एलपीजी सिलेंडर की बढ़ती कीमतों पर विपक्ष ने मोदी सरकार को घेरा। जानें घरेलू LPG और कमर्शियल सिलेंडर के दाम, जनता की प्रतिक्रिया और राजनीतिक बहस।
हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि किए जाने के बाद से देश में महंगाई और आर्थिक बोझ को लेकर बहस तेज हो गई है। विपक्ष ने इस कदम को सीधे आम जनता पर महंगाई का ‘चाबूक’ मारने जैसा बताया है और केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री पर निशाना साधा है।
🔥 एलपीजी कीमतें कितनी बढ़ी?
7 मार्च 2026 से लागू हुई नई कीमतों के मुताबिक:
- घरेलू 14.2 किलो सिलेंडर के दाम में लगभग ₹60 की वृद्धि हुई है।
- 19 किलो वाणिज्यिक सिलेंडर के दाम में ₹115 से अधिक की बढ़ोतरी की गई है।
इन संशोधित रेट से पहले भी पिछले तीन महीनों में कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में ₹307 तक का उछाल देखा गया है।
📌 विपक्ष का आरोप: “महंगाई का चाबूक जनता पर”
एलपीजी कीमतों में वृद्धि के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार पर कड़ी आलोचना की है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “Inflation Man” कहकर आरोप लगाया कि उन्होंने सीधे आम घरों के बजट पर दबाव बढ़ाया है। पार्टी के पोस्ट में कहा गया कि यह बढ़ोतरी गरीब और मध्यम वर्ग के लिए अतिरिक्त बोझ है।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने पेट्रोलियम मंत्री के दावों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिस समय सरकार ने ईंधन की उपलब्धता और किफ़ायती कीमतों की बात कही थी, उसी के तुरंत बाद एलपीजी की कीमतें बढ़ा दी गईं।
💬 Mamata Banerjee का विरोध
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी LPG कीमतों में बढ़ोतरी पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे आम परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी पर असर पड़ेगा। उन्होंने इस कदम को आलोचना का विषय बताया और कहा कि इससे भोजन और घरेलू खर्चों में और वृद्धि हो सकती है।
📈 महंगाई और वैश्विक ऊर्जा दबाव
केंद्रीय अधिकारियों का कहना है कि यह कीमत वृद्धि वैश्विक ऊर्जा बाजार में दबाव और पश्चिम एशिया तनाव से जुड़ी है। वैश्विक ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि और सप्लाई चेन पर दबाव का असर घरेलू ऊर्जा उत्पादों की कीमत पर भी पड़ रहा है। सरकार का यह भी दावा है कि भारत के पास पर्याप्त ईंधन भंडार और सप्लाई नियमित रूप से काम कर रहा है।
🤔 जनता का चिंतित रुख
सोशल मीडिया और स्थानीय बाजारों में LPG की कीमतों को लेकर गहन चर्चा और प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई उपयोगकर्ता यह भी सवाल उठा रहे हैं कि महीने के खर्चों में पहले से ही महंगाई के दबाव के बीच यह बढ़ोतरी उन्हें कैसे प्रभावित करेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की अभाव और वैश्विक तनाव की वजह से ऊर्जा उत्पादों के दाम में उछाल आना कोई असामान्य बात नहीं है, लेकिन घरेलू स्तर पर इसका असर सीधे घरों के बजट पर पड़ता है।
🧠 निष्कर्ष
एलपीजी सिलेंडर के दामों में हाल की बढ़ोतरी ने महंगाई और खर्च की चिंता को बढ़ा दिया है, खासकर उन घरों के लिए जो पहले से ही बढ़ते खर्च का सामना कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि यह निर्णय आम लोगों के बजट पर बोझ डालता है और इसके खिलाफ राजनीतिक आलोचना तेज हो रही है।
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Author: Namam Sharma
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Namam Sharma NewsJagran में बिज़नेस और फाइनेंस खबरों को कवर करते हैं।
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