iBRICS Summit 2026: भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान राजधानी दिल्ली में एक बड़ा वैश्विक निवेश सम्मेलन होने जा रहा है। 12 और 13 सितंबर 2026 को आयोजित होने वाले पहले iBRICS Summit 2026 में दुनिया के बड़े संस्थागत निवेशक, वित्त मंत्री और बिजनेस लीडर्स एक मंच पर नजर आएंगे। खास बात यह है कि सम्मेलन में शामिल होने वाले निवेशक और संस्थान सामूहिक रूप से करीब 1 ट्रिलियन डॉलर की पूंजी का प्रबंधन करते हैं।
इस सम्मेलन का आयोजन Sovereign Wealth Fund Institute (SWFI) की ओर से किया जा रहा है। यह कार्यक्रम 18वें BRICS Leaders Summit के साथ ही आयोजित होगा। ऐसे में माना जा रहा है कि यह बैठक सिर्फ निवेश के लिहाज से ही नहीं, बल्कि BRICS देशों के बीच आर्थिक और वित्तीय सहयोग को मजबूत करने के लिहाज से भी अहम हो सकती है।
दिल्ली में जुटेंगे दुनिया के बड़े निवेशक
iBRICS Summit 2026 में 500 से ज्यादा इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स, वित्त मंत्री और कारोबारी नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। इनमें Sovereign Wealth Funds, Public Pension Funds और BRICS तथा खाड़ी देशों से जुड़े बड़े Family Offices के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य बड़ी वैश्विक पूंजी को ऐसे प्रोजेक्ट्स से जोड़ना है, जिनमें निवेश की क्षमता तो है लेकिन उन्हें बड़े स्तर पर वित्तीय सहयोग की जरूरत है।
इन प्रोजेक्ट्स में खास तौर पर:
- इंफ्रास्ट्रक्चर
- एनर्जी ट्रांजिशन
- क्रिटिकल मिनरल्स
- टेक्नोलॉजी
- डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और क्षमता
- रणनीतिक आर्थिक परियोजनाएं
जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
इसका मतलब यह है कि सम्मेलन में सिर्फ नीतिगत चर्चा नहीं होगी, बल्कि निवेशकों और प्रोजेक्ट मालिकों को सीधे एक-दूसरे के सामने लाने की कोशिश की जाएगी।
क्यों महत्वपूर्ण है iBRICS Summit?
यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहे हैं। ट्रेड पॉलिसी, अमेरिकी टैरिफ, आर्थिक प्रतिबंध और अंतरराष्ट्रीय भुगतान व्यवस्था की बढ़ती लागत ने कई देशों के सामने नई चुनौतियां खड़ी की हैं।
BRICS देश लंबे समय से आपसी व्यापार और निवेश को बढ़ाने के लिए वैकल्पिक वित्तीय व्यवस्थाओं पर चर्चा करते रहे हैं। ऐसे में iBRICS Summit को इन चर्चाओं को वास्तविक निवेश और पूंजी आवंटन से जोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
SWFI के चेयरमैन और iBRICS के लीड को-चेयर लक्ष्मी नारायणन के मुताबिक, BRICS के भीतर सीमा पार निवेश की चर्चा लंबे समय से होती रही है, लेकिन कई मामलों में निवेश बाहरी मध्यस्थों के जरिए आगे बढ़ता रहा है। बदलते वैश्विक माहौल में फंड और सरकारों को पूंजी के लिए सीधे रास्ते उपलब्ध कराने की जरूरत बढ़ गई है।
पहले दिन होगी बंद कमरे में अहम राउंडटेबल मीटिंग
iBRICS Summit की सबसे खास गतिविधियों में से एक बंद दरवाजे वाली राउंडटेबल मीटिंग होगी। सम्मेलन के पहले दिन करीब 250 चुनिंदा प्रतिभागियों के साथ यह बैठक आयोजित की जाएगी।
इस बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इनमें:
- नॉन-डॉलर सेटलमेंट कॉरिडोर
- वैश्विक पूंजी का बेहतर इस्तेमाल
- कैपिटल डिप्लॉयमेंट के लक्ष्य
