भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव लगातार बढ़ता जा रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख इंडेक्स हाल के महीनों में दबाव में रहे हैं, जिससे रिटेल निवेशकों की चिंता भी बढ़ी है। ऐसे माहौल में जहां कई इक्विटी निवेश निगेटिव रिटर्न दे रहे हैं, वहीं कुछ फंड ऐसे भी हैं जिन्होंने सेक्टर रोटेशन की रणनीति अपनाकर निवेशकों को बेहतर रिटर्न दिया है।
इन्हीं में एक नाम है ICICI Prudential Multi Sector Passive FoF का। यह फंड पिछले कुछ समय से इसलिए चर्चा में है क्योंकि इसने बदलते आर्थिक माहौल और सेक्टर ट्रेंड्स के हिसाब से अपने निवेश में बदलाव कर अच्छा प्रदर्शन किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में केवल इंडेक्स में पैसा लगाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि यह समझना ज्यादा जरूरी होगा कि किस समय कौन-सा सेक्टर मजबूत स्थिति में है। यही रणनीति सेक्टर रोटेशन कहलाती है।
आखिर क्या होता है सेक्टर रोटेशन?
शेयर बाजार में सभी सेक्टर एक साथ अच्छा प्रदर्शन नहीं करते। आर्थिक स्थिति बदलने के साथ अलग-अलग सेक्टरों की चाल भी बदलती रहती है।
उदाहरण के तौर पर आर्थिक रिकवरी के समय बैंकिंग, मेटल और ऑटो सेक्टर तेजी दिखाते हैं, महंगाई या अनिश्चितता के समय FMCG और फार्मा जैसे रक्षात्मक सेक्टर मजबूत रहते हैं, ब्याज दरों में बदलाव का असर रियल्टी और बैंकिंग पर सबसे ज्यादा पड़ता है यानी बाजार का पैसा समय-समय पर एक सेक्टर से दूसरे सेक्टर में शिफ्ट होता रहता है। इसी प्रक्रिया को सेक्टर रोटेशन कहा जाता है।
रिटेल निवेशक कहां कर जाते हैं गलती?
अधिकांश छोटे निवेशक वही सेक्टर चुनते हैं जो पहले से तेजी में चल रहा होता है। उदाहरण जब मेटल शेयर तेजी से बढ़ते हैं तब लोग खरीदारी शुरू करते हैं, जब IT सेक्टर गिरने लगता है तब घबराकर बेच देते हैं लेकिन प्रोफेशनल फंड मैनेजर डेटा, वैल्यूएशन और आर्थिक संकेतकों के आधार पर पहले ही सेक्टर बदलना शुरू कर देते हैं। यही वजह है कि कई बार म्यूचुअल फंड लंबे समय में बेहतर प्रदर्शन कर जाते हैं।
ICICI Prudential Multi Sector Passive FoF ने क्या किया?
यह फंड अलग-अलग सेक्टर ETF में निवेश करता है और बाजार की स्थिति के हिसाब से अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करता है।
फंड ने दिसंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच कई बड़े बदलाव किए:
- मेटल सेक्टर में निवेश करीब 10% से घटाकर 6.59% किया
- प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर में हिस्सेदारी 19% से बढ़ाकर 26.68% कर दी
- पावर सेक्टर में निवेश शून्य से बढ़ाकर 8.39% किया
- फार्मा सेक्टर में निवेश शून्य से बढ़ाकर 9.56% किया
यह दिखाता है कि फंड ने केवल तेजी के पीछे भागने के बजाय भविष्य के अवसरों को पहचानने की कोशिश की।
अप्रैल 2026 तक फंड का पोर्टफोलियो कैसा था?
फंड की सबसे बड़ी हिस्सेदारी प्राइवेट बैंक ETF में थी।
प्रमुख सेक्टर अलोकेशन:
| सेक्टर | हिस्सेदारी |
|---|---|
| Private Bank ETF | 26.68% |
| FMCG ETF | 10.55% |
| Pharma ETF | 9.56% |
| Oil & Gas ETF | 9.40% |
| IT ETF | 8.58% |
| Power ETF | 8.39% |
इसके अलावा ऑटो, रियल्टी, बैंकिंग और मेटल ETF में भी निवेश रखा गया था।
बाजार गिरने के बावजूद क्यों आकर्षित कर रहा यह फंड?
सेंसेक्स:
- साप्ताहिक आधार पर 2.70% गिरा
- पिछले 6 महीनों में 11% से ज्यादा कमजोर रहा
इसके बावजूद यह फंड निवेशकों का ध्यान इसलिए खींच रहा है क्योंकि इसने बदलते बाजार के हिसाब से अपने पोर्टफोलियो को सक्रिय रूप से मैनेज किया।
फंड मैनेजर्स कौन हैं?
इस स्कीम का प्रबंधन शंकरन नरेन, धर्मेश कक्कड कर रहे हैं। दोनों 2018 से इस स्कीम से जुड़े हुए हैं और सेक्टर आधारित रणनीतियों के लिए बाजार में काफी चर्चित माने जाते हैं।
निवेशकों को क्या फायदा मिलता है?
1. कई ETF अलग-अलग खरीदने की जरूरत नहीं
अगर कोई निवेशक खुद सेक्टर ETF खरीदना चाहे तो डीमैट अकाउंट चाहिए, बार-बार ट्रेडिंग करनी पड़ती है, ब्रोकरेज लागत लगती है लेकिन इस फंड के जरिए यह पूरा काम एक ही स्कीम में हो जाता है।
2. डेटा आधारित निवेश
यह फंड भावनाओं के बजाय वैल्यूएशन, आर्थिक संकेतक, जोखिम-रिटर्न अनुपात, सेक्टर ट्रेंड के आधार पर निवेश करता है।
3. Diversification का फायदा
एक ही सेक्टर पर निर्भरता कम रहती है, जिससे जोखिम भी नियंत्रित होता है।
कितना है एक्सपेंस रेशियो?
- कुल एक्सपेंस रेशियो: लगभग 0.60%
- इसमें ETF का खर्च भी शामिल है
- 15 दिनों के भीतर निकासी पर 1% एग्जिट लोड लगता है
रिटर्न कितना मिला?
ICICI Prudential Multi Sector Passive FoF को 1 जनवरी 2013 को लॉन्च किया गया था।
30 अप्रैल 2026 तक:
- फंड का CAGR रिटर्न: 13.35%
- Nifty 500 TRI का CAGR: 12.91%
यानी लंबे समय में फंड ने बेंचमार्क से थोड़ा बेहतर प्रदर्शन किया है।
क्या अभी ऐसे फंड में निवेश करना सही रहेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सेक्टर आधारित उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है।
ऐसे में डेटा आधारित सेक्टर रोटेशन, प्रोफेशनल पोर्टफोलियो मैनेजमेंट, मल्टी सेक्टर एक्सपोजर वाले फंड निवेशकों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। हालांकि निवेश से पहले अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को जरूर समझना चाहिए।
किन निवेशकों के लिए सही हो सकता है यह फंड?
यह फंड उन लोगों के लिए बेहतर माना जा सकता है जो लंबे समय के लिए निवेश करना चाहते हैं, सेक्टर ETF का फायदा लेना चाहते हैं, खुद स्टॉक या सेक्टर चुनने में सहज नहीं हैं, एक्टिव और पैसिव निवेश का मिश्रण चाहते हैं.
आगे बाजार में क्या दिख सकता है?
अगर ब्याज दरें स्थिर होती हैं, निजी बैंकिंग में क्रेडिट ग्रोथ बढ़ती है, पावर और फार्मा सेक्टर मजबूत बने रहते हैं तो सेक्टर रोटेशन आधारित रणनीतियां आने वाले समय में और मजबूत दिख सकती हैं।
हालांकि वैश्विक बाजार, डॉलर इंडेक्स, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की चाल भारतीय बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
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