आज भारत में पेट्रोल पंपों की संख्या 1 लाख से ज्यादा हो चुकी है। देश के लगभग हर शहर, कस्बे और हाईवे पर आपको पेट्रोल पंप दिखाई दे जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत का पहला पेट्रोल पंप कब और कहां शुरू हुआ था?
करीब 98 साल पहले, जब भारत में गाड़ियों की संख्या बेहद कम थी और तेल विदेशों से जहाजों के जरिए आता था, तब मुंबई में देश का पहला पेट्रोल पंप शुरू किया गया था। उस दौर में पेट्रोल मशीन से नहीं बल्कि हाथ से चलने वाले पंपों से भरा जाता था।
दिलचस्प बात यह है कि उस समय पेट्रोल की कीमत इतनी कम थी कि आज सुनकर यकीन करना मुश्किल हो सकता है। हालांकि उस दौर में लोगों की आमदनी भी बेहद कम हुआ करती थी। आज जहां कई शहरों में पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के आसपास बिक रहा है, वहीं लगभग एक सदी पहले इसकी कीमत कुछ पैसों में थी। हालांकि उस दौर में लोगों की आमदनी भी बेहद कम हुआ करती थी।
मुंबई में हुई थी देश के पहले पेट्रोल पंप की शुरुआत
भारत का पहला पेट्रोल पंप वर्ष 1928 में मुंबई में खोला गया था। उस समय मुंबई को बॉम्बे कहा जाता था। यह पेट्रोल पंप ब्रिटिश तेल कंपनी बर्मा शेल ने शुरू किया था, जिसे बाद में भारत सरकार ने अधिग्रहित कर भारत पेट्रोलियम (BPCL) बनाया।
यह स्टेशन ह्यूजेस रोड पर स्थित था, जिसे आज एनी बेसेंट रोड, वर्ली के नाम से जाना जाता है। उस समय इसे “बर्मा शेल स्टेशन” कहा जाता था। विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल एक पेट्रोल पंप नहीं था, बल्कि भारत में आधुनिक ईंधन वितरण व्यवस्था की शुरुआत मानी जाती है।
जिस दौर में भारत का पहला पेट्रोल पंप शुरू हुआ था, उस समय देश में गाड़ियों की संख्या बेहद सीमित थी। आज भारत दुनिया के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल बाजारों में शामिल हो चुका है।
कैसे काम करता था पहला पेट्रोल पंप?
आज की तरह उस दौर में डिजिटल मशीनें या ऑटोमैटिक डिस्पेंसर नहीं होते थे। पहले पेट्रोल पंप पर केवल दो हाथ से चलने वाले डिस्पेंसर लगाए गए थे।
पेट्रोल भरने के लिए कर्मचारियों को हैंडपंप चलाना पड़ता था। पूरी प्रक्रिया पूरी तरह मैन्युअल थी। रिपोर्ट्स के अनुसार उस स्टेशन की स्टोरेज क्षमता लगभग 200 से 300 गैलन यानी करीब 900 से 1200 लीटर तक थी।
कहां से आता था पेट्रोल?
उस समय भारत में तेल रिफाइनरी मौजूद नहीं थीं। यही वजह थी कि पेट्रोल विदेशों से आयात किया जाता था।
रिपोर्ट्स के अनुसार पेट्रोल मुख्य रूप से:
- बर्मा (अब म्यांमार)
- ईरान
- पश्चिम एशिया
से जहाजों के जरिए भारत लाया जाता था। इसके बाद पेट्रोल को बड़े ड्रमों में भरकर ट्रकों और कई जगह बैलगाड़ियों के जरिए पेट्रोल पंप तक पहुंचाया जाता था।
उस दौर में 40-गैलन वाले लोहे के ड्रमों का इस्तेमाल आम था। हालांकि बारिश और नमी की वजह से इन ड्रमों में जंग लगने और रिसाव जैसी समस्याएं भी सामने आती थीं।
कितनी थी पेट्रोल की कीमत?
