1 November Rules Change: नवंबर महीने की शुरुआत के साथ ही देशभर में कई वित्तीय और गैर-वित्तीय नियमों में बदलाव लागू हो गए हैं। इनका सीधा असर कारोबारियों, पेंशनभोगियों, क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वालों और म्यूचुअल फंड निवेशकों पर पड़ने वाला है। नए नियमों के तहत जीएसटी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आसान होगी, पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के क्रेडिट कार्ड से यूटिलिटी बिल भुगतान महंगा हो सकता है और कॉल करने वाले का नाम मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई देगा। इसके अलावा जीवन प्रमाण पत्र जमा करने, म्यूचुअल फंड के डायरेक्ट प्लान और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड से जुड़े नियमों में भी बदलाव हुआ है। वहीं, कैंसर की 137 दवाओं की कीमतों में कमी का फैसला 9 नवंबर से लागू होगा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नवंबर का महीना शुरू होते ही आम आदमी की जेब और रोजमर्रा की वित्तीय गतिविधियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण बदलाव लागू हो गए हैं। हर महीने की पहली तारीख को बैंकिंग, टैक्स, सरकारी योजनाओं और अन्य सेवाओं से जुड़े नियमों में बदलाव देखने को मिलता है। इस बार भी 1 नवंबर 2026 से सात बड़े बदलाव चर्चा में हैं।
इनमें जीएसटी पंजीकरण की प्रक्रिया में राहत, मोबाइल पर कॉल करने वाले की पहचान दिखाने वाली सेवा, पेंशनभोगियों के लिए वार्षिक जीवन प्रमाण पत्र और पीएनबी क्रेडिट कार्ड से बिल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क जैसे बदलाव शामिल हैं। इसके अलावा म्यूचुअल फंड निवेशकों को डायरेक्ट प्लान का विकल्प डिफॉल्ट रूप से मिलेगा।
आइए विस्तार से समझते हैं कि इन सात बदलावों का आम लोगों और कारोबारियों पर क्या असर पड़ेगा और कहां राहत मिलने वाली है।
1. जीएसटी रजिस्ट्रेशन के नियमों में बदलाव
वस्तु एवं सेवा कर (GST) से जुड़े नियमों में 1 नवंबर से कई महत्वपूर्ण बदलाव लागू किए गए हैं। नए प्रावधानों के तहत कारोबारियों को को-वर्किंग स्पेस यानी साझा कार्यालय के पते पर भी जीएसटी पंजीकरण कराने की सुविधा मिलेगी।
इसके लिए कारोबारी को संबंधित को-वर्किंग स्पेस की सदस्यता से जुड़े दस्तावेज अपलोड करने होंगे। इन दस्तावेजों में कार्यालय का पता स्पष्ट रूप से दर्ज होना जरूरी होगा। इसके साथ ही बिजली बिल, हाउस टैक्स या अन्य वैध दस्तावेजों के माध्यम से पते का प्रमाण देना पड़ सकता है।
आधार आधारित सत्यापन के जरिए पंजीकरण कराने वाले आवेदकों को सामान्य परिस्थितियों में अधिकारी की ओर से भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया से राहत मिलेगी। हालांकि, किसी तरह की जालसाजी, संदिग्ध गतिविधि या गंभीर गड़बड़ी का संदेह होने पर अधिकारी पते की जांच कर सकेंगे।
इसके अलावा जीएसटी अपील से जुड़े शुल्क, करदाताओं को भेजे जाने वाले नोटिस में स्पष्ट कारण बताने और रिफंड प्रक्रिया को आसान बनाने से संबंधित बदलाव भी लागू किए गए हैं। इससे छोटे कारोबारियों और स्टार्टअप्स को कारोबार शुरू करने तथा जीएसटी अनुपालन में सहूलियत मिलने की उम्मीद है।
2. अब फोन पर दिखाई देगा कॉल करने वाले का नाम
मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वालों के लिए 1 नवंबर से एक अहम सुविधा शुरू हो रही है। दूरसंचार कंपनियों की ओर से कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन (CNAP) सेवा लागू की जा रही है।
इस सुविधा के तहत जब किसी व्यक्ति के मोबाइल पर अनजान नंबर से कॉल आएगी, तो स्क्रीन पर कॉल करने वाले का नाम भी दिखाई देगा। इसके लिए जरूरी नहीं होगा कि सामने वाले व्यक्ति का नंबर आपके फोन में पहले से सेव हो।
फिलहाल यह सुविधा 4G और 5G कनेक्शन वाले मोबाइल फोन पर उपलब्ध कराए जाने की व्यवस्था है। बाद में इसे 2G और 3G नेटवर्क इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों तक भी पहुंचाया जा सकता है।
