Comptroller and Auditor General of India (CAG) की 2023–24 की ताजा रिपोर्ट में Jammu and Kashmir की वित्तीय स्थिति को लेकर गंभीर खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार विकास कार्यों और एसेट निर्माण के लिए आवंटित बड़ी राशि खर्च ही नहीं की गई, जिससे जनता को मिलने वाले लाभ प्रभावित हुए।
सबसे बड़ी बात: हजारों करोड़ रुपये खर्च ही नहीं हुए
CAG रिपोर्ट के मुताबिक:
- 31 ग्रांट्स के तहत 160 योजनाओं के लिए ₹10,597.90 करोड़ का पूरा बजट उपयोग नहीं हुआ
- इससे विकास कार्यों में सीधा असर पड़ा और योजनाओं का लाभ लोगों तक नहीं पहुंच सका
यह स्थिति सरकार की योजना और क्रियान्वयन दोनों पर सवाल खड़े करती है।
बिना बजट के भी खर्च
रिपोर्ट में एक और गंभीर अनियमितता सामने आई:
- ₹5,214.45 करोड़ 35 योजनाओं में बिना बजट प्रावधान के खर्च किए गए
- यह वित्तीय नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है
मार्च में अचानक खर्च बढ़ा
CAG ने “rush of expenditure” की ओर भी इशारा किया:
- कुल खर्च का 50% से ज्यादा हिस्सा मार्च 2024 में किया गया
- 10 ग्रांट्स के 11 प्रमुख हेड्स में यह ट्रेंड देखा गया
इससे यह संकेत मिलता है कि पूरे साल खर्च नहीं हुआ और अंत में जल्दबाजी में पैसे खर्च किए गए।
₹34,000 करोड़ से ज्यादा राशि surrender नहीं की गई
वित्तीय नियमों के अनुसार, बची हुई राशि को सरकार को वापस (surrender) करना होता है।
लेकिन:
- ₹34,917.96 करोड़ की बचत surrender नहीं की गई
- यह कुल बजट का लगभग 33% है
यह बजट प्रबंधन की गंभीर कमजोरी को दिखाता है।
कुल खर्च भी कम रहा
- कुल बजट प्रावधान: ₹1,57,212.90 करोड़
- वास्तविक खर्च: ₹1,26,054.97 करोड़ (लगभग 80%)
यानी करीब 20% बजट खर्च ही नहीं हुआ।
किन विभागों में सबसे ज्यादा फंड unused रहा?
रिपोर्ट के अनुसार कई अहम विभागों में आधे से ज्यादा बजट खर्च नहीं हुआ:
- Tribal Affairs – 80% तक राशि unused
- Public Health Engineering – 70%
- Industries & Commerce – 68%
- Planning – 67%
- Irrigation & Flood Control – 64%
- Agriculture, Horticulture, Fisheries जैसे विभाग भी प्रभावित
यह सीधे तौर पर विकास कार्यों की धीमी रफ्तार को दिखाता है।
Excess expenditure भी चिंता का विषय
CAG ने यह भी बताया:
- 2019–2024 के बीच ₹19,610.17 करोड़ अतिरिक्त खर्च हुआ
- 2023–24 में ही ₹3,760.84 करोड़ का excess expenditure
यह खर्च बिना उचित मंजूरी के किया गया, जिसे बाद में regularise करना होगा।
Supplementary Budget में भी गड़बड़ी
रिपोर्ट में पाया गया:
- ₹588.69 करोड़ की supplementary राशि की जरूरत ही नहीं थी
- वहीं ₹5,348.98 करोड़ पर्याप्त नहीं रही, जिससे excess expenditure हुआ
यह planning की कमी को दर्शाता है।
सरकार का जवाब
Finance Department ने कहा:
- Centrally sponsored schemes से अपेक्षित फंड नहीं मिला
- capital expenditure कम रहा
हालांकि, विभाग ने सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया है।
CAG की सिफारिशें
Comptroller and Auditor General of India ने सरकार को सलाह दी:
- realistic budgeting किया जाए
- financial monitoring मजबूत हो
- excess expenditure को नियमित किया जाए
- अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए
निष्कर्ष
CAG की रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि Jammu and Kashmir में वित्तीय प्रबंधन और योजना क्रियान्वयन में गंभीर खामियां हैं। जहां एक ओर विकास के लिए पैसा खर्च नहीं हो पाया, वहीं दूसरी ओर बिना योजना के खर्च भी हुआ।
अगर समय रहते सुधार नहीं किए गए, तो इसका असर सीधे जनता और विकास कार्यों पर पड़ता रहेगा।
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