Silver vs Gold Prices: सोने और चांदी की कीमतों में हालिया गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। चांदी अपने रिकॉर्ड उच्चतम स्तर से करीब 50% नीचे आ चुकी है, जबकि सोने की कीमतों में शिखर से लगभग 25% की गिरावट दर्ज की गई है। यानी हालिया बिकवाली में चांदी पर सोने के मुकाबले दोगुना दबाव देखने को मिला है। हालांकि, लंबी अवधि के रिटर्न के आंकड़े बताते हैं कि पिछले पांच और दस वर्षों में चांदी ने सोने से बेहतर प्रदर्शन किया है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या चांदी की कीमतों में अभी और गिरावट देखने को मिलेगी या फिर मौजूदा स्तरों से रिकवरी शुरू हो सकती है? J.P. Morgan ने चांदी की औसत कीमत का अनुमान 84 डॉलर प्रति औंस से घटाकर 70 डॉलर प्रति औंस कर दिया है। वहीं, औद्योगिक मांग, सोलर सेक्टर की खपत और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां आने वाले समय में चांदी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
Silver vs Gold: रिकॉर्ड ऊंचाई से कितनी गिरीं कीमतें?
चांदी की कीमतों में इस साल की तेजी के बाद तेज गिरावट देखने को मिली है। 29 जनवरी को चांदी ने 121 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। इसके बाद कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आया और यह अपने शिखर से करीब 50% नीचे आ गई। दूसरी ओर, सोने की कीमतें भी अपने उच्चतम स्तर से लगभग 25% नीचे हैं।
चांदी में सोने के मुकाबले अधिक गिरावट की एक प्रमुख वजह इसका दोहरा स्वरूप है। चांदी का इस्तेमाल निवेश के लिए कीमती धातु के रूप में होता है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों और सोलर पैनल जैसे उद्योगों में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए निवेशकों की बिकवाली के साथ औद्योगिक मांग कमजोर होने की आशंका भी चांदी की कीमतों पर दबाव डाल सकती है।
हालांकि, केवल हालिया गिरावट के आधार पर दोनों धातुओं के दीर्घकालिक प्रदर्शन का आकलन करना सही नहीं होगा। अलग-अलग समयावधियों में इनके रिटर्न की तस्वीर अलग दिखाई देती है।
Silver vs Gold Returns: किसने दिया ज्यादा रिटर्न?
TradingView के 9 अक्टूबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, छोटी अवधि में सोने ने चांदी की तुलना में कम गिरावट दर्ज की है। वहीं, एक साल, पांच साल और दस साल की अवधि में चांदी का प्रदर्शन बेहतर रहा है।
| अवधि | चांदी का रिटर्न | सोने का रिटर्न | बेहतर प्रदर्शन |
|---|---|---|---|
| 1 महीना | -8.14% | -3.83% | सोना |
| 6 महीने | -20.14% | -12.19% | सोना |
| इस साल अब तक | -16.53% | -3.14% | सोना |
| 1 साल | 23.80% | 3.81% | चांदी |
| 5 साल | 167.71% | 138.77% | चांदी |
| 10 साल | 249.72% | 233.98% | चांदी |
सोर्स: TradingView, 9 अक्टूबर तक के आंकड़े।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि चांदी में तेजी के दौरान अधिक रिटर्न मिलने की संभावना के साथ जोखिम भी अधिक रहता है। छोटी अवधि में इसकी कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है, जबकि लंबी अवधि में इसका प्रदर्शन औद्योगिक मांग और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
चांदी की कीमतों में सोने से ज्यादा गिरावट क्यों आई?
चांदी की कीमतों में सोने की तुलना में अधिक उतार-चढ़ाव के पीछे कई कारण हैं। पहला कारण इसकी औद्योगिक मांग है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन और अन्य तकनीकी उपकरणों में चांदी का इस्तेमाल होता है। अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ती है या इन क्षेत्रों में उत्पादन घटता है, तो चांदी की मांग प्रभावित हो सकती है।
दूसरा कारण निवेशकों की मुनाफावसूली है। जब किसी एसेट में तेजी से कीमतें बढ़ती हैं, तो निवेशक मुनाफा निकालने के लिए बिकवाली कर सकते हैं। यदि इसके साथ मार्जिन की जरूरतें बढ़ जाती हैं, तो कुछ निवेशकों को अपनी पोजीशन कम करनी पड़ सकती है। इससे कीमतों में गिरावट और तेज हो सकती है।
Augmont की चीफ रिसर्च ऑफिसर डॉ. रेनीशा चैनानी के मुताबिक, चांदी में पहले आई तेज तेजी के बाद निवेशकों की बिकवाली और मार्जिन बढ़ने से गिरावट को गति मिली। सोलर सेक्टर में चांदी की खपत कम होने की आशंका भी बाजार के लिए चिंता का विषय है।
सोने को केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से मिलता है सहारा
सोने और चांदी के प्रदर्शन में अंतर की एक बड़ी वजह केंद्रीय बैंकों की मांग भी है। दुनिया के कई केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने और रिजर्व को मजबूत करने के लिए सोना खरीदते हैं। पिछले तीन वर्षों में केंद्रीय बैंकों की सालाना सोने की खरीद औसतन 1,000 टन से अधिक रही है।
इस तरह की संस्थागत मांग सोने के बाजार को अतिरिक्त समर्थन दे सकती है। इसके मुकाबले चांदी को केंद्रीय बैंकों की ओर से वैसा नियमित खरीदारी समर्थन नहीं मिलता है।
इसके अलावा, चांदी का बाजार सोने की तुलना में छोटा है। ऐसे में बड़े निवेशकों की बिकवाली या मांग में अचानक बदलाव का असर इसकी कीमतों पर अधिक दिखाई दे सकता है। यही वजह है कि तेजी के दौर में चांदी तेजी से ऊपर जा सकती है और गिरावट के समय उतनी ही तेजी से नीचे भी आ सकती है।
J.P. Morgan ने चांदी की कीमत का अनुमान घटाया
चांदी के आउटलुक को लेकर निवेशकों की नजर अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्मों के अनुमानों पर भी है। J.P. Morgan ने चांदी की औसत कीमत का अनुमान 84 डॉलर प्रति औंस से घटाकर 70 डॉलर प्रति औंस कर दिया है। इस बदलाव के पीछे औद्योगिक मांग और खासकर सोलर सेक्टर से जुड़ी चिंताएं महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
Silver Institute के अनुमान के मुताबिक, 2026 में इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर से चांदी की मांग में करीब 10% गिरावट आ सकती है। यदि यह कमजोरी लंबे समय तक बनी रहती है, तो चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि, ब्रोकरेज का औसत कीमत अनुमान किसी निश्चित तारीख पर चांदी के भाव की गारंटी नहीं होता। वास्तविक कीमतें वैश्विक मांग, आपूर्ति, डॉलर की चाल, ब्याज दरों और निवेशकों की गतिविधियों के आधार पर अनुमान से अलग भी रह सकती हैं।
क्या चांदी में अभी और गिरावट आएगी?
आने वाले समय में चांदी की दिशा कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करेगी। यदि महंगाई ऊंची बनी रहती है, बॉन्ड यील्ड में मजबूती आती है और औद्योगिक मांग कमजोर पड़ती है, तो चांदी की कीमतों में दबाव जारी रह सकता है। खासकर सोलर और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर से आने वाले मांग संबंधी आंकड़े बाजार के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
दूसरी ओर, यदि औद्योगिक गतिविधियों में सुधार होता है, निवेशकों की खरीदारी लौटती है और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच कीमती धातुओं की मांग बढ़ती है, तो चांदी में रिकवरी देखने को मिल सकती है। हालांकि, तेज गिरावट के बाद केवल कीमतों का नीचे आना इस बात का संकेत नहीं है कि बाजार का निचला स्तर बन चुका है।
निवेशकों को चांदी की कीमतों के साथ सोने-चांदी के अनुपात, डॉलर की चाल, बॉन्ड यील्ड और औद्योगिक मांग के आंकड़ों पर भी नजर रखनी चाहिए। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपनी जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और पोर्टफोलियो में कीमती धातुओं की हिस्सेदारी का आकलन करना जरूरी है।
निवेशकों के लिए क्या है मतलब?
सोने और चांदी की तुलना से स्पष्ट है कि दोनों धातुओं की कीमतों पर असर डालने वाले कारक काफी हद तक अलग हैं। सोने को केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और निवेश मांग से समर्थन मिल सकता है, जबकि चांदी की कीमतें औद्योगिक मांग और निवेश गतिविधियों दोनों से प्रभावित होती हैं।
लंबी अवधि में चांदी ने बेहतर रिटर्न दिया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भविष्य में भी इसका प्रदर्शन सोने से बेहतर ही रहेगा। चांदी में अधिक उतार-चढ़ाव होने के कारण निवेशकों को जोखिम को समझकर ही फैसला लेना चाहिए। मौजूदा परिस्थितियों में औद्योगिक मांग और वैश्विक आर्थिक संकेतकों में बदलाव चांदी की अगली चाल के लिए अहम रहेंगे।
डिस्क्लेमर: NewsJagran पर प्रकाशित यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें दिए गए विशेषज्ञों और ब्रोकरेज फर्मों के अनुमान उनके अपने विचार हैं। यह निवेश की सलाह नहीं है। सोने या चांदी में निवेश करने से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें और अपनी जोखिम क्षमता का आकलन जरूर करें।


