वीकेंड पर बिरयानी, पिज्जा या बर्गर ऑर्डर करना अब पहले जितना सस्ता नहीं रहने वाला। देशभर के रेस्टोरेंट, कैफे और ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म अगले कुछ दिनों में खाने-पीने की कीमतों में 5% से 10% तक बढ़ोतरी की तैयारी कर रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें, एलपीजी सिलेंडर की महंगाई, दूध और अन्य कच्चे माल की लागत में तेजी और डिलीवरी खर्च का बढ़ना है।
फूड इंडस्ट्री से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो आने वाले महीनों में बाहर खाना खाना और ऑनलाइन ऑर्डर करना दोनों आम लोगों की जेब पर भारी पड़ सकता है। खासकर मिडिल क्लास परिवारों का मासिक फूड बजट तेजी से बढ़ने की आशंका है।
1 जुलाई से महंगा हो सकता है बाहर खाना
रेस्टोरेंट इंडस्ट्री आमतौर पर साल में एक बार कीमतों में बदलाव करती है, लेकिन इस बार हालात अलग हैं। इंडस्ट्री पर लागत का दबाव इतना ज्यादा बढ़ गया है कि कई बड़े ब्रांड तय समय से पहले ही रेट बढ़ाने की तैयारी में हैं।
Wow! Momo के को-फाउंडर और नेशनल रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के चेयरमैन सागर दरयानी के अनुसार, इंडस्ट्री के पास अब कीमतें बढ़ाने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं। उनका कहना है कि लगातार बढ़ती इनपुट कॉस्ट के कारण जुलाई से नई प्राइसिंग लागू करनी पड़ सकती है।
इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो हर वीकेंड ऑनलाइन फूड ऑर्डर करते हैं या परिवार के साथ बाहर खाना पसंद करते हैं।
आखिर क्यों बढ़ रहे हैं खाने के दाम?
फूड इंडस्ट्री पर इस समय कई तरफ से दबाव है। सबसे बड़ा असर ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का पड़ रहा है। पेट्रोल और डीजल महंगे होने से ट्रांसपोर्ट कॉस्ट बढ़ गई है। सब्जियां, दूध, मीट, मसाले, पैकेजिंग सामग्री और अन्य कच्चा माल रेस्टोरेंट तक पहुंचाने में अब पहले से ज्यादा खर्च आ रहा है।
इसके अलावा:
- कमर्शियल LPG सिलेंडर महंगे हो चुके हैं
- दूध की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है
- स्टाफ की सैलरी और रहने का खर्च बढ़ा है
- बिजली और लॉजिस्टिक्स लागत ऊपर गई है
- ऑनलाइन डिलीवरी खर्च बढ़ गया है
Cafe Delhi Heights के फाउंडर विक्रांत बत्रा के मुताबिक, ईंधन महंगा होने से सिर्फ ट्रांसपोर्ट ही नहीं बल्कि पैकेजिंग, सप्लाई चेन और कर्मचारियों की लागत भी बढ़ती है। यही वजह है कि रेस्टोरेंट्स को मेन्यू प्राइस बढ़ाने पड़ रहे हैं।
किन चीजों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा?
