प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोने को लेकर की गई अपील के बाद देशभर में गोल्ड मार्केट में हलचल तेज हो गई है। पीएम मोदी ने रविवार को लोगों से एक साल तक गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचने की अपील की थी। इसके बाद सोमवार को सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली, जबकि ज्वेलरी कंपनियों के शेयर भी दबाव में आ गए।
अब ज्वेलरी इंडस्ट्री एसोसिएशन मंगलवार को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अधिकारियों से मुलाकात करने जा रही है। माना जा रहा है कि इस बैठक में सोने की सप्लाई, आयात और बाजार पर पड़ रहे असर को लेकर चर्चा हो सकती है।
पीएम मोदी की अपील के बाद क्या हुआ?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, महंगे कच्चे तेल और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव का हवाला देते हुए लोगों से एक साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीद से बचने की अपील की थी।
इसके बाद सोमवार को MCX पर गोल्ड प्राइस में गिरावट आई, IBJA रेट्स भी नीचे आए और गोल्ड स्टॉक्स में भारी बिकवाली देखने को मिली। विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार ने इस बयान को demand slowdown के संकेत के तौर पर लिया।
कितना गिरा सोने का भाव?
MCX के आंकड़ों के मुताबिक सोमवार दोपहर करीब 2:30 बजे जून डिलीवरी वाला सोना करीब ₹400 टूटकर ₹1,52,134 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।
वहीं IBJA डेटा के अनुसार 24 कैरेट सोना करीब ₹800 गिरकर ₹1,50,277 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार में profit booking और demand concerns दोनों का असर दिखाई दिया।
PMO से क्यों मिलने जा रही ज्वेलरी इंडस्ट्री?
सीएनबीसी-TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक ज्वेलरी इंडस्ट्री एसोसिएशन मंगलवार यानी 12 मई को PMO अधिकारियों से मुलाकात करेगी।
इस बैठक में gold supply challenges, import-related concerns और शादी के सीजन में demand pressure जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इंडस्ट्री फिलहाल दोहरी चुनौती का सामना कर रही है। एक तरफ import slowdown है और दूसरी तरफ शादी के सीजन की बढ़ती मांग है।
अभी क्यों बढ़ी चिंता?
इस साल जनवरी से अप्रैल तक gold imports में लगातार गिरावट देखी गई है। यानी ज्वेलर्स के पास कम सोना पहुंच रहा है, supply tight हो रही है और demand season शुरू हो चुका है।
भारत में मई-जून के दौरान शादी का सीजन रहता है, जिसमें सोने की मांग तेजी से बढ़ती है। इसी वजह से industry stakeholders सरकार के साथ स्थिति स्पष्ट करना चाहते हैं।
पीएम मोदी ने आखिर अपील क्यों की?
विशेषज्ञों के मुताबिक सरकार फिलहाल rising crude oil prices, Middle East tensions और forex reserve pressure को लेकर चिंतित है।
भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर crude oil और gold आयात करता है। दोनों का भुगतान डॉलर में करना पड़ता है। अगर oil imports महंगे हों, gold imports बढ़ें और डॉलर demand ज्यादा हो, तो foreign exchange reserves पर दबाव बढ़ सकता है।
विदेशी मुद्रा भंडार कितना घटा?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 1 मई को समाप्त सप्ताह में भारत का forex reserve करीब 7.794 अरब डॉलर घटकर 690.693 अरब डॉलर रह गया।
इससे एक सप्ताह पहले भी reserves में करीब 4.82 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार गिरते reserves सरकार के लिए चिंता का विषय बन सकते हैं।
भारत में कितना सोना आयात होता है?
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा gold consumer है। देश अपनी जरूरत का 90% से ज्यादा सोना आयात करता है, हर साल करीब 700-800 टन gold consume करता है, जबकि domestic production सिर्फ 1-2 टन के आसपास है।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का gold import bill करीब 72 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के 58 अरब डॉलर से काफी ज्यादा है। यानी एक साल में gold imports में करीब 24 फीसदी की वृद्धि हुई।
बाजार पर आगे क्या असर पड़ सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर gold imports कम होते हैं, demand कमजोर पड़ती है और सरकार import control पर फोकस बढ़ाती है, तो short-term में jewellery sector दबाव में रह सकता है।
हालांकि wedding demand और festive buying आगे चलकर बाजार को सपोर्ट दे सकती है।
FAQ
पीएम मोदी ने क्या अपील की?
उन्होंने लोगों से एक साल तक गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचने की अपील की।
सोने की कीमत में कितनी गिरावट आई?
MCX पर सोना करीब ₹400 और IBJA रेट करीब ₹800 तक गिरा।
PMO से कौन मिलने जा रहा है?
Jewellery Industry Association।
बैठक में क्या चर्चा हो सकती है?
Gold supply, imports और market concerns पर।
भारत कितना सोना आयात करता है?
देश अपनी जरूरत का 90% से ज्यादा सोना आयात करता है।
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