Jio Credit Funding: रिलायंस समूह से जुड़ी जियो क्रेडिट अपने लेंडिंग कारोबार को तेजी से विस्तार देने की तैयारी में है। कंपनी को अमेरिकी बैंकिंग दिग्गज Bank of America (BofA) से करीब ₹18,268 करोड़ की बड़ी पूंजी मिलने की उम्मीद है। यह निवेश नियामकीय मंजूरियां मिलने के बाद दिसंबर तक पूरा हो सकता है। सवाल यह है कि जियो क्रेडिट को इतनी बड़ी रकम की जरूरत क्यों पड़ी और इस फंड का इस्तेमाल कहां किया जाएगा?
एजेंसी, नई दिल्ली। भारत के वित्तीय क्षेत्र में जियो फाइनेंशियल सर्विसेज से जुड़ी जियो क्रेडिट के लिए एक बड़ा निवेश आने वाला है। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) जियो क्रेडिट में Bank of America करीब ₹18,268 करोड़ का निवेश करने की तैयारी में है। जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, नियामकीय मंजूरियां मिलने के बाद यह निवेश दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद है।
इस निवेश के बाद जियो क्रेडिट के कारोबार को बड़ा विस्तार देने की योजना है। कंपनी का मौजूदा एसेट अंडर मैनेजमेंट यानी AUM करीब ₹30,000 करोड़ है। नई पूंजी के दम पर इसमें कई गुना वृद्धि की गुंजाइश बन सकती है। कंपनी लंबे समय में अपने AUM को करीब ₹1.5 लाख करोड़ तक ले जाने की क्षमता देख रही है।
आखिर जियो क्रेडिट को इतनी बड़ी पूंजी की जरूरत क्यों पड़ी?
जियो क्रेडिट का कारोबार मुख्य रूप से कर्ज और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र से जुड़ा है। किसी भी लेंडिंग कारोबार के विस्तार के लिए पर्याप्त पूंजी की जरूरत होती है, क्योंकि कंपनी को नए ग्राहकों को ऋण देने, अलग-अलग वित्तीय उत्पादों का विस्तार करने और अपने लोन पोर्टफोलियो को बढ़ाने के लिए लगातार फंड की आवश्यकता होती है।
जियो फाइनेंशियल सर्विसेज ने भी वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। ऐसे में Bank of America से मिलने वाली बड़ी पूंजी कंपनी को अपने लेंडिंग कारोबार को अधिक तेजी से बढ़ाने में मदद कर सकती है।
यानी यह पैसा केवल मौजूदा कारोबार को चलाने के लिए नहीं है, बल्कि जियो क्रेडिट के अगले चरण के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण पूंजी के तौर पर देखा जा रहा है।
₹18,268 करोड़ के निवेश से क्या बदलेगा?
जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) हितेश सेठिया के मुताबिक, इस पूंजी निवेश के बाद जियो क्रेडिट अपने कारोबार की रणनीति और उत्पाद योजनाओं की दोबारा समीक्षा करेगी।
इसका मकसद कंपनी के AUM में तेजी से वृद्धि करना होगा। मौजूदा करीब ₹30,000 करोड़ के AUM की तुलना में कंपनी के पास इसे करीब पांच गुना तक बढ़ाने की संभावित गुंजाइश है।
हालांकि, कंपनी ने यह स्पष्ट किया है कि ₹1.5 लाख करोड़ का आंकड़ा किसी तय समय सीमा में हासिल करने का लक्ष्य नहीं है। इसे कंपनी की संभावित विकास क्षमता के तौर पर देखा जा रहा है।
₹1.5 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है AUM
हितेश सेठिया के अनुसार, जियो क्रेडिट के AUM के करीब ₹1.5 लाख करोड़ तक पहुंचने तक कंपनी को अतिरिक्त पूंजी की जरूरत नहीं होगी।
अगर कंपनी इस स्तर तक अपना AUM बढ़ाने में सफल रहती है, तो मौजूदा स्तर से यह करीब पांच गुना विस्तार होगा। इसका मतलब है कि Bank of America से आने वाली पूंजी जियो क्रेडिट के लिए लंबे समय के कारोबारी विस्तार का आधार बन सकती है।
यह निवेश ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वित्तीय सेवा क्षेत्र में डिजिटल लेंडिंग, कंज्यूमर क्रेडिट और अन्य कर्ज उत्पादों की मांग बढ़ रही है। जियो समूह पहले ही डिजिटल और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
Bank of America को मिलेगी करीब 50% हिस्सेदारी
