Ashutosh Fibre IPO Listing: टेक्निकल टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए प्रोडक्ट्स बनाने वाली आशुतोष फाइबर के शेयरों ने शेयर बाजार में शानदार शुरुआत की है। कंपनी के आईपीओ को निवेशकों की ओर से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली थी और इश्यू कुल 144 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ था। अब लिस्टिंग के दिन शेयरों ने निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है। हालांकि, नई खरीदारी करने से पहले कंपनी के बिजनेस, वित्तीय स्थिति और आईपीओ से जुटाई गई रकम के इस्तेमाल को समझना जरूरी है।
₹92 के इश्यू प्राइस से ₹140 पर हुई एंट्री
आशुतोष फाइबर के आईपीओ में शेयरों का इश्यू प्राइस ₹92 प्रति शेयर तय किया गया था। कंपनी के शेयरों की सोमवार को NSE SME प्लेटफॉर्म पर ₹140 के भाव पर लिस्टिंग हुई।
इस तरह आईपीओ निवेशकों को लिस्टिंग पर ही करीब 52.17% का फायदा मिला। यानी जिन निवेशकों को आईपीओ में ₹92 के भाव पर शेयर मिले थे, उनके लिए बाजार में एंट्री के साथ ही अच्छी कमाई का मौका बना।
लिस्टिंग के बाद भी शेयर में तेजी जारी रही और भाव बढ़कर ₹147 के अपर सर्किट तक पहुंच गया। इस स्तर पर आईपीओ निवेशकों का मुनाफा करीब 59.78% हो गया।
आशुतोष फाइबर आईपीओ का लॉट साइज 1,200 शेयर था। इस हिसाब से एक लॉट के लिए निवेशक को ₹1,10,400 लगाने पड़े थे। ₹147 के भाव पर एक लॉट की वैल्यू ₹1,76,400 हो जाती है। यानी आईपीओ इश्यू प्राइस के मुकाबले प्रति लॉट करीब ₹66,000 का सीधा फायदा बनता है।
नोट: लिस्टिंग के दौरान बाजार भाव में बदलाव होता रहता है, इसलिए वास्तविक मुनाफा शेयर के मौजूदा भाव और बिक्री मूल्य पर निर्भर करेगा।
144 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ था IPO
आशुतोष फाइबर का करीब ₹56 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 31 अगस्त से 2 सितंबर तक खुला था। इस इश्यू को सभी कैटेगरी के निवेशकों से जोरदार प्रतिक्रिया मिली और यह कुल मिलाकर 144.65 गुना सब्सक्राइब हुआ।
सब्सक्रिप्शन के आंकड़ों पर नजर डालें तो क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स यानी QIB कैटेगरी 143.93 गुना सब्सक्राइब हुई। यह आंकड़ा एंकर निवेशकों को छोड़कर है।
वहीं, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स यानी NII कैटेगरी में 200.85 गुना बोली मिली, जबकि रिटेल निवेशकों का हिस्सा 99.16 गुना सब्सक्राइब हुआ।
इससे साफ है कि आईपीओ को संस्थागत और गैर-संस्थागत निवेशकों के साथ-साथ रिटेल निवेशकों की तरफ से भी काफी मजबूत मांग मिली थी।
IPO से जुटाए पैसे का क्या करेगी कंपनी?
आशुतोष फाइबर के आईपीओ में पूरी तरह फ्रेश इश्यू शामिल था। कंपनी ने ₹10 फेस वैल्यू वाले कुल 61,24,800 नए इक्विटी शेयर जारी किए हैं।
आईपीओ से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल कंपनी अलग-अलग कारोबारी जरूरतों को पूरा करने के लिए करेगी।
| पैसे का इस्तेमाल | प्रस्तावित राशि |
|---|---|
| नए उपकरण और मशीनरी की खरीद | ₹25.51 करोड़ |
| कर्ज चुकाने/कम करने के लिए | ₹20.00 करोड़ |
| सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्य | ₹2.06 करोड़ |
| आईपीओ से जुड़े खर्च | ₹8.78 करोड़ |
कंपनी के लिए मशीनरी और नए उपकरणों पर होने वाला खर्च महत्वपूर्ण है। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ाने और कारोबार को आगे विस्तार देने में मदद मिल सकती है। वहीं, करीब ₹20 करोड़ का इस्तेमाल कर्ज कम करने में किया जाना है, जिससे कंपनी के वित्तीय बोझ को घटाने में मदद मिल सकती है।
क्या काम करती है Ashutosh Fibre?
आशुतोष फाइबर टेक्निकल टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स के कारोबार में है। कंपनी का प्रमुख फोकस पॉलीप्रोपाइलीन यानी PP स्पन यार्न पर है।
कंपनी मुख्य रूप से B2B मॉडल के तहत काम करती है और इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरर्स, प्रोसेसर्स तथा संस्थागत ग्राहकों को यार्न और फैब्रिक उपलब्ध कराती है।
कंपनी टेक्निकल टेक्सटाइल के कई सेगमेंट में मौजूद है। इनमें इंडुटेक, प्रोटेक, होमटेक और मोबाइलटेक जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
इसके उत्पादों का इस्तेमाल फिल्ट्रेशन और प्रदूषण नियंत्रण, कंस्ट्रक्शन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोबाइल, पैकेजिंग, सेफ्टी एवं प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट और होम फर्निशिंग जैसी इंडस्ट्रीज में किया जाता है।
कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता
आशुतोष फाइबर की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में पांच प्रोसेसिंग लाइनें मौजूद हैं। कंपनी यार्न तैयार करने के लिए अलग-अलग स्पिनिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करती है।
इनमें:
- Ring Spun
- DREF यानी Friction Spun
- Open-End Spinning
शामिल हैं।
इन तकनीकों और अलग-अलग प्रोसेसिंग क्षमताओं के जरिए कंपनी विभिन्न औद्योगिक जरूरतों के हिसाब से टेक्निकल टेक्सटाइल उत्पाद तैयार करती है।
वित्तीय प्रदर्शन कैसा है?
कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो हाल के वर्षों में इसके कारोबार और मुनाफे में बढ़ोतरी देखने को मिली है।
वित्त वर्ष 2024 से वित्त वर्ष 2026 के बीच कंपनी का शुद्ध मुनाफा करीब 51% CAGR की दर से बढ़कर ₹16.04 करोड़ हो गया। इसी अवधि में कंपनी की कुल आय भी करीब 3% से अधिक CAGR के साथ बढ़कर ₹117.43 करोड़ पहुंच गई।
हालांकि, निवेशकों को केवल मुनाफे में बढ़ोतरी देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। SME कंपनियों में शेयर की कीमत में उतार-चढ़ाव अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है। इसलिए कंपनी के वैल्यूएशन, कर्ज, कैश फ्लो, मार्जिन और भविष्य की ग्रोथ को भी देखना जरूरी है।
कंपनी पर कितना कर्ज है?
मार्च 2026 के अंत तक कंपनी पर करीब ₹47.92 करोड़ का कुल कर्ज था। वहीं, कंपनी के रिजर्व और सरप्लस करीब ₹36.15 करोड़ थे।
आईपीओ से जुटाई गई रकम में से ₹20 करोड़ कर्ज कम करने के लिए इस्तेमाल की जानी है। ऐसे में आने वाले समय में कंपनी के कर्ज का बोझ कम होने और वित्तीय स्थिति में सुधार की संभावना पर निवेशक नजर रख सकते हैं।
लिस्टिंग के बाद क्या करें निवेशक?
आशुतोष फाइबर के शेयर ने लिस्टिंग के दिन शानदार रिटर्न दिया है और आईपीओ निवेशकों को मजबूत लिस्टिंग गेन मिला है। इसके बाद अपर सर्किट तक पहुंचने से शुरुआती निवेशकों का मुनाफा और बढ़ गया।
लेकिन लिस्टिंग पर तेज उछाल का मतलब यह नहीं है कि शेयर आगे भी इसी गति से बढ़ेगा। SME शेयरों में लिक्विडिटी और कीमतों में उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है।
अगर कोई निवेशक लिस्टिंग के बाद शेयर खरीदने की योजना बना रहा है तो उसे कंपनी के वैल्यूएशन, वित्तीय प्रदर्शन, कर्ज, कारोबार की संभावनाओं और शेयर के मौजूदा बाजार भाव का स्वतंत्र रूप से आकलन करना चाहिए।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल सूचना और शैक्षणिक उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी कंपनी के शेयर में निवेश करने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति और जोखिमों का स्वयं अध्ययन करें तथा जरूरत पड़ने पर सेबी-रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार से सलाह लें। NewsJagran.in किसी भी शेयर में निवेश की सलाह या खरीद-बिक्री की सिफारिश नहीं करता।


