Tata Technologies Block Deal: टाटा ग्रुप की इंजीनियरिंग और डिजिटल सॉल्यूशंस कंपनी Tata Technologies के शेयरों में इस सप्ताह कमजोरी देखने को मिली। स्टॉक करीब 4 फीसदी गिरकर ₹800 के आसपास आ गया। इसी बीच कंपनी में करीब ₹165 करोड़ की बड़ी ब्लॉक डील हुई, जिसने निवेशकों का ध्यान खींचा है।
इस सौदे में कंपनी के पूर्व CEO पैट्रिक मैकगोल्ड्रिक ने करीब 21 लाख शेयर बेच दिए। बिक्री के बाद Tata Technologies में उनकी हिस्सेदारी घटकर 0.62 फीसदी रह गई है। इससे पहले कंपनी में उनकी हिस्सेदारी 1.13 फीसदी थी।
हालांकि, हालिया गिरावट के बावजूद Tata Technologies के शेयर का मध्यम अवधि का प्रदर्शन मजबूत रहा है। पिछले छह महीनों में स्टॉक करीब 40 फीसदी चढ़ चुका है।
₹165 करोड़ की ब्लॉक डील से बढ़ी हलचल
Tata Technologies के शेयरों में इस सप्ताह करीब 4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और स्टॉक ₹800 के आसपास पहुंच गया। शुक्रवार को भी शेयर 0.63 फीसदी गिरकर ₹799.85 पर बंद हुआ।
इसी दौरान कंपनी के शेयरों में करीब ₹165 करोड़ की ब्लॉक डील हुई। इस सौदे में पूर्व CEO पैट्रिक मैकगोल्ड्रिक ने 21 लाख शेयर बेचकर अपनी हिस्सेदारी कम कर दी।
ब्लॉक डील के बाद उनकी कंपनी में हिस्सेदारी 1.13 फीसदी से घटकर 0.62 फीसदी हो गई है। बाजार में इस तरह की बड़ी हिस्सेदारी बिक्री को निवेशकों द्वारा बारीकी से देखा जाता है।
चार बड़े निवेशकों ने खरीदे शेयर
पैट्रिक मैकगोल्ड्रिक की ओर से बेचे गए 21 लाख शेयरों को चार प्रमुख निवेशकों ने खरीदा। इनमें ICICI Prudential Mutual Fund, Kotak Mutual Fund, 360 ONE Asset Management और Carnelian Asset Management & Advisors शामिल हैं।
जानकारी के मुताबिक, चारों खरीदारों ने बराबर संख्या में शेयर खरीदे। यह ब्लॉक डील ₹785 प्रति शेयर के भाव पर हुई।
इससे पता चलता है कि जहां एक बड़े शेयरधारक ने अपनी हिस्सेदारी घटाई, वहीं दूसरी ओर संस्थागत निवेशकों ने कंपनी के शेयरों में खरीदारी की।
कौन हैं Tata Technologies के पूर्व CEO पैट्रिक मैकगोल्ड्रिक?
पैट्रिक मैकगोल्ड्रिक का Tata Technologies के साथ करीब दो दशक लंबा जुड़ाव रहा है। उन्होंने सितंबर 2014 में कंपनी के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर पद से रिटायरमेंट लिया था।
इसके बाद नवंबर 2017 में वॉरेन हैरिस ने Tata Technologies के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर की जिम्मेदारी संभाली।
मैकगोल्ड्रिक वर्तमान में RNT Associates International से जुड़े हुए हैं। यह संस्था रतन टाटा से संबंधित रही है और नई तकनीक तथा नए बिजनेस मॉडल वाली कंपनियों में निवेश और सलाह से जुड़े काम करती है।
मार्च तिमाही में कंपनी का मुनाफा बढ़ा
Tata Technologies के वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो मार्च तिमाही में कंपनी ने नेट प्रॉफिट में करीब 8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की थी।
कंपनी का नेट प्रॉफिट बढ़कर ₹204.17 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹188.87 करोड़ था। कंपनी के रेवेन्यू में भी अच्छी वृद्धि देखने को मिली।
मार्च तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू बढ़कर ₹1,572.22 करोड़ रहा, जबकि एक साल पहले यह ₹1,285.65 करोड़ था।
हालांकि, पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट घटकर ₹546.59 करोड़ रह गया। वित्त वर्ष 2024-25 में यह ₹676.95 करोड़ था।
दूसरी ओर, सालाना आधार पर कंपनी के रेवेन्यू में बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2025-26 में रेवेन्यू ₹5,505.57 करोड़ रहा, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में यह ₹5,168.45 करोड़ था।
IPO के बाद लिस्टिंग पर 163% उछला था शेयर
Tata Technologies ने नवंबर 2023 में शेयर बाजार में धमाