अमित शाह ने असम में कहा कि BJP स्वदेशी मुसलमानों के खिलाफ नहीं है। कांग्रेस पर अवैध घुसपैठ बढ़ाने और विकास न करने का आरोप लगाया।
गुवाहाटी/कालीआबोर: केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने असम में चुनावी रैली के दौरान बड़ा बयान देते हुए साफ किया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) राज्य के स्वदेशी मुसलमानों के खिलाफ नहीं है, बल्कि उसका विरोध केवल अवैध घुसपैठियों (infiltrators) से है।
उन्होंने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उसके शासनकाल में असम में अवैध प्रवास (illegal immigration) को बढ़ावा मिला, जिससे राज्य की जनसांख्यिकी और पर्यावरण दोनों पर असर पड़ा।
“BJP का विरोध घुसपैठियों से, मुसलमानों से नहीं”
Amit Shah ने अपने भाषण में स्पष्ट किया कि पार्टी का रुख पूरी तरह साफ है।
उन्होंने कहा:
“हम असम के स्वदेशी मुसलमानों के खिलाफ नहीं हैं। हमारा विरोध सिर्फ उन लोगों से है, जो अवैध तरीके से देश में घुसपैठ करते हैं।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्षी दल BJP पर धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण (polarisation) का आरोप लगा रहे हैं।
कांग्रेस पर घुसपैठ को बढ़ावा देने का आरोप
गृह मंत्री ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि उसके शासनकाल में अवैध घुसपैठ को नजरअंदाज किया गया और कई जगहों पर घुसपैठियों को बसाया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब वर्तमान सरकार इन अतिक्रमणों को हटाती है, तो कांग्रेस इसे धार्मिक रंग देने की कोशिश करती है।
“कांग्रेस पहले घुसपैठियों को बसाती है और जब उन्हें हटाया जाता है, तो इसे हिंदू-मुस्लिम मुद्दा बनाती है,” उन्होंने कहा।
काजीरंगा नेशनल पार्क का मुद्दा
Kaziranga National Park को लेकर भी अमित शाह ने कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान पार्क की जमीन पर घुसपैठियों ने अतिक्रमण कर लिया था, जिससे वन्यजीवों, खासकर एक-सींग वाले गैंडे (one-horned rhinoceros) को खतरा पैदा हो गया था।
शाह के मुताबिक, NDA सरकार ने अतिक्रमण हटाकर काजीरंगा को फिर से वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित किया।
BJP-AGP गठबंधन पर बयान
Bharatiya Janata Party और Asom Gana Parishad के गठबंधन को लेकर भी शाह ने बड़ा बयान दिया।
उन्होंने इसे “सूरज और चांद” जैसा मजबूत बताया और कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें यह सोच छोड़ देनी चाहिए कि यह गठबंधन टूट जाएगा।
विकास के मुद्दे पर कांग्रेस पर हमला
अमित शाह ने असम में विकास को लेकर भी कांग्रेस को घेरा।
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के 15 साल के शासन में राज्य के विकास के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
शाह ने आंकड़ों के जरिए तुलना करते हुए कहा:
- कांग्रेस सरकार (10 साल): ₹1.28 लाख करोड़
- Narendra Modi सरकार (2014–2024): ₹9.78 लाख करोड़
उन्होंने बताया कि इस फंड का उपयोग इंफ्रास्ट्रक्चर, हाईवे, रेलवे, एयरपोर्ट, मेडिकल कॉलेज और इंजीनियरिंग कॉलेज बनाने में किया गया।
सेमीकंडक्टर प्लांट और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास
शाह ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने असम के Jagiroad में ₹27,000 करोड़ की लागत से सेमीकंडक्टर चिप निर्माण इकाई स्थापित करने की पहल की है।
इसके अलावा, उन्होंने कहा कि राज्य में सड़कों, जलमार्गों और स्वास्थ्य सुविधाओं को तेजी से विकसित किया गया है, जिससे रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला है।
असम की विरासत को बढ़ावा देने का दावा
गृह मंत्री ने कहा कि BJP सरकार ने असम की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने के लिए कई कदम उठाए हैं।
उन्होंने बताया कि:
- असम आंदोलन के शहीदों के लिए स्मारक बनाया गया
- महान योद्धा Lachit Borphukan की 80 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई
- उनकी वीरता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई गई
भारत रत्न को लेकर कांग्रेस पर निशाना
अमित शाह ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने असम के महान नेताओं को उचित सम्मान नहीं दिया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने:
- Gopinath Bordoloi
- Bhupen Hazarika
जैसे महान व्यक्तित्वों को भारत रत्न देने में देरी की, जबकि BJP सरकार ने उन्हें सम्मानित किया।
चुनावी रणनीति और राजनीतिक संदेश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमित शाह का यह बयान असम विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए दिया गया है।
इसमें दो प्रमुख संदेश साफ नजर आते हैं:
- BJP खुद को विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर केंद्रित पार्टी के रूप में पेश करना चाहती है
- विपक्ष के ध्रुवीकरण के आरोपों का जवाब देना
निष्कर्ष
Amit Shah का यह बयान असम की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत देता है।
उन्होंने साफ किया कि BJP का विरोध किसी धर्म विशेष से नहीं, बल्कि अवैध घुसपैठ से है। साथ ही, उन्होंने विकास, विरासत संरक्षण और इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए अपनी सरकार की उपलब्धियों को भी सामने रखा।
आने वाले चुनावों में यह मुद्दा अहम भूमिका निभा सकता है, जहां विकास, पहचान और सुरक्षा जैसे मुद्दे केंद्र में रहेंगे।
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