरू करने की बात कही तो कई लोगों ने उनका मजाक उड़ाया। समाज में उन्हें ‘कचरेवाला’ तक कहा गया। परिवार को भी समझ नहीं आ रहा था कि करोड़ों के लॉजिस्टिक्स बिजनेस के बाद कोई व्यक्ति कचरे का काम क्यों करेगा।
लेकिन, अभिषेक ने इन बातों पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने अपनी जमा-पूंजी से करीब 4 से 5 लाख रुपये निवेश किए। एक छोटा गोदाम किराए पर लिया और रिसाइक्लिंग इंडस्ट्री को गहराई से समझना शुरू किया।
यहीं से ‘Goodee Bag’ की असली शुरुआत हुई।
कैसे काम करता है Goodee Bag मॉडल?
अभिषेक ने सिर्फ कचरा इकट्ठा करने का काम नहीं किया, बल्कि उन्होंने इसे रिवॉर्ड सिस्टम के साथ जोड़ा। यही उनके मॉडल की सबसे बड़ी ताकत बनी।
कंपनी का ऐप यूजर्स को घर बैठे सूखा कचरा देने की सुविधा देता है। यूजर ऐप के जरिए पिकअप बुक करते हैं और कंपनी की टीम इलेक्ट्रिक ऑटो से घर पहुंचती है।
इसके बाद:
- कचरे का वजन किया जाता है
- यूजर को प्रति किलो 3 रुपये के हिसाब से पॉइंट्स मिलते हैं
- इन पॉइंट्स से राशन या ऑर्गेनिक उत्पाद खरीदे जा सकते हैं
- 200 पॉइंट्स से ज्यादा होने पर सीधे बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर किए जा सकते हैं
इस मॉडल ने लोगों की सोच बदल दी। अब कचरा फेंकने की बजाय लोग उसे अलग करके जमा करने लगे।
30 हजार घरों तक पहुंचा नेटवर्क

आज Goodee Bag हैदराबाद के 30 हजार से ज्यादा घरों से सूखा कचरा इकट्ठा कर रहा है। कंपनी रोजाना करीब 4 हजार किलो कचरा जुटा रही है।
इस स्टार्टअप ने अब तक:
- 1500 टन से ज्यादा कचरे को लैंडफिल में जाने से रोका
- हजारों किलो प्लास्टिक रिसाइक्लिंग के लिए भेजा
- करीब 7 हजार पेड़ों को बचाने में मदद की
कंपनी का नेटवर्क अब 7-8 रिसाइक्लिंग पार्टनर्स के साथ जुड़ चुका है।
महीने के लाखों की कमाई
शुरुआत में जिस काम को लोग छोटा समझ रहे थे, वही आज करोड़ों का बिजनेस बन चुका है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक:
- कंपनी हर महीने 7 से 8 लाख रुपये तक का राजस्व कमा रही है
- सालाना टर्नओवर करीब 1 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है
यह दिखाता है कि अगर आइडिया मजबूत हो और समस्या बड़ी हो, तो किसी भी सेक्टर में सफलता हासिल की जा सकती है।
भारत में तेजी से बढ़ रहा वेस्ट मैनेजमेंट सेक्टर

भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां हर दिन भारी मात्रा में कचरा निकलता है। शहरीकरण और ऑनलाइन शॉपिंग बढ़ने के साथ यह समस्या और बड़ी होती जा रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में हर साल करोड़ों टन ठोस कचरा निकलता है। इसमें प्लास्टिक और पैकेजिंग वेस्ट का हिस्सा तेजी से बढ़ रहा है।
ऐसे में वेस्ट मैनेजमेंट सेक्टर आने वाले वर्षों में बड़ा बिजनेस अवसर बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि रिसाइक्लिंग और सर्कुलर इकोनॉमी से जुड़े स्टार्टअप्स की मांग भविष्य में और बढ़ेगी।
अभिषेक की कहानी से क्या सीख मिलती है?
अभिषेक अग्रवाल की कहानी कई युवाओं के लिए प्रेरणा है। उन्होंने दिखाया कि:
- हर सफल बिजनेस की शुरुआत छोटी होती है
- समाज का मजाक सफलता का रास्ता नहीं रोक सकता
- बड़ी समस्या में बड़ा अवसर छिपा होता है
- पैसा सिर्फ ट्रेंड देखकर नहीं, जरूरत समझकर कमाया जाता है
उन्होंने यह भी साबित किया कि पर्यावरण संरक्षण और बिजनेस साथ-साथ चल सकते हैं।
आगे क्या है प्लान?
अभिषेक अब अपने मॉडल को दूसरे शहरों तक ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। उनका लक्ष्य सिर्फ हैदराबाद तक सीमित नहीं है। वह आने वाले समय में देश के बड़े महानगरों और छोटे शहरों में भी Goodee Bag का नेटवर्क बढ़ाना चाहते हैं।
अगर उनका मॉडल बड़े स्तर पर सफल होता है, तो यह भारत के शहरी कचरा प्रबंधन सिस्टम में बड़ा बदलाव ला सकता है।
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