Delhi Building Collapse: दिल्ली के सत्या निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने से छह लोगों की मौत के बाद MCD ने राजधानी में अवैध निर्माण के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू करने का आदेश दिया है। चार मंजिल से ज्यादा ऊंची अवैध इमारतों को तत्काल सील करने के निर्देश दिए गए हैं। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
Delhi Building Collapse: दिल्ली के सत्या निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने की घटना ने राजधानी में निर्माण और भवन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में छह लोगों की मौत के बाद अब दिल्ली नगर निगम (MCD) ने अवैध और नियमों के खिलाफ बनाए गए बहुमंजिला भवनों पर सख्ती करने का फैसला लिया है।
MCD ने राजधानी में चार मंजिल से अधिक ऊंची अवैध इमारतों को तत्काल सील करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उन अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी, जिनकी कथित लापरवाही या मिलीभगत से अवैध निर्माण होने की आशंका है।
साउथ दिल्ली के सत्या निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक करीब 30 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई थी। हादसे के समय इमारत में निर्माण या मरम्मत से जुड़ा काम चल रहा था। राहत और बचाव अभियान के दौरान मलबे से कई लोगों को बाहर निकाला गया। इस घटना में छह लोगों की जान चली गई।
सत्या निकेतन हादसे के बाद MCD का बड़ा फैसला
#WATCH | Delhi: CCTV footage from the building collapse site in Satya Niketan of Delhi's South-West district. Six people have lost their lives.
(Source: Local Resident) pic.twitter.com/7MtDbb3pJF
— ANI (@ANI) September 7, 2026 इमारत गिरने की घटना के बाद MCD ने राजधानी में ऐसे भवनों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई तेज करने का निर्देश दिया है, जो स्वीकृत नक्शे और निर्धारित निर्माण नियमों का उल्लंघन कर बनाए गए हैं।
खास तौर पर चार मंजिल से ज्यादा ऊंची अवैध इमारतों को सील करने का आदेश दिया गया है। इसका उद्देश्य ऐसे भवनों में रहने वाले लोगों और आसपास के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
MCD की कार्रवाई केवल अवैध निर्माण कराने वाले लोगों तक सीमित नहीं रहने वाली है। अगर जांच में यह सामने आता है कि किसी अधिकारी ने नियमों का उल्लंघन होने के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं की या किसी तरह की लापरवाही बरती, तो उसके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
करीब 30 साल पुरानी थी सत्या निकेतन की इमारत
साउथ दिल्ली के सत्या निकेतन इलाके में रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे एक पांच मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई। बताया गया है कि यह इमारत करीब 30 साल पुरानी थी।
दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर के नजदीक स्थित सत्या निकेतन छात्रों के लिए PG आवासों के कारण जाना जाता है। हादसे वाली इमारत का इस्तेमाल भी पेइंग गेस्ट आवास के तौर पर किया जा रहा था।
हादसे के वक्त इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर मरम्मत या रेनोवेशन का काम चलने की जानकारी सामने आई है। इसी दौरान अचानक पूरी इमारत ढह गई और बड़ी मात्रा में मलबा नीचे आ गिरा।
घटना के बाद पुलिस, दमकल विभाग और राहत-बचाव टीमों ने मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने का काम शुरू किया। कई घंटे तक चले अभियान के बाद लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया।
जिस जगह G+1 की अनुमति, वहां खड़ी कर दी गई G+4 संरचना
MCD के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, हादसे वाली इमारत करीब 55 वर्ग गज के प्लॉट पर बनी थी। यह एक पुनर्वास कॉलोनी में स्थित थी।
बताया गया है कि इस जगह पर मूल रूप से ग्राउंड फ्लोर और एक मंजिल यानी G+1 तक निर्माण की अनुमति थी। इसके बावजूद यहां कथित तौर पर G+4 संरचना खड़ी कर दी गई।
यानी जिस जगह सीमित ऊंचाई तक निर्माण की अनुमति थी, वहां उससे कहीं अधिक मंजिलों वाली इमारत तैयार कर दी गई। यही वजह है कि हादसे के बाद भवन की मंजूरी, निर्माण प्रक्रिया और उसमें हुए कथित बदलावों को लेकर जांच तेज कर दी गई है।
MCD अब यह भी देख रहा है कि आसपास की दूसरी इमारतों में भी इसी तरह नियमों का उल्लंघन तो नहीं किया गया है।
आसपास की इमारतें भी जांच के दायरे में
सत्या निकेतन में सिर्फ हादसे वाली इमारत की ही जांच नहीं हो रही है। आसपास मौजूद कुछ अन्य भवनों को लेकर भी निर्माण नियमों के उल्लंघन की शिकायतें सामने आई हैं।
बताया गया है कि हादसे वाली जगह के आसपास स्थित शॉप नंबर 12 और 13 में भी निर्माण से जुड़े नियमों के उल्लंघन की शिकायतों की जांच की जा रही है।
MCD का फोकस अब ऐसे सभी निर्माणों की पहचान करने पर है, जिनमें स्वीकृत नक्शे से अलग निर्माण किया गया है या निर्धारित मंजिलों से ज्यादा ऊंचाई तक भवन खड़ा किया गया है।
जर्जर इमारत को तीन दिन में गिराने का आदेश
हादसे के बाद MCD ने सत्य निकेतन में एक अन्य जर्जर और खतरनाक संपत्ति को लेकर भी कार्रवाई की है।
MCD की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि बिल्डिंग/हाउस नंबर 13 की जगह पर कब्जे की स्थिति देखी गई है और संपत्ति जर्जर तथा खतरनाक हालत में है। ऐसी स्थिति में वहां रहने वाले लोगों के साथ-साथ आसपास से गुजरने वाले लोगों के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है।
MCD ने DMC Act 1957 की धारा 348 और 491 के तहत संबंधित संपत्ति को निर्धारित समय के भीतर गिराने का आदेश दिया है।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर संबंधित व्यक्ति तय समय सीमा के भीतर खतरनाक निर्माण को नहीं गिराता है, तो MCD खुद कार्रवाई कर सकती है। ऐसी स्थिति में ध्वस्तीकरण पर आने वाला खर्च संबंधित व्यक्ति से कानून के तहत वसूला जा सकता है।
आसपास चल रहे PG पर भी कार्रवाई
सत्या निकेतन हादसे के बाद आसपास की इमारतों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन सतर्क हो गया है।
हादसे के बाद बगल की एक इमारत में चल रहे महिलाओं के PG को खाली कराया गया। इसके बाद परिसर को सील कर दिया गया। इसके अलावा आसपास मौजूद एक अन्य निर्माण के खिलाफ भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की तैयारी की जानकारी सामने आई है।
इस कार्रवाई का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि हादसे वाली इमारत के आसपास कोई दूसरा असुरक्षित निर्माण लोगों की जान के लिए खतरा न बने।
मेयर ने कहा- दोषी अधिकारियों को भी नहीं बख्शेंगे
सत्या निकेतन हादसे के बाद दिल्ली के मेयर प्रवेश वाही ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है।
उन्होंने कहा कि घटना की जांच में अगर किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारी की तत्काल बर्खास्तगी तक की कार्रवाई हो सकती है।
इस बयान के बाद यह साफ है कि जांच का दायरा केवल बिल्डिंग मालिक या निर्माण कराने वाले लोगों तक सीमित नहीं रहेगा। प्रशासन यह भी पता लगाने की कोशिश करेगा कि अवैध निर्माण को समय रहते रोकने के लिए जिम्मेदार विभागों की ओर से क्या कदम उठाए गए थे।
बिल्डिंग मालिक समेत कई लोगों पर FIR
हादसे के मामले में पुलिस ने बिल्डिंग मालिक हरिराम और अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस ने मामले में गैर इरादतन हत्या, इमारत के रखरखाव में लापरवाही और लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालने से संबंधित धाराओं में कार्रवाई की है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इमारत में निर्माण और मरम्मत का काम किसके निर्देश पर किया जा रहा था और हादसे से पहले वहां कौन-कौन लोग काम कर रहे थे।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि भवन के निर्माण में स्वीकृत नियमों का पालन किया गया था या नहीं और इमारत की संरचनात्मक स्थिति के बारे में पहले से कोई शिकायत या चेतावनी मौजूद थी या नहीं।
हादसे ने दिल्ली में बिल्डिंग सेफ्टी पर उठाए सवाल
सत्या निकेतन की घटना ने दिल्ली में अनधिकृत निर्माण और भवन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर किसी इलाके में केवल G+1 निर्माण की अनुमति है, तो वहां चार-पांच मंजिल की संरचना आखिर कैसे खड़ी हो गई? इसके अलावा अगर ऐसी इमारत में छात्रों या अन्य लोगों के रहने के लिए PG चल रहा था, तो उसकी सुरक्षा जांच किस स्तर पर हुई थी?
ऐसे सवालों के जवाब अब MCD और संबंधित विभागों की जांच से सामने आने की उम्मीद है।
दिल्ली में बढ़ेगी अवैध बहुमंजिला इमारतों पर कार्रवाई
सत्या निकेतन हादसे के बाद चार मंजिल से अधिक ऊंची अवैध इमारतों को सील करने का MCD का आदेश राजधानी में बड़ी कार्रवाई की शुरुआत माना जा रहा है।
अब अधिकारियों को ऐसे भवनों की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। खास तौर पर वे इमारतें जांच के केंद्र में रहेंगी, जिनका निर्माण स्वीकृत नक्शे के विपरीत हुआ है या जिनमें तय सीमा से ज्यादा मंजिलें बनाई गई हैं।
अगर यह अभियान व्यापक स्तर पर लागू होता है, तो दिल्ली के उन इलाकों में भी कार्रवाई देखने को मिल सकती है जहां पुराने मकानों को बिना जरूरी अनुमति के बहुमंजिला संरचनाओं में बदल दिया गया है।
फिलहाल सत्या निकेतन हादसे की जांच जारी है। एक तरफ पुलिस हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच कर रही है, वहीं दूसरी तरफ MCD ने राजधानी में अवैध और असुरक्षित निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तेज करने का फैसला लिया है।