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि सबसे पहले उन फूड आइटम्स के दाम बढ़ेंगे जिनमें डिलीवरी, डेयरी और प्रोसेस्ड सामग्री ज्यादा इस्तेमाल होती है।
इन फूड आइटम्स की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं:
| फूड आइटम | संभावित बढ़ोतरी |
|---|---|
| बिरयानी | 5-8% |
| पिज्जा | 5-10% |
| बर्गर | 5-7% |
| कॉफी और कैफे आइटम | 6-9% |
| मिल्कशेक और डेयरी बेस्ड फूड | 5-8% |
| ऑनलाइन कॉम्बो मील | 7-10% |
अगर कोई परिवार हर महीने 8-10 बार ऑनलाइन खाना ऑर्डर करता है तो उसका मासिक खर्च 800 से 2000 रुपये तक बढ़ सकता है।
ऑनलाइन फूड डिलीवरी भी होगी महंगी
महंगाई का असर सिर्फ रेस्टोरेंट के मेन्यू तक सीमित नहीं रहेगा। ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म भी जल्द डिलीवरी फीस और सर्विस चार्ज बढ़ा सकते हैं।
Zomato और Swiggy जैसे प्लेटफॉर्म्स पर ग्राहकों को आने वाले दिनों में ज्यादा डिलीवरी चार्ज, कम डिस्काउंट, हाई मिनिमम ऑर्डर वैल्यू, बढ़ी हुई प्लेटफॉर्म फीस का सामना करना पड़ सकता है।
इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक, अगर ईंधन की कीमतें और बढ़ती हैं तो डिलीवरी पार्टनर्स को अतिरिक्त इंसेंटिव देना पड़ेगा, जिसका बोझ अंततः ग्राहकों पर ही डाला जाएगा।
ईरान संकट और कच्चे तेल की कीमतों का असर
फूड इंडस्ट्री पर यह दबाव सिर्फ भारत के अंदरूनी कारणों से नहीं बढ़ा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहा पश्चिम एशिया संकट भी इसकी बड़ी वजह है।
मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुका है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और बढ़ता है तो तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में हर बढ़ोतरी का असर देश के ट्रांसपोर्ट, गैस, लॉजिस्टिक्स और खाद्य उद्योग पर पड़ता है।
दूध और डेयरी महंगी होने से बढ़ा दबाव
हाल ही में कई डेयरी कंपनियों ने दूध की कीमतों में बढ़ोतरी की है। इसका असर सीधे कैफे, मिठाई, पिज्जा, बर्गर और बेकरी इंडस्ट्री पर पड़ रहा है।
चीज, बटर, क्रीम और दूध आधारित उत्पादों की लागत बढ़ने से फास्ट फूड कंपनियों का खर्च तेजी से बढ़ा है। यही कारण है कि आने वाले समय में चीज पिज्जा, मिल्कशेक, कॉफी और डेजर्ट्स ज्यादा महंगे हो सकते हैं।
क्या छोटे रेस्टोरेंट्स पर ज्यादा असर पड़ेगा?
बड़े ब्रांड किसी हद तक कीमतों को नियंत्रित कर सकते हैं, लेकिन छोटे और मध्यम रेस्टोरेंट्स सबसे ज्यादा दबाव में हैं। इनके पास सप्लाई चेन पर उतना नियंत्रण नहीं होता और मार्जिन भी कम होता है।
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले महीनों में कई छोटे रेस्टोरेंट:
- पोर्शन साइज कम कर सकते हैं
- डिस्काउंट बंद कर सकते हैं
- पैकेजिंग चार्ज अलग से जोड़ सकते हैं
- प्रीमियम आइटम्स के दाम तेजी से बढ़ा सकते हैं
आम लोगों की जेब पर कितना असर?
महंगाई का असर अब सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहा। इसका असर सीधे लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल पर दिखाई देने लगा है। बाहर खाना खाना, ऑनलाइन ऑर्डर करना और कैफे कल्चर अब धीरे-धीरे महंगा होता जा रहा है।
अगर आने वाले महीनों में पेट्रोल-डीजल और महंगा हुआ LPG कीमतें बढ़ीं, और कच्चा तेल ऊंचे स्तर पर बना रहा, तो फूड इंडस्ट्री में कीमतों की एक और बड़ी लहर देखने को मिल सकती है।
निष्कर्ष
पेट्रोल-डीजल और LPG की बढ़ती कीमतों ने अब फूड इंडस्ट्री को भी सीधे प्रभावित करना शुरू कर दिया है। बिरयानी, पिज्जा, बर्गर और ऑनलाइन फूड ऑर्डर जैसी चीजें अगले कुछ हफ्तों में 5% से 10% तक महंगी हो सकती हैं। बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत, डेयरी महंगाई और अंतरराष्ट्रीय तेल संकट ने रेस्टोरेंट कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आने वाले समय में ग्राहकों को कम डिस्काउंट और ज्यादा डिलीवरी फीस के लिए तैयार रहना पड़ सकता है।
Also Read:


