नई दिल्ली। भारत से विदेशों में पैसा भेजने के लिए बनाई गई व्यवस्था का दुरुपयोग करके करोड़ों रुपये बाहर भेजे जाने का बड़ा मामला सामने आया है। आयकर विभाग और वित्तीय जांच एजेंसियों की जांच में पता चला है कि फर्जी पैन कार्ड, गलत जानकारी और संदिग्ध बैंकिंग लेनदेन के जरिए भारत से थाईलैंड पैसा भेजा जा रहा था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति के नाम पर दर्जनों पैन कार्ड इस्तेमाल किए गए। एक मामले में 47 पैन कार्ड और दूसरे में 27 पैन कार्ड इस्तेमाल होने की बात सामने आई है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी मुद्रा पर दबाव के कारण सरकार डॉलर की बचत करने की कोशिश कर रही है। सरकार लोगों से अनावश्यक विदेशी खर्च कम करने की अपील कर रही है, लेकिन दूसरी ओर कुछ नेटवर्क बैंकिंग सिस्टम और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करके अवैध तरीके से पैसा विदेश भेजने में लगे हुए हैं।
पढ़ाई के नाम पर भेजा जा रहा था पैसा
जांच एजेंसियों के मुताबिक विदेश में पढ़ाई के लिए इस्तेमाल होने वाले विशेष कोड का दुरुपयोग किया गया। बैंकों और मनी ट्रांसफर कंपनियों को यह दिखाया गया कि पैसा विदेशी शिक्षा से जुड़े खर्चों के लिए भेजा जा रहा है। इसके लिए विदेश में कॉलेज में दाखिले, फीस और अन्य शैक्षणिक खर्चों का हवाला दिया गया, जबकि कई मामलों में असली पढ़ाई से कोई संबंध नहीं मिला।
जांच में सामने आया कि कई ट्रांजैक्शन ऐसे थे जिनमें दस्तावेजों और भुगतान के उद्देश्य के बीच मेल नहीं था। एजेंसियों को शक है कि शिक्षा के नाम पर भेजा गया पैसा वास्तव में मनी लॉन्ड्रिंग, ऑनलाइन गेमिंग, क्रिप्टो कारोबार और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों से जुड़ा हो सकता है।
फर्जी पैन कार्ड से तोड़ी गई सीमा
भारतीय रिजर्व बैंक की व्यवस्था के तहत एक व्यक्ति एक वित्त वर्ष में तय सीमा तक ही विदेश पैसा भेज सकता है। लेकिन जांच में सामने आया कि इस सीमा से बचने के लिए अलग-अलग पैन कार्ड का इस्तेमाल किया गया। कई मामलों में नाम एक जैसा था लेकिन जन्मतिथि अलग-अलग दर्ज थी।
इस तरीके से सिस्टम को यह दिखाया गया कि पैसा अलग-अलग लोगों द्वारा भेजा जा रहा है, जबकि जांच एजेंसियों को शक है कि पूरा नेटवर्क कुछ चुनिंदा लोगों या संगठनों द्वारा संचालित किया जा रहा था।
वित्तीय मामलों के जानकारों का कहना है कि अगर एक व्यक्ति के नाम पर कई पैन कार्ड मौजूद हों तो लेनदेन की असली कड़ी पकड़ना मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि जांच एजेंसियां अब पैन कार्ड सत्यापन और बैंक खातों की निगरानी को और सख्त करने की तैयारी में हैं।
थाईलैंड क्यों बना केंद्र?
पिछले कुछ वर्षों में थाईलैंड दक्षिण-पूर्व एशिया में डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन गेमिंग और क्रिप्टो नेटवर्क का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। चीन में क्रिप्टो कारोबार पर सख्ती बढ़ने के बाद कई ऑपरेटर थाईलैंड और कंबोडिया जैसे देशों में सक्रिय हो गए।
भारतीय एजेंसियों को जांच में ऐसे कई भुगतान मिले जिनका संबंध विदेशी गेमिंग प्लेटफॉर्म और संदिग्ध डिजिटल वॉलेट से था। कुछ मामलों में ऐसे भुगतान माध्यम भी सामने आए जिनके तार माल्टा और साइप्रस जैसे देशों से जुड़े बताए जा रहे हैं।
जांच एजेंसियों को शक है कि भारत से भेजा गया पैसा आगे दूसरे देशों में ट्रांसफर किया जा सकता है, जिससे असली लाभार्थी तक पहुंचना और मुश्किल हो जाता है।
साइबर अपराध और डिजिटल ठगी से भी जुड़ रहे हैं तार
राजस्थान समेत देश के कई हिस्सों में साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी से जुड़े मामलों में तेजी आई है। जांच एजेंसियों का मानना है कि डिजिटल ठगी से कमाए गए पैसे को विदेश भेजने के लिए अब पारंपरिक हवाला नेटवर्क के बजाय बैंकिंग चैनलों, क्रिप्टो वॉलेट और ऑनलाइन भुगतान प्रणालियों का इस्तेमाल बढ़ रहा है।
ऑनलाइन निवेश घोटाले, फर्जी गेमिंग प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया फ्रॉड और कॉल सेंटर ठगी से कमाया गया पैसा अलग-अलग खातों में घुमाकर विदेश भेजा जा रहा है। यही वजह है कि अब केवल आयकर विभाग ही नहीं बल्कि प्रवर्तन निदेशालय, साइबर अपराध शाखा और अन्य एजेंसियां भी इस मामले पर नजर रखे हुए हैं।
जांच एजेंसियों की बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश में पढ़ाई के नाम पर बड़े पैमाने पर पैसा भेजा जाना अपने आप में जांच का विषय है। सामान्य तौर पर शिक्षा से जुड़े भुगतान के लिए कॉलेज का प्रवेश पत्र, फीस की रसीद और अन्य दस्तावेज जरूरी होते हैं। लेकिन कई मामलों में दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं।
अब आशंका जताई जा रही है कि आने वाले समय में विदेशी शिक्षा से जुड़े भुगतान के नियम और सख्त किए जा सकते हैं। बैंकों को भी संदिग्ध लेनदेन की पहचान करने और अतिरिक्त दस्तावेज मांगने के निर्देश दिए जा सकते हैं।
रुपये पर भी पड़ सकता है असर
भारत पहले से ही बढ़ते आयात बिल और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से दबाव में है। ऐसे समय में अगर बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा अवैध तरीके से बाहर जाती है तो इससे रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों से देश की वित्तीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं। अगर समय रहते ऐसे नेटवर्क पर कार्रवाई नहीं हुई तो डिजिटल माध्यमों से होने वाली मनी लॉन्ड्रिंग आने वाले समय में और बड़ी चुनौती बन सकती है।
आगे क्या हो सकता है?
जांच एजेंसियां अब संदिग्ध पैन कार्ड, बैंक खातों, विदेशी भुगतान और डिजिटल लेनदेन की गहराई से जांच कर रही हैं। कई मामलों में पुराने ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।
अगर जांच में मनी लॉन्ड्रिंग, फर्जी दस्तावेज या अवैध विदेशी लेनदेन साबित होता है तो संबंधित लोगों पर कड़े कानूनों के तहत कार्रवाई हो सकती है। आने वाले समय में विदेशी भुगतान व्यवस्था, पैन सत्यापन और डिजिटल ट्रांजैक्शन निगरानी को और मजबूत किया जा सकता है।
यह मामला केवल फर्जी पैन कार्ड का नहीं है, बल्कि तेजी से बदलती डिजिटल अर्थव्यवस्था में उभर रहे नए वित्तीय अपराधों का संकेत भी माना जा रहा है।
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