भारत के दिग्गज बैंकर और कोटक महिंद्रा बैंक के फाउंडर उदय कोटक ने भारत की अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर भारत को आने वाले समय में वास्तविक आर्थिक महाशक्ति बनना है तो उसे केवल “संरक्षण” की नीति से बाहर निकलकर “सृजन और परिवर्तन” की सोच अपनानी होगी।
उदय कोटक ने हिंदू धर्म के प्रतीकों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत को “भगवान विष्णु” की संरक्षण वाली सोच से आगे बढ़कर “ब्रह्मा” और “महेश” यानी सृजन और परिवर्तन के सिद्धांतों को अपनाना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि दुनिया तेजी से बदल रही है और जो देश समय के हिसाब से खुद को नहीं बदलेंगे, वे पीछे छूट जाएंगे।
उदय कोटक ने आखिर कहा क्या?
CII Trade Summit 2026 में बोलते हुए उदय कोटक ने कहा कि दुनिया अब स्थिर और predictable व्यवस्था से बाहर निकल रही है। उन्होंने कहा कि बहुत से लोग अब भी यह मानते हैं कि वैश्विक संकट खत्म होने के बाद दुनिया फिर सामान्य हो जाएगी। लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। कोटक के मुताबिक दुनिया में structural changes पहले ही शुरू हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि भारत को केवल status quo बचाने या पुराने सिस्टम को बनाए रखने पर नहीं टिके रहना चाहिए। बल्कि innovation, disruption और transformation को अपनाना होगा।
‘ब्रह्मा और महेश’ का उदाहरण क्यों दिया?
उदय कोटक ने भारतीय धार्मिक प्रतीकों के जरिए अपनी बात समझाई।उन्होंने कहा कि “ब्रह्मा” सृजन के प्रतीक हैं। जबकि “महेश” यानी भगवान शिव परिवर्तन और destruction-driven renewal के प्रतीक माने जाते हैं। कोटक का कहना था कि नई अर्थव्यवस्था में केवल existing systems बचाने से काम नहीं चलेगा। देशों को नए business models, नई technologies और नए economic structures बनाने होंगे।
‘विष्णु मॉडल’ से क्या मतलब था?
उदय कोटक ने “विष्णु” को संरक्षण और स्थिरता का प्रतीक बताया। उनका कहना था कि भारत लंबे समय तक existing systems को बचाने और incremental changes तक सीमित रहा। लेकिन global competition अब बहुत aggressive हो चुका है। ऐसे में सिर्फ stability और protectionism से growth sustain करना मुश्किल होगा।
दुनिया ‘आदिवासी व्यवस्था’ की तरफ लौट रही है?
उदय कोटक ने कहा कि दुनिया धीरे-धीरे 1945 से पहले वाली power-centric व्यवस्था की तरफ लौट रही है। उन्होंने इसे “tribal world order” बताया। कोटक के मुताबिक अब geopolitics, energy control, supply chain dominance और asset ownership फिर से global power तय कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि “might is becoming right” यानी ताकतवर देश और बड़ी कंपनियां अधिक प्रभावशाली होती जा रही हैं।
होर्मुज और सप्लाई चेन का क्यों किया जिक्र?
उदय कोटक ने Strait of Hormuz और global supply chain risks का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हाल के geopolitical tensions ने यह दिखा दिया है कि energy security और supply chain resilience कितनी महत्वपूर्ण हो चुकी है। अगर critical trade routes प्रभावित होते हैं तो पूरी global economy हिल सकती है।
अमेरिका का उदाहरण क्यों दिया?
कोटक ने कहा कि अमेरिका ने technology, cloud computing और innovation-led businesses के जरिए खुद को energy-dependent nation से economic superpower में बदला। उनका कहना था कि strategic industries, profitable businesses और financial strength भविष्य की दुनिया में सबसे बड़ी ताकत बनने वाले हैं।
भारत को अब क्या करना चाहिए?
उदय कोटक के मुताबिक भारत को realistic, strategic और practical सोच अपनानी होगी। उन्होंने कहा कि अत्यधिक optimism या extreme pessimism दोनों से बचना चाहिए।
भारत को manufacturing, technology, energy security, financial strength और global competitiveness पर एक साथ काम करना होगा।
Why It Matters
उदय कोटक का बयान केवल धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल नहीं बल्कि भारत की आर्थिक रणनीति पर बड़ा संदेश माना जा रहा है। उनका संकेत साफ है कि आने वाले वर्षों में वही देश आगे बढ़ेंगे जो तेजी से innovation, transformation और strategic control पर फोकस करेंगे। केवल पुराने सिस्टम बचाने से global economic race नहीं जीती जा सकती।
Uday Kotak Statement Snapshot
| फैक्टर | जानकारी |
|---|---|
| बयान देने वाले | उदय कोटक |
| मंच | CII Trade Summit 2026 |
| मुख्य संदेश | Creation और Transformation जरूरी |
| धार्मिक उदाहरण | ब्रह्मा, महेश और विष्णु |
| चिंता | बदलती Global World Order |
| फोकस | Strategic Economic Strength |
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