देश में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की धीमी रफ्तार और देरी को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। इसी बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari ने एक बड़ा संकेत दिया है, जो आने वाले समय में हाईवे निर्माण की पूरी प्रक्रिया को बदल सकता है।
शुक्रवार (10 अप्रैल) को एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने साफ कहा कि अब राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं (National Highway Projects) की शुरुआत तभी होनी चाहिए जब 100 प्रतिशत जमीन अधिग्रहण पूरा हो जाए। यह बयान ऐसे समय आया है जब सरकार देशभर में तेजी से सड़क नेटवर्क को विस्तार देने पर काम कर रही है, लेकिन जमीन अधिग्रहण और क्लियरेंस में देरी बड़ी बाधा बनी हुई है।
क्यों जरूरी है 100% Land Acquisition?
📍𝑵𝒆𝒘 𝑫𝒆𝒍𝒉𝒊 | Addressing 17th CIDC Vishwakarma Awards & Exhibitions on Viksit Bharat 2047 https://t.co/Ktd73oCJPf
— Nitin Gadkari (@nitin_gadkari) April 10, 2026 Nitin Gadkari ने अपने संबोधन में कहा कि पहले सरकार ने 90% जमीन अधिग्रहण का नियम लागू किया था, लेकिन इसके बावजूद कई प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे नहीं हो पाए। वजह साफ है—बाकी बची जमीन पर विवाद, मुआवजा या कानूनी अड़चनें।
जब प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद जमीन अधिग्रहण अधूरा रहता है, तो:
- निर्माण बीच में रुक जाता है
- कॉन्ट्रैक्टर्स को नुकसान होता है
- लागत बढ़ जाती है
- प्रोजेक्ट की टाइमलाइन बिगड़ जाती है
इसी को ध्यान में रखते हुए अब 100% अधिग्रहण का प्रस्ताव सामने आया है, ताकि काम शुरू होने के बाद कोई रुकावट न आए।
पिछली नीतियों का असर और नई सोच
पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में कई बड़े बदलाव किए हैं। सड़क निर्माण की गति भी पहले के मुकाबले काफी बढ़ी है। लेकिन जमीन अधिग्रहण हमेशा सबसे बड़ा bottleneck रहा है।
गडकरी ने इस बात को स्वीकार किया कि:
- पहले क्लियरेंस और जमीन से जुड़े मामलों को हल्के में लिया गया
- प्रोजेक्ट शुरू करने की जल्दबाजी में जरूरी प्रक्रियाएं पूरी नहीं होती थीं
अब सरकार इस मॉडल को बदलना चाहती है—पहले पूरी तैयारी, फिर निर्माण।
Contractors और निवेशकों के लिए क्या मतलब?
यह फैसला केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर कॉन्ट्रैक्टर्स और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों पर पड़ेगा।
पॉजिटिव असर:
- प्रोजेक्ट में देरी कम होगी
- कॉस्ट ओवररन घटेगा
- कॉन्ट्रैक्टर्स को वित्तीय स्थिरता मिलेगी
संभावित चुनौती:
- प्रोजेक्ट शुरू होने में शुरुआती देरी हो सकती है
- जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया और सख्त होगी
लेकिन कुल मिलाकर यह कदम लंबे समय में सेक्टर के लिए फायदेमंद माना जा रहा है।
Viksit Bharat 2047 के लक्ष्य से जुड़ा फैसला
यह बयान 17वें CIDC Vishwakarma Awards के दौरान दिया गया, जो “Viksit Bharat 2047” विजन से जुड़ा हुआ है। सरकार का लक्ष्य है कि 2047 तक भारत को एक विकसित देश बनाया जाए, जिसमें मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर की अहम भूमिका होगी।
हाईवे नेटवर्क इस विजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है:
- लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम करने में मदद
- इंडस्ट्री और व्यापार को बढ़ावा
- ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी
ऐसे में प्रोजेक्ट्स का समय पर पूरा होना बेहद जरूरी है।
क्या बदल सकता है आगे?
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो भारत में हाईवे प्रोजेक्ट्स का पूरा ढांचा बदल सकता है:
- “Start fast, fix later” मॉडल खत्म होगा
- “Plan fully, then execute” मॉडल लागू होगा
- प्रोजेक्ट मैनेजमेंट ज्यादा प्रोफेशनल बनेगा
यह बदलाव भारत को इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में वैश्विक स्तर पर और मजबूत बना सकता है।
निष्कर्ष
Nitin Gadkari का यह बयान सिर्फ एक सुझाव नहीं, बल्कि एक संभावित नीति बदलाव का संकेत है। अगर 100% जमीन अधिग्रहण का नियम लागू होता है, तो इससे हाईवे प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता, गति और विश्वसनीयता तीनों में सुधार देखने को मिल सकता है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस प्रस्ताव को कब और कैसे लागू करती है, लेकिन इतना तय है कि इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में एक बड़ा बदलाव आने वाला है।
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