Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में मंगलवार, 15 सितंबर को सोने की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली। सोना 1,000 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर 1,54,400 रुपये पर आ गया। इसके साथ ही सोने की कीमत करीब एक महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई है। दूसरी ओर, चांदी की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ और यह 2,34,600 रुपये प्रति किलोग्राम पर बनी रही।
घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर कमजोर अंतरराष्ट्रीय संकेतों का असर देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड की कीमतों में नरमी आई। डॉलर के मजबूत होने और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने भी सोने पर दबाव बढ़ाया है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने महंगाई और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बाजार की चिंताओं को बढ़ाया है।
एक महीने के निचले स्तर पर पहुंचा सोना
दिल्ली सर्राफा बाजार में 15 सितंबर को सोना 1,000 रुपये की गिरावट के साथ 1,54,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। पिछले कुछ सत्रों से सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा था, लेकिन मंगलवार को गिरावट कुछ ज्यादा रही।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, सोने में गिरावट की प्रमुख वजह कमजोर विदेशी संकेत रहे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड एक समय 4,300 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे चला गया था। विदेशी बाजार में आई इस कमजोरी का असर भारतीय बाजार में भी देखने को मिला।
चांदी की कीमत में कोई बदलाव नहीं
सोने के उलट चांदी की कीमतों में मंगलवार को कोई बदलाव नहीं हुआ। दिल्ली में चांदी 2,34,600 रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी में हल्की तेजी देखने को मिली। इससे पता चलता है कि मंगलवार के कारोबार में सोने और चांदी की चाल एक जैसी नहीं रही। सोने पर डॉलर और बॉन्ड यील्ड की मजबूती का ज्यादा दबाव दिखाई दिया, जबकि चांदी को कुछ हद तक औद्योगिक मांग से भी समर्थन मिलता है।
क्रूड ऑयल की तेजी ने बढ़ाया सोने पर दबाव
सोने की कीमतों में कमजोरी के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी एक महत्वपूर्ण वजह मानी जा रही है। क्रूड ऑयल महंगा होने से अमेरिका में महंगाई बढ़ने की आशंका बढ़ती है। बाजार में यह चिंता पैदा होती है कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर रखना पड़ सकता है।
इसी आशंका के चलते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी देखने को मिली है। बॉन्ड यील्ड और डॉलर में मजबूती आमतौर पर सोने के लिए नकारात्मक मानी जाती है। सोना किसी तरह का ब्याज नहीं देता, इसलिए जब बॉन्ड जैसे एसेट पर बेहतर यील्ड मिलने लगती है तो निवेशकों की दिलचस्पी सोने में कुछ कम हो सकती है।
डॉलर मजबूत होने से भी सोने पर दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत डॉलर में तय होती है। ऐसे में जब अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है तो दूसरी करेंसी रखने वाले निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है। इससे सोने की मांग पर दबाव पड़ सकता है और कीमतों में कमजोरी देखने को मिल सकती है।
मंगलवार को डॉलर में मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी दोनों ने सोने के लिए प्रतिकूल माहौल बनाया। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोरी के साथ घरेलू सर्राफा बाजार में भी सोना नीचे आया।
फेडरल रिजर्व के फैसले पर बाजार की नजर
इस समय सोने के बाजार के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है। फेडरल रिजर्व की बैठक 15 सितंबर से शुरू हुई है और इसके नतीजे 16 सितंबर को सामने आने हैं।
बाजार में ब्याज दरों को लेकर लगातार अनुमान लगाए जा रहे हैं। ब्याज दरों में किसी भी तरह का बदलाव या फेड चेयर की टिप्पणी आने वाले दिनों में डॉलर, बॉन्ड यील्ड और सोने की कीमतों की दिशा तय कर सकती है।
अगर अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाता है या भविष्य में दरों को ऊंचा रखने का संकेत देता है, तो सोने पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, अगर फेड की टिप्पणी बाजार की उम्मीद से नरम रहती है, तो सोने को राहत मिल सकती है।
ब्याज दर और सोने का क्या है कनेक्शन?
सोने और ब्याज दरों के बीच सीधा संबंध नहीं है, लेकिन ब्याज दरों का माहौल सोने की मांग को प्रभावित करता है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं या बाजार को आगे भी ऊंची दरों की उम्मीद होती है, तो बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाले निवेश विकल्प आकर्षक हो सकते हैं।
दूसरी ओर, जब ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ती है, तो बॉन्ड यील्ड पर दबाव आ सकता है और निवेशक सोने जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की तरफ रुख कर सकते हैं। यही कारण है कि फेडरल रिजर्व के फैसले और उसके आगे के संकेतों पर सोने के निवेशकों की नजर रहती है।
क्या आगे और गिर सकता है सोना?
फिलहाल सोने की कीमतों पर कई वैश्विक कारकों का असर है। इनमें कच्चे तेल की कीमत, डॉलर की चाल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति सबसे महत्वपूर्ण हैं।
अगर क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी बनी रहती है और इससे अमेरिकी महंगाई को लेकर चिंता बढ़ती है, तो बॉन्ड यील्ड और डॉलर को समर्थन मिल सकता है। ऐसी स्थिति सोने के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
हालांकि, सोने को वैश्विक अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश की मांग से समर्थन भी मिल सकता है। इसलिए आगे सोने की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव से इनकार नहीं किया जा सकता। निवेशकों को फेड के फैसले के साथ उसकी आगे की ब्याज दर नीति के संकेतों पर भी नजर रखनी चाहिए।
15 सितंबर को सोने-चांदी की कीमत
| धातु | दिल्ली में कीमत | दैनिक बदलाव |
|---|---|---|
| सोना | ₹1,54,400 प्रति 10 ग्राम | ₹1,000 की गिरावट |
| चांदी | ₹2,34,600 प्रति किलोग्राम | कोई बदलाव नहीं |
Source: HDFC Securities के बाजार अपडेट और उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित।
डिस्क्लेमर: सोने और चांदी की कीमतें लगातार बदलती रहती हैं। अलग-अलग शहरों, ज्वेलर्स और टैक्स/मेकिंग चार्ज के कारण वास्तविक खरीद कीमत अलग हो सकती है। निवेश करने से पहले कीमत और संबंधित शुल्क की जानकारी जरूर जांच लें।