- BRICS देशों के बीच निवेश सहयोग
- रणनीतिक परियोजनाओं के लिए फंडिंग
जैसे विषय शामिल हैं।
इस दौरान प्रतिभागियों की ओर से ‘Sovereign Capital Compact’ पर हस्ताक्षर किए जाने की भी उम्मीद है। इसका उद्देश्य Sovereign Capital को प्राथमिकता वाले प्रोजेक्ट्स तक पहुंचाने के लिए सहयोग का ढांचा तैयार करना बताया जा रहा है।
निवेशकों और प्रोजेक्ट मालिकों को एक ही टेबल पर लाने की तैयारी
iBRICS नई दिल्ली 2026 के को-चेयर दुष्यंत खन्ना के मुताबिक, BRICS देशों के पास वैश्विक रिजर्व का एक बड़ा हिस्सा है और ये देश पूंजी को स्वतंत्र तरीके से आगे बढ़ाने के लिए सिस्टम विकसित कर रहे हैं।
लेकिन चुनौती यह है कि उपलब्ध पूंजी को सीधे Bankable Projects से कैसे जोड़ा जाए।
इसी अंतर को दूर करने के लिए सम्मेलन में प्रोजेक्ट मालिकों और ग्लोबल निवेशकों को आमने-सामने लाने की योजना है। 12 सितंबर को होने वाली बैठकों में दोनों पक्ष संभावित निवेश और परियोजनाओं को लेकर बातचीत करेंगे।
दूसरे दिन सेक्टर आधारित चर्चा और डील पर फोकस
सम्मेलन का दूसरा दिन भी काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। 13 सितंबर को पहले से तय बाइलैटरल डील टेबल और सेक्टर-स्पेसिफिक चर्चाएं होंगी।
इस दौरान अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े प्रोजेक्ट्स, निवेश प्रस्ताव और संभावित साझेदारी पर चर्चा की जाएगी। इसका उद्देश्य BRICS और पार्टनर देशों के बीच वास्तविक कारोबारी और निवेश संबंधों को आगे बढ़ाना है।
UPI और Pix को जोड़ने पर भी होगी चर्चा
iBRICS Summit में सिर्फ निवेश ही नहीं, बल्कि फाइनेंशियल कनेक्टिविटी भी बड़ा मुद्दा रहने वाला है।
भारत के UPI और ब्राजील के Pix जैसे फास्ट पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा हो सकती है। इसके साथ ही अलग-अलग देशों की Central Bank Digital Currency (CBDC) के बीच इंटरऑपरेबिलिटी यानी आपसी इस्तेमाल की क्षमता पर भी बातचीत होगी।
अगर ऐसे सिस्टम के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित होती है, तो भविष्य में सीमा पार भुगतान को तेज और आसान बनाने में मदद मिल सकती है।
मीडिया के लिए भी कुछ सत्र खुले रहेंगे
12 सितंबर को होने वाले ओपन प्लेनरी, BRICS Pay पैनल और Sovereign Capital Compact साइनिंग कार्यक्रम में मान्यता प्राप्त मीडिया के शामिल होने की अनुमति होगी।
हालांकि, महत्वपूर्ण बंद कमरे वाली चर्चाओं और कई द्विपक्षीय समझौतों पर बातचीत 13 सितंबर तक जारी रहेगी।
भारत के लिए क्यों अहम है यह सम्मेलन?
भारत के लिए iBRICS Summit 2026 कई मायनों में महत्वपूर्ण हो सकता है। एक तरफ देश BRICS की अध्यक्षता कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारत खुद को वैश्विक निवेश, डिजिटल पेमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।
यदि सम्मेलन में Sovereign Funds, Pension Funds और बड़े Institutional Investors के साथ ठोस निवेश समझौते आगे बढ़ते हैं, तो इससे BRICS देशों के बीच पूंजी के प्रवाह को नई दिशा मिल सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की पूंजी संभालने वाले वैश्विक निवेशक भारत में किन सेक्टर और प्रोजेक्ट्स पर दांव लगाते हैं। 12-13 सितंबर की बैठकों में इस दिशा में तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है।