इस सौदे की एक बड़ी खासियत यह है कि Bank of America का निवेश जियो क्रेडिट में करीब 50 प्रतिशत से कुछ कम हिस्सेदारी के लिए होगा। यानी अमेरिकी बैंक इस कारोबार में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक निवेशक के रूप में शामिल होगा।
हालांकि, सौदा पूरा होने से पहले कई नियामकीय मंजूरियां जरूरी हैं। इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) समेत संबंधित मंजूरियां हासिल करनी होंगी।
सभी जरूरी मंजूरियां मिलने के बाद निवेश दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद जताई गई है।
निवेश के बाद जियो क्रेडिट के बोर्ड में भी बदलाव
Bank of America के निवेश के बाद कंपनी के निदेशक मंडल की संरचना में भी बदलाव होगा। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत Bank of America को दो निदेशक पद मिलेंगे।
वहीं, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज को भी दो निदेशक पद मिलेंगे। इनमें जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के प्रबंध निदेशक एवं CEO का पद भी शामिल होगा।
इसके अलावा कंपनी के बोर्ड में चार स्वतंत्र निदेशक होंगे। इस तरह निवेश के बाद जियो क्रेडिट के बोर्ड में दोनों प्रमुख पक्षों की भागीदारी के साथ स्वतंत्र निदेशकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
कंपनी के लिए क्यों अहम है यह डील?
जियो क्रेडिट के लिए यह निवेश कई मायनों में अहम माना जा सकता है। सबसे पहले, इतनी बड़ी पूंजी से कंपनी के पास अपने लेंडिंग कारोबार को बढ़ाने के लिए मजबूत वित्तीय आधार उपलब्ध होगा।
दूसरा, Bank of America जैसा वैश्विक वित्तीय संस्थान रणनीतिक निवेशक के तौर पर जुड़ रहा है। इससे जियो क्रेडिट के कारोबार को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय क्षेत्र में भी एक मजबूत साझेदार का समर्थन मिलेगा।
तीसरा, कंपनी अपने मौजूदा AUM को काफी बड़े स्तर तक बढ़ाने की क्षमता हासिल कर सकती है। हालांकि, ₹1.5 लाख करोड़ का आंकड़ा अभी संभावित क्षमता है और इसे हासिल करने की कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई है।
सिर्फ पैसा नहीं, रणनीति में भी होगा बदलाव
इस सौदे को केवल पूंजी जुटाने की प्रक्रिया के रूप में देखना सही नहीं होगा। जियो क्रेडिट निवेश मिलने के बाद अपनी बिजनेस स्ट्रैटेजी और प्रोडक्ट प्लान की समीक्षा करेगी।
इसका मतलब है कि कंपनी यह तय कर सकती है कि नई पूंजी का सबसे प्रभावी इस्तेमाल किन कर्ज उत्पादों और ग्राहक वर्गों में किया जाए। कारोबार बढ़ाने के साथ जोखिम प्रबंधन, लोन की गुणवत्ता और पूंजी के बेहतर इस्तेमाल पर भी ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा।
जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के लिए भी यह सौदा इसलिए अहम है क्योंकि इससे उसके वित्तीय सेवा कारोबार को बड़े पैमाने पर विस्तार देने की क्षमता बढ़ सकती है।
क्या है पूरी तस्वीर?
कुल मिलाकर, Bank of America से मिलने वाली करीब ₹18,268 करोड़ की पूंजी जियो क्रेडिट के लिए बड़े विस्तार का रास्ता खोल सकती है। मौजूदा करीब ₹30,000 करोड़ के AUM को कई गुना बढ़ाकर ₹1.5 लाख करोड़ के स्तर तक ले जाने की संभावित क्षमता कंपनी ने बताई है।
हालांकि, इस निवेश को अंतिम रूप देने से पहले RBI और CCI सहित जरूरी नियामकीय मंजूरियां हासिल करनी होंगी। इसके बाद Bank of America और Jio Financial Services की बोर्ड में भागीदारी के साथ कंपनी की नई संरचना सामने आएगी।
इसलिए आने वाले समय में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि जियो क्रेडिट इस बड़ी पूंजी का इस्तेमाल किस तरह करती है और क्या वह अपने लेंडिंग कारोबार को अपेक्षित गति से बढ़ा पाती है।
Source: PTI की रिपोर्ट पर आधारित।