इस सेवा का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि मोबाइल यूजर्स को अनजान कॉल की पहचान करने में मदद मिलेगी। इससे फर्जी कॉल, स्पैम कॉल और धोखाधड़ी की घटनाओं पर अंकुश लगाने में भी सहायता मिल सकती है।
हालांकि, स्क्रीन पर दिखाई देने वाला नाम वही होगा, जो संबंधित व्यक्ति ने टेलीकॉम कनेक्शन लेते समय दर्ज कराया है।
3. पेंशनभोगियों को जमा करना होगा जीवन प्रमाण पत्र
सरकारी पेंशन प्राप्त करने वाले बुजुर्गों के लिए नवंबर का महीना बेहद महत्वपूर्ण है। 80 वर्ष से कम आयु के पेंशनभोगियों को 1 नवंबर से 30 नवंबर के बीच अपना वार्षिक जीवन प्रमाण पत्र (Life Certificate) जमा करना होगा।
वहीं, 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के सुपर सीनियर पेंशनभोगियों के लिए यह प्रक्रिया 1 अक्टूबर से ही शुरू हो चुकी है।
जीवन प्रमाण पत्र जमा करना इसलिए जरूरी है, क्योंकि इसके माध्यम से पेंशन विभाग यह सुनिश्चित करता है कि संबंधित व्यक्ति जीवित है और उसे आगे भी पेंशन का भुगतान जारी रखा जा सकता है।
पेंशनभोगियों के पास प्रमाण पत्र जमा करने के लिए दो प्रमुख विकल्प हैं। वे अपनी पेंशन देने वाली बैंक शाखा में जाकर इसे भौतिक रूप से जमा कर सकते हैं। इसके अलावा डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट यानी जीवन प्रमाण सुविधा के माध्यम से आधार आधारित सत्यापन और फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक का इस्तेमाल करके घर बैठे भी प्रमाण पत्र जमा किया जा सकता है।
समय पर जीवन प्रमाण पत्र जमा नहीं करने पर पेंशन भुगतान में परेशानी हो सकती है। इसलिए पेंशनभोगियों को अंतिम तारीख का इंतजार नहीं करना चाहिए।
4. PNB क्रेडिट कार्ड से बिल भुगतान करना होगा महंगा
पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के क्रेडिट कार्ड धारकों के लिए नवंबर की शुरुआत अतिरिक्त खर्च लेकर आई है। बैंक ने 1 नवंबर से क्रेडिट कार्ड के जरिए 50,000 रुपये से अधिक के यूटिलिटी बिल भुगतान पर शुल्क लगाने का फैसला किया है।
नए नियम के अनुसार, 50,000 रुपये से अधिक के यूटिलिटी बिल भुगतान पर एक प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। हालांकि, यह शुल्क प्रति लेनदेन अधिकतम 2,000 रुपये तक सीमित रहेगा।
यूटिलिटी बिल में बिजली, पानी, टेलीफोन, इंटरनेट और गैस जैसी आवश्यक सेवाओं के भुगतान शामिल होते हैं।
पहले पीएनबी क्रेडिट कार्ड से इन बिलों का भुगतान करने पर इस तरह का अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाता था। लेकिन अब बड़ी रकम के बिल का भुगतान करने वाले ग्राहकों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।
इसका असर विशेष रूप से उन ग्राहकों पर पड़ेगा, जो क्रेडिट कार्ड के जरिए हर महीने बड़ी रकम के बिजली, इंटरनेट या अन्य घरेलू और व्यावसायिक बिलों का भुगतान करते हैं।
5. म्यूचुअल फंड में डायरेक्ट प्लान होगा डिफॉल्ट विकल्प
म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए भी 1 नवंबर से एक महत्वपूर्ण बदलाव लागू हुआ है। एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अब म्यूचुअल फंड का डायरेक्ट प्लान डिफॉल्ट विकल्प होगा।
इसका मतलब है कि जब कोई निवेशक एएमसी के डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से निवेश करेगा, तो उसे शुरुआत में डायरेक्ट प्लान का विकल्प दिखाई देगा।
डायरेक्ट प्लान में निवेशक सीधे म्यूचुअल फंड कंपनी के माध्यम से निवेश करते हैं। इसमें डिस्ट्रीब्यूटर या एजेंट का कमीशन शामिल नहीं होता, इसलिए इसका एक्सपेंस रेश्यो सामान्य तौर पर रेगुलर प्लान से कम रहता है।
दूसरी तरफ, रेगुलर प्लान में म्यूचुअल फंड वितरक या सलाहकार के माध्यम से निवेश किया जाता है। इसमें वितरण कमीशन के कारण खर्च अनुपात अधिक हो सकता है।
सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे के अनुसार, यदि कोई निवेशक रेगुलर प्लान चुनता है, तो उसे पहले इसके अधिक खर्च अनुपात के बारे में जानकारी दी जाएगी।
इस बदलाव का उद्देश्य निवेशकों को निवेश की लागत समझने और सोच-समझकर फैसला लेने में मदद करना है। हालांकि, डायरेक्ट प्लान चुनने से पहले निवेशकों को यह भी समझना चाहिए कि इसमें निवेश संबंधी सलाह और मार्गदर्शन की जिम्मेदारी स्वयं निवेशक की होती है।
6. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड निवेशकों को मिलेगा समय से पहले पैसा निकालने का मौका
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) में निवेश करने वालों के लिए नवंबर में महत्वपूर्ण अवसर मिलने वाला है। इस महीने भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी कुछ पुरानी सीरीज के निवेशकों को समय से पहले रिडेम्पशन यानी निवेश वापस लेने का मौका मिलेगा।
उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार, नवंबर में इन सीरीज के लिए प्रीमैच्योर रिडेम्पशन की तारीखें निर्धारित हैं:
| सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड सीरीज | रिडेम्पशन तारीख |
|---|---|
| 2020-21 सीरीज-7 | 2 नवंबर |
| 2020-21 सीरीज-8 | 18 नवंबर |
| 2020-21 सीरीज-2 | 19 नवंबर |
| 2021-22 सीरीज-1 | 25 नवंबर |
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश करने वाले निवेशकों को आमतौर पर आठ साल की अवधि पूरी होने पर मैच्योरिटी का विकल्प मिलता है। हालांकि, पांच साल पूरे होने के बाद निर्धारित ब्याज भुगतान की तारीखों पर समय से पहले निकासी की सुविधा भी उपलब्ध होती है।
इसमें निवेशकों को सोने की कीमत में होने वाले बदलाव का लाभ मिलता है। साथ ही, निर्धारित शर्तों के अनुसार सालाना ब्याज भी दिया जाता है।
निवेश वापस लेने से पहले निवेशकों को संबंधित सीरीज की पात्रता, रिडेम्पशन मूल्य और बैंक या आरबीआई की ओर से जारी निर्देशों की जांच करनी चाहिए।
7. कैंसर की 137 दवाओं के दाम होंगे कम
कैंसर के इलाज का खर्च उठा रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए नवंबर में राहत की खबर है। सरकार ने 137 गैर-अनुसूचित कैंसररोधी दवाओं पर व्यापार मार्जिन अधिकतम 30 प्रतिशत तय करने का फैसला किया है।
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) के इस फैसले का उद्देश्य कैंसर की महंगी दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करना और मरीजों को किफायती दरों पर उपचार उपलब्ध कराना है।
इस निर्णय के बाद मौजूदा मूल्य संरचना के आधार पर कुछ दवाओं की खुदरा कीमतों में 70 प्रतिशत तक कमी आने की उम्मीद जताई गई है।
नई कीमतें 9 नवंबर से लागू होने वाली हैं। मरीज और उनके परिजन एनपीपीए की आधिकारिक वेबसाइट तथा ‘फार्मा सही दाम’ मोबाइल एप के माध्यम से दवाओं की नई कीमतों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
यह बदलाव कैंसर के इलाज में होने वाले खर्च को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नवंबर में किसे राहत और किसकी बढ़ेगी जेब पर मार?
नवंबर की शुरुआत में लागू हुए इन बदलावों का असर अलग-अलग वर्गों पर अलग तरह से पड़ेगा।
कारोबारियों को जीएसटी पंजीकरण में राहत मिलने की उम्मीद है। मोबाइल यूजर्स को अनजान कॉल करने वालों की पहचान करने में मदद मिलेगी। पेंशनभोगियों के लिए जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की समयसीमा शुरू हो गई है।
वहीं, पीएनबी के क्रेडिट कार्ड से 50 हजार रुपये से अधिक के यूटिलिटी बिल का भुगतान करने वालों को अतिरिक्त शुल्क देना होगा। म्यूचुअल फंड निवेशकों को डायरेक्ट प्लान के खर्च का फायदा समझने का अवसर मिलेगा और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के पात्र निवेशकों को समय से पहले पैसा निकालने का मौका मिलेगा।
इसके अलावा 9 नवंबर से कैंसर की 137 दवाओं की कीमतों में संभावित कमी मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।
कुल मिलाकर, 1 नवंबर से लागू ये बदलाव कारोबार, बैंकिंग, निवेश, पेंशन और मोबाइल सेवाओं से जुड़े हैं। ऐसे में आम लोगों के लिए जरूरी है कि वे नए नियमों की जानकारी रखें और अपने भुगतान तथा वित्तीय योजनाओं को उसी के अनुसार व्यवस्थित करें।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध नियमों और घोषणाओं पर आधारित है। किसी भी वित्तीय या निवेश संबंधी निर्णय से पहले संबंधित बैंक, नियामक संस्था या आधिकारिक विभाग की नवीनतम अधिसूचना अवश्य जांचें।


