Share Market Crash: हफ्ते के पहले कारोबारी दिन यानी सोमवार, 7 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर बिकवाली हावी नजर आई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर ग्लोबल मार्केट के साथ भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में Sensex करीब 354 अंक तक फिसल गया, जबकि Nifty 50 भी 23,800 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे पहुंच गया।
बाजार में गिरावट के पीछे सिर्फ भू-राजनीतिक तनाव ही जिम्मेदार नहीं है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, India VIX में बढ़ोतरी और IT-मेटल समेत कुछ प्रमुख सेक्टर्स में दबाव ने भी सेंटीमेंट कमजोर किया है।
सुबह 10:43 बजे के आसपास Sensex 330.92 अंक यानी 0.43% गिरकर 76,184.51 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 50 में 102.65 अंक यानी 0.43% की गिरावट थी और यह 23,795.05 पर पहुंच गया।
इंट्रा-डे कारोबार में सेंसेक्स 354 अंक तक टूटकर 76,161.43 के स्तर पर आ गया। वहीं निफ्टी ने भी 109.70 अंक की गिरावट के साथ 23,788 का निचला स्तर छुआ।
हालांकि, बाजार के सभी हिस्सों में एक जैसी कमजोरी नहीं है। ब्रॉडर मार्केट में मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। निफ्टी मिडकैप 100 दबाव में है, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में मजबूती देखने को मिल रही है।
Share Market Crash: बाजार में गिरावट की 5 बड़ी वजहें
1. US-Iran तनाव से कच्चे तेल में आया उबाल
भारतीय शेयर बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता इस समय कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क Brent Crude Futures उछलकर करीब 97 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।
तेल की कीमतों में तेजी भारत जैसे बड़े क्रूड आयातक देश के लिए चिंता बढ़ाती है। महंगा कच्चा तेल देश के इंपोर्ट बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर असर डाल सकता है। यही वजह है कि क्रूड में तेजी के साथ इक्विटी मार्केट के सेंटीमेंट पर दबाव देखने को मिला।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने की खबरों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान की ओर से अमेरिकी नौसेना के दो जहाजों पर बैलिस्टिक मिसाइल हमले और अमेरिका की ओर से ईरान के तीन टैंकरों पर हमले की खबरों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।
2. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों यानी FIIs की बिकवाली भी चिंता का बड़ा कारण बनी हुई है। विदेशी निवेशक पिछले दो कारोबारी सत्रों से नेट सेलर बने हुए हैं।
4 सितंबर को FIIs ने भारतीय शेयर बाजार में करीब ₹3,111.94 करोड़ की नेट बिकवाली की थी। इससे एक दिन पहले यानी 3 सितंबर को भी विदेशी निवेशकों ने करीब ₹2,345.87 करोड़ के शेयर बेचे थे।
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली बाजार में लिक्विडिटी और सेंटीमेंट दोनों पर असर डाल सकती है। खासकर ऐसे समय में जब ग्लोबल स्तर पर जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता बढ़ रही हो।
3. India VIX में तेज उछाल
बाजार में निवेशकों की घबराहट को मापने वाला India VIX भी सोमवार को तेजी के साथ कारोबार करता नजर आया।
सुबह के कारोबार में India VIX करीब 5.22% बढ़कर 11.24 के स्तर पर पहुंच गया। VIX में तेजी आमतौर पर बाजार में आने वाले समय में अधिक उतार-चढ़ाव की आशंका का संकेत देती है।
यानी निवेशक फिलहाल बाजार को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं और ग्लोबल घटनाक्रम पर उनकी नजर बनी हुई है। यही सतर्कता बिकवाली के रूप में बाजार में दिखाई दे रही है।
4. IT, Metal और PSU Bank शेयरों में दबाव
सोमवार की गिरावट में कई प्रमुख सेक्टर्स ने बाजार पर दबाव बनाया। खास तौर पर IT, Metal और PSU Banking Stocks में कमजोरी देखने को मिली।
कारोबार के दौरान Nifty IT करीब 2% कमजोर था। वहीं Nifty Metal में भी 1% से अधिक की गिरावट रही। दूसरी तरफ Nifty PSU Bank इंडेक्स भी करीब 1% टूट गया।
बाजार के प्रमुख सेक्टर्स में कमजोरी का सीधा असर बेंचमार्क इंडेक्स पर पड़ता है, क्योंकि इन कंपनियों का इंडेक्स में महत्वपूर्ण वजन है।
5. 23,800 का स्तर बना अहम सपोर्ट
निफ्टी के लिए इस समय 23,800 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस लेवल के आसपास बाजार में खरीदारी लौटती है या नहीं, इस पर निवेशकों की नजर रहेगी।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स के मुताबिक, निफ्टी अगर 23,800 के ऊपर टिकने में सफल रहता है तो इंडेक्स में दोबारा संभलने की कोशिश हो सकती है।
हालांकि, ऊपर की तरफ 24,150-24,215 का जोन एक मजबूत रेजिस्टेंस के रूप में काम कर सकता है। यानी निफ्टी को आगे बढ़ने के लिए इस क्षेत्र को पार करना महत्वपूर्ण होगा।
वहीं अगर निफ्टी 23,800 के सपोर्ट को बनाए रखने में नाकाम रहता है तो बाजार में और कमजोरी देखने को मिल सकती है। ऐसी स्थिति में 23,570 का स्तर अगला महत्वपूर्ण टारगेट हो सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
सोमवार की गिरावट से साफ है कि फिलहाल भारतीय शेयर बाजार पर घरेलू और वैश्विक दोनों तरह के संकेतों का असर है। एक तरफ अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतें चिंता बढ़ा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार को कमजोर कर रही है।
ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए Nifty के 23,800 सपोर्ट और 24,150-24,215 रेजिस्टेंस जोन पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। हालांकि, केवल एक दिन की तेजी या गिरावट के आधार पर निवेश का फैसला करने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल और अपने रिस्क प्रोफाइल को ध्यान में रखना बेहतर है।
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