देश की सबसे बड़ी डेयरी ब्रांड्स में शामिल Amul ने एक बार फिर दूध की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF) ने बुधवार को ऐलान किया कि अमूल दूध के दाम पूरे भारत में 2 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ाए जा रहे हैं। नई कीमतें 14 मई 2026 से लागू होंगी। ऐसे में दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, जयपुर और कोलकाता समेत कई शहरों में उपभोक्ताओं को अब दूध के लिए ज्यादा पैसे चुकाने होंगे।
यह बढ़ोतरी ऐसे समय पर हुई है जब पहले से ही खाद्य महंगाई, सब्जियों की कीमतों और रोजमर्रा के खर्चों का दबाव आम लोगों की जेब पर बढ़ रहा है। खास बात यह है कि अमूल इससे पहले भी 1 मई 2025 को दूध की कीमतों में बढ़ोतरी कर चुका था। यानी करीब एक साल के भीतर यह दूसरा बड़ा प्राइस रिविजन माना जा रहा है।
किन-किन अमूल दूध वेरिएंट्स के बढ़े दाम?
कंपनी ने जिन प्रमुख वेरिएंट्स की कीमतों में इजाफा किया है, उनमें शामिल हैं:
- अमूल गोल्ड
- अमूल ताजा
- अमूल काऊ मिल्क
- अमूल बफेलो मिल्क
- अमूल स्लिम एंड ट्रिम
- अमूल स्टैंडर्ड मिल्क
- अमूल टी-स्पेशल
डेयरी इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, सभी प्रमुख पैकेजिंग साइज पर 2 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी लागू होगी। हालांकि अलग-अलग राज्यों में टैक्स और सप्लाई लागत के आधार पर कुछ मामूली अंतर देखने को मिल सकता है।
आखिर क्यों महंगा हुआ अमूल दूध?
दूध की कीमतों में यह बढ़ोतरी अचानक नहीं आई है। पिछले कई महीनों से डेयरी सेक्टर पर लागत का दबाव लगातार बढ़ रहा था। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि पशु चारा, बिजली, डीजल, ट्रांसपोर्टेशन और पैकेजिंग लागत में तेज बढ़ोतरी के कारण डेयरी कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ा है।
इसके अलावा गर्मी के मौसम में दूध उत्पादन पर भी दबाव बढ़ जाता है। कई राज्यों में हीटवेव जैसी स्थिति के कारण पशुओं की दूध देने की क्षमता प्रभावित हुई है। इससे सप्लाई पर असर पड़ता है और कंपनियों को खरीद मूल्य बढ़ाना पड़ता है।
डेयरी इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों का मानना है कि किसानों को बेहतर भुगतान देने के लिए भी कंपनियों को रिटेल कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं। अमूल लंबे समय से यह दावा करता रहा है कि उसके कुल उपभोक्ता मूल्य का बड़ा हिस्सा सीधे दूध उत्पादकों तक पहुंचता है।
आम आदमी की जेब पर कितना असर?
दूध भारत के करोड़ों परिवारों की रोजमर्रा की जरूरत है। ऐसे में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी छोटे स्तर पर भले सामान्य लगे, लेकिन महीने के खर्च पर इसका असर साफ दिखाई देगा।
उदाहरण के तौर पर यदि कोई परिवार रोज 2 लीटर दूध इस्तेमाल करता है, तो उसे अब महीने में लगभग 120 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ सकते हैं। चाय, दही, मिठाई और डेयरी आधारित दूसरे उत्पादों की लागत पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में अगर चारे और ट्रांसपोर्ट लागत में और बढ़ोतरी होती है तो दूसरी डेयरी कंपनियां भी कीमतें बढ़ा सकती हैं।
क्या दूसरी कंपनियां भी बढ़ाएंगी दाम?
डेयरी बाजार में अमूल की कीमतों का असर अक्सर दूसरे ब्रांड्स पर भी दिखाई देता है। पिछले वर्षों में देखा गया है कि जब अमूल या मदर डेयरी जैसी बड़ी कंपनियां दाम बढ़ाती हैं, तो कुछ समय बाद क्षेत्रीय डेयरी ब्रांड्स भी कीमतों में संशोधन करती हैं।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले हफ्तों में अन्य कंपनियां भी लागत दबाव का हवाला देकर दूध महंगा कर सकती हैं। खासकर उत्तर भारत और पश्चिम भारत के बाजारों में इसका असर ज्यादा देखने को मिल सकता है।
पिछले कुछ सालों में कितनी बढ़ी दूध की कीमतें?
कोविड के बाद से डेयरी सेक्टर में लागत लगातार बढ़ी है। पशु आहार, मक्का, सोयाबीन और ईंधन की कीमतों में उछाल के कारण कंपनियों ने कई बार दूध के दाम बढ़ाए हैं। पिछले तीन वर्षों में अलग-अलग चरणों में दूध की कीमतों में कुल मिलाकर 10 से 15 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि देखी गई है।
हालांकि कंपनियों का कहना है कि यह बढ़ोतरी किसानों की आय बनाए रखने और सप्लाई चेन को स्थिर रखने के लिए जरूरी है।
क्या महंगाई पर पड़ेगा असर?
दूध की कीमतें बढ़ने का असर सिर्फ घरेलू बजट तक सीमित नहीं रहता। यह खाद्य महंगाई के आंकड़ों पर भी असर डालता है। चाय, मिठाई, रेस्टोरेंट और होटल इंडस्ट्री में दूध एक बड़ा इनपुट कॉस्ट है। ऐसे में आने वाले महीनों में डेयरी आधारित उत्पादों की कीमतों में भी हल्की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अगर खाद्य वस्तुओं की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो खुदरा महंगाई दर पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है। खासकर शहरी परिवारों के मासिक खर्च पर इसका सीधा असर दिखाई देगा।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है आगे का संकेत?
फिलहाल अमूल की नई दरें 14 मई से लागू हो रही हैं, लेकिन बाजार की नजर अब दूसरी डेयरी कंपनियों पर भी है। अगर कच्चे दूध की खरीद कीमतें और बढ़ती हैं तो आने वाले महीनों में डेयरी सेक्टर में एक और प्राइस हाइक देखने को मिल सकती है।
विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि उपभोक्ता अपने घरेलू बजट में डेयरी खर्च को ध्यान में रखकर प्लानिंग करें, क्योंकि दूध और उससे जुड़े उत्पादों की कीमतें निकट भविष्य में दबाव में रह सकती हैं।
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