भारत के पहले पेट्रोल पंप पर पेट्रोल की कीमत: 1 आना से 2 आना प्रति लीटर बताई जाती है।
अगर पुराने भारतीय मुद्रा सिस्टम के हिसाब से देखें, तो:
- 1 आना लगभग 6 पैसे
- 2 आना लगभग 12 पैसे
के बराबर माना जाता था।
यानी उस दौर में: 1 रुपये में 16 लीटर से ज्यादा पेट्रोल खरीदा जा सकता था।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि उस समय आम आदमी की दैनिक आय 1 रुपये से भी कम होती थी। इसलिए उस दौर के हिसाब से पेट्रोल सस्ता नहीं बल्कि काफी महंगा माना जाता था।
कौन थे पहले ग्राहक?
भारत में शुरुआती दौर में गाड़ियां बेहद कम लोगों के पास होती थीं। यही वजह थी कि पहले पेट्रोल पंप के ग्राहक भी सीमित थे।
रिपोर्ट्स के अनुसार शुरुआती ग्राहकों में:
- अमीर पारसी परिवार
- गुजराती व्यापारी
- ब्रिटिश अधिकारी
- सरकारी अधिकारी
- राजा-महाराजा
- टैक्सी ड्राइवर
शामिल थे। मुंबई में टैक्सी सेवा के बढ़ने के साथ पेट्रोल की मांग भी धीरे-धीरे बढ़ने लगी।
बर्मा शेल कैसे बना भारत पेट्रोलियम?
बर्मा शेल एक ब्रिटिश तेल कंपनी थी, जिसने 1928 से 1976 तक भारत में काम किया। यह कंपनी मिट्टी का तेल, पेट्रोल और लुब्रिकेंट्स की सप्लाई करती थी।
बाद में भारत सरकार ने वर्ष 1976 में इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया। इसके बाद: Bharat Petroleum Corporation Limited (BPCL) का गठन हुआ।
आज BPCL भारत की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में शामिल है और देशभर में करीब 25 हजार पेट्रोल पंप संचालित करती है।
पहला पेट्रोल पंप शुरू करना आसान क्यों नहीं था?
विशेषज्ञों के अनुसार उस दौर में पेट्रोल पंप का कारोबार बेहद चुनौतीपूर्ण था।
उस समय:
- गाड़ियों की संख्या बहुत कम थी
- ईंधन की सप्लाई अनियमित थी
- भारत में रिफाइनरी नहीं थीं
- ट्रांसपोर्ट नेटवर्क सीमित था
यानी यह तय नहीं था कि यह कारोबार सफल होगा भी या नहीं। इसके बावजूद धीरे-धीरे ऑटोमोबाइल सेक्टर बढ़ा और पेट्रोल की मांग तेजी से बढ़ने लगी।
आज कितना बदल चुका है भारत का फ्यूल नेटवर्क?
आज भारत दुनिया के सबसे बड़े ईंधन बाजारों में शामिल हो चुका है।
देश में:
- 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंप
- आधुनिक रिफाइनरियां
- डिजिटल फ्यूल डिस्पेंसर
- ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम
- EV charging stations
तक मौजूद हैं।
यानी जिस देश में कभी हाथ से पेट्रोल भरा जाता था, वही आज दुनिया के सबसे बड़े energy markets में शामिल हो चुका है।
केवल पेट्रोल पंप की नहीं, बदलते भारत की भी कहानी
मुंबई में शुरू हुआ पहला पेट्रोल पंप केवल एक कारोबारी शुरुआत नहीं थी। यह भारत के औद्योगिक और ऑटोमोबाइल विकास की शुरुआती कहानी भी थी। करीब एक सदी पहले शुरू हुई यह यात्रा आज भारत को दुनिया के सबसे बड़े ईंधन उपभोक्ता देशों में शामिल कर चुकी है।
मुंबई में शुरू हुआ यह छोटा-सा पेट्रोल स्टेशन केवल ईंधन बेचने की जगह नहीं था, बल्कि यह भारत के आधुनिक ऑटोमोबाइल और ऊर्जा नेटवर्क की शुरुआती नींव भी माना जाता है।
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