पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बनी अनिश्चितता के बीच भारत सरकार अब अपनी ऊर्जा रणनीति में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग को मौजूदा 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत तक ले जाने पर विचार कर रही है।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य भारत की विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक तेल संकट और गहराता है, तो भारत को वैकल्पिक ईंधन स्रोतों पर तेजी से निर्भर होना पड़ेगा।
ऑटोमोबाइल कंपनियां पहले ही E20 compatible vehicles पर काम शुरू कर चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कंपनियां higher ethanol blending को ध्यान में रखकर नए इंजन विकसित कर सकती हैं।
आखिर क्या होता है इथेनॉल ब्लेंडिंग?
इथेनॉल एक बायोफ्यूल है, जिसे मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। जब इसे पेट्रोल में मिलाया जाता है, तो उसे इथेनॉल ब्लेंडिंग कहा जाता है।
सरकार का मानना है कि इससे कच्चे तेल का आयात कम होता है, विदेशी मुद्रा की बचत होती है, प्रदूषण घटाने में मदद मिलती है और किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलता है। भारत पिछले कुछ वर्षों से लगातार इथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा दे रहा है।
20% ब्लेंडिंग से कितना फायदा हुआ?
सरकारी अनुमानों के अनुसार 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग से भारत को बड़ा आर्थिक फायदा हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इससे हर साल करीब 4.5 करोड़ बैरल कच्चे तेल के आयात की बचत हुई है।
इसके अलावा लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा देश से बाहर जाने से भी बची है। विशेषज्ञों का मानना है कि यही वजह है कि सरकार अब इसे 25 प्रतिशत तक बढ़ाने की संभावना तलाश रही है।
सरकार का मानना है कि इथेनॉल blending बढ़ाने से carbon emissions कम करने में भी मदद मिल सकती है, जिससे clean energy goals को समर्थन मिलेगा।
क्यों बढ़ी सरकार की चिंता?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। खासतौर पर पश्चिम एशिया भारत के लिए सबसे बड़े crude oil suppliers में शामिल है।
लेकिन हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में तनाव, वैश्विक आपूर्ति बाधाएं, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और shipping risk ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
यही वजह है कि भारत अब biofuel, domestic refining और strategic reserves जैसे विकल्पों पर तेजी से काम कर रहा है।
आपकी गाड़ी पर क्या असर पड़ सकता है?
सरकार 25 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग की दिशा में धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहती है क्योंकि इससे जुड़े कई तकनीकी पहलू भी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादा इथेनॉल मिश्रण का असर इंजन performance, mileage और fuel system parts पर पड़ सकता है।
खासतौर पर पुराने वाहनों में उच्च इथेनॉल मिश्रण को लेकर ज्यादा सावधानी बरती जा रही है।
क्या इंजन में बदलाव करना पड़ेगा?
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादा इथेनॉल वाले ईंधन के लिए कई गाड़ियों में fuel lines, rubber components और engine calibration जैसे हिस्सों में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है।
हालांकि नई generation की कई गाड़ियां पहले से E20 fuel के हिसाब से डिजाइन की जा रही हैं। सरकार और वाहन कंपनियां फिलहाल 25 प्रतिशत blending के संभावित असर का अध्ययन कर रही हैं।
क्या माइलेज कम हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि इथेनॉल की energy density पेट्रोल से कम होती है। यही वजह है कि ज्यादा blending होने पर mileage थोड़ा प्रभावित हो सकता है।
हालांकि सरकार का तर्क है कि लंबे समय में energy security, import savings और lower emissions जैसे फायदे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।
किसानों को कैसे होगा फायदा?
इथेनॉल blending program को केवल energy policy नहीं बल्कि agriculture-linked economic strategy भी माना जा रहा है।
इथेनॉल उत्पादन बढ़ने से गन्ना किसानों, मक्का उत्पादकों और biofuel industry को फायदा मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे किसानों के लिए अतिरिक्त मांग और आय के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
अन्य मोर्चों पर भी तेजी से काम
भारत केवल इथेनॉल blending पर निर्भर नहीं रहना चाहता। सरकार energy infrastructure को मजबूत करने के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रही है।
रिपोर्ट्स के अनुसार राजस्थान की बाड़मेर रिफाइनरी ने काम शुरू कर दिया है, नुमालीगढ़ रिफाइनरी का विस्तार किया जा रहा है, महाराष्ट्र मेगा रिफाइनरी प्रोजेक्ट पर काम जारी है और गुजरात में नई refinery facility की योजना बनाई जा रही है।
इसके अलावा सरकार Strategic Petroleum Reserve की क्षमता भी बढ़ा रही है ताकि वैश्विक आपूर्ति संकट के दौरान देश में ईंधन की कमी न हो।
क्या भारत बदल रहा है अपनी ऊर्जा रणनीति?
विशेषज्ञों के अनुसार भारत अब धीरे-धीरे imported fossil fuel dependency से हटकर biofuel, renewable energy और domestic energy security की तरफ बढ़ रहा है।
इथेनॉल blending program इसी रणनीति का बड़ा हिस्सा माना जा रहा है।
आगे क्या हो सकता है?
सरकार फिलहाल 25 प्रतिशत blending को लेकर तकनीकी अध्ययन, वाहन compatibility और fuel efficiency impact जैसे पहलुओं का मूल्यांकन कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह योजना लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में भारत दुनिया के सबसे बड़े biofuel markets में शामिल हो सकता है। साथ ही यह कदम भारत की oil import bill को कम करने और energy security मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार अगर भारत 25 प्रतिशत blending का लक्ष्य हासिल कर लेता है, तो इससे देश की energy security और biofuel economy दोनों को बड़ी मजबूती मिल सकती है।
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