आज के समय में घरों में गार्डनिंग का शौक तेजी से बढ़ रहा है। लोग अपनी बालकनी, छत और छोटे-छोटे गार्डन में फल और सब्जियां उगाना पसंद कर रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ी समस्या होती है जगह की कमी। हर किसी के पास इतना बड़ा बगीचा नहीं होता कि वह अलग-अलग किस्मों के पेड़ लगा सके। ऐसे में एक ऐसी तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो रही है, जिसकी मदद से एक ही पेड़ पर कई तरह के फल उगाए जा सकते हैं।
खासतौर पर आम के पेड़ों में यह तकनीक काफी सफल मानी जाती है। आपने भी कई बार ऐसे पेड़ों के बारे में सुना होगा, जिन पर दशहरी, लंगड़ा, चौसा और अल्फांसो जैसे अलग-अलग किस्म के आम एक साथ लगते हैं। यह कोई जादू नहीं बल्कि वैज्ञानिक तकनीक “ग्राफ्टिंग” का कमाल है।
बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार, ग्राफ्टिंग तकनीक की मदद से न सिर्फ कम जगह में ज्यादा किस्मों के फल उगाए जा सकते हैं, बल्कि पौधे जल्दी फल देना भी शुरू कर देते हैं। यही वजह है कि अब किसान, नर्सरी संचालक और घरेलू गार्डनिंग करने वाले लोग भी इस तकनीक को तेजी से अपना रहे हैं।
क्या होती है ग्राफ्टिंग तकनीक?
ग्राफ्टिंग एक वैज्ञानिक बागवानी प्रक्रिया है, जिसमें दो अलग-अलग पौधों के हिस्सों को जोड़कर एक नया पौधा तैयार किया जाता है। इसमें एक पौधे की जड़ वाला हिस्सा इस्तेमाल किया जाता है, जिसे “रूटस्टॉक” कहा जाता है। वहीं दूसरे पौधे की शाखा या कलम को “साइयन” कहा जाता है।
जब इन दोनों हिस्सों को सही तरीके से जोड़ा जाता है, तो कुछ समय बाद वे आपस में जुड़कर एक ही पौधे की तरह बढ़ने लगते हैं। इसके बाद उस पेड़ पर अलग-अलग किस्मों के फल उगने लगते हैं।
उदाहरण के तौर पर अगर किसी मजबूत आम के पेड़ पर दशहरी, लंगड़ा और अल्फांसो आम की कलमें लगा दी जाएं, तो कुछ समय बाद उसी पेड़ पर तीनों किस्म के आम लग सकते हैं।
क्यों तेजी से लोकप्रिय हो रही है यह तकनीक?
शहरी इलाकों में जगह की कमी के कारण लोग कम स्पेस में ज्यादा पौधे उगाना चाहते हैं। ऐसे में ग्राफ्टिंग तकनीक काफी मददगार साबित हो रही है।
इसके अलावा इसके कई और फायदे भी हैं:
- एक ही पेड़ पर कई किस्म के फल उगाए जा सकते हैं
- पौधे जल्दी फल देना शुरू करते हैं
- पुराने पेड़ों को नई किस्मों में बदला जा सकता है
- कमजोर पौधों की जगह मजबूत जड़ों का इस्तेमाल किया जा सकता है
- छोटे गार्डन में ज्यादा वैरायटी उगाना आसान हो जाता है
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक, आम, अमरूद, नींबू, संतरा, गुलाब और कई सब्जियों में भी ग्राफ्टिंग तकनीक का इस्तेमाल सफलतापूर्वक किया जाता है।
आम के पेड़ में कैसे की जाती है ग्राफ्टिंग?
अगर आप अपने घर में एक ही पेड़ पर कई तरह के आम उगाना चाहते हैं, तो इसके लिए सही प्रक्रिया अपनाना बेहद जरूरी है।
1. मजबूत रूटस्टॉक चुनें
सबसे पहले एक हेल्दी और मजबूत आम का पौधा चुनें। इसकी जड़ें अच्छी होनी चाहिए, क्योंकि पूरा पेड़ उसी पर निर्भर करेगा।
2. सही साइयन यानी कलम लें
जिस किस्म का आम उगाना चाहते हैं, उसकी ताजी और स्वस्थ टहनी लें। ध्यान रखें कि शाखा में बीमारी या कीड़े न लगे हों।
3. शाखा पर कट लगाएं
रूटस्टॉक की शाखा पर हल्का कट लगाएं, ताकि दूसरी टहनी उसमें फिट हो सके।
4. कलम को जोड़ें
अब दूसरी किस्म की टहनी को सावधानी से कट वाले हिस्से में लगाएं।
5. ग्राफ्टिंग टेप से बांधें
दोनों हिस्सों को प्लास्टिक टेप या ग्राफ्टिंग टेप की मदद से अच्छी तरह बांध दें, ताकि हवा अंदर न जाए।
6. कुछ हफ्तों तक इंतजार करें
अगर कुछ समय बाद नई पत्तियां निकलने लगें, तो समझिए ग्राफ्टिंग सफल हो गई है।
ग्राफ्टिंग करने का सही समय कौन सा होता है?
बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार, ग्राफ्टिंग के लिए फरवरी से अप्रैल और जुलाई से अगस्त का समय बेहतर माना जाता है। इस दौरान पौधों की ग्रोथ तेज होती है, जिससे कलम जल्दी जुड़ जाती है।
बहुत ज्यादा गर्मी या सर्दी में ग्राफ्टिंग करने से सफलता की संभावना कम हो सकती है।
ग्राफ्टिंग के बाद कैसे करें देखभाल?
सिर्फ ग्राफ्टिंग कर देना ही काफी नहीं होता, बल्कि उसके बाद सही देखभाल भी बेहद जरूरी होती है।
हल्की धूप में रखें
शुरुआती दिनों में पौधे को तेज धूप से बचाना चाहिए। हल्की धूप और सामान्य तापमान बेहतर रहता है।
ज्यादा पानी न दें
मिट्टी को जरूरत से ज्यादा गीला नहीं रखना चाहिए। अधिक पानी देने से जड़ें खराब हो सकती हैं।
सूखी शाखाएं हटाते रहें
कमजोर और सूखी शाखाओं को समय-समय पर काटते रहें, ताकि पौधे की ऊर्जा सही ग्रोथ में लगे।
जैविक खाद का इस्तेमाल करें
गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट या ऑर्गेनिक खाद का इस्तेमाल करने से पौधे तेजी से बढ़ते हैं और फल जल्दी आते हैं।
किन पौधों में सबसे ज्यादा सफल होती है ग्राफ्टिंग?
ग्राफ्टिंग तकनीक का इस्तेमाल कई पौधों में किया जाता है, लेकिन कुछ पौधों में इसकी सफलता दर ज्यादा मानी जाती है:
| पौधा | ग्राफ्टिंग का उपयोग |
|---|---|
| आम | कई किस्म के आम एक पेड़ पर |
| नींबू | अलग-अलग साइट्रस फल |
| गुलाब | नई रंगीन किस्में तैयार करना |
| अमरूद | जल्दी फल उत्पादन |
| टमाटर | मजबूत जड़ों के लिए |
| बैंगन | रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए |
क्या घर पर भी कर सकते हैं ग्राफ्टिंग?
अगर आपके पास थोड़ी बागवानी की जानकारी है, तो आप घर पर भी ग्राफ्टिंग कर सकते हैं। हालांकि शुरुआत में सफलता मिलने में थोड़ा समय लग सकता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि शुरुआत छोटे पौधों से करनी चाहिए। सही उपकरण, साफ कट और धैर्य इस तकनीक की सफलता के सबसे बड़े मंत्र माने जाते हैं।
क्यों खास है यह तकनीक?
आज जब शहरों में जगह कम होती जा रही है, तब ग्राफ्टिंग जैसी तकनीक लोगों को कम स्पेस में ज्यादा फल उगाने का मौका दे रही है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर भी “एक पेड़ पर कई फल” वाले वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।
यह तकनीक सिर्फ शौक तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों के लिए भी फायदेमंद साबित हो रही है। इससे कम जमीन में ज्यादा उत्पादन लिया जा सकता है और अलग-अलग किस्मों के फल तैयार किए जा सकते हैं।
निष्कर्ष
ग्राफ्टिंग तकनीक आधुनिक बागवानी की एक बेहद उपयोगी और वैज्ञानिक विधि है। इसकी मदद से एक ही पेड़ पर कई किस्मों के आम और दूसरे फल उगाए जा सकते हैं। कम जगह में ज्यादा उत्पादन, जल्दी फल और बेहतर पौधों की वजह से यह तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
अगर आप भी अपने घर में छोटा सा फ्रूट गार्डन बनाना चाहते हैं, तो ग्राफ्टिंग तकनीक आपके लिए एक शानदार विकल्प साबित हो सकती है।
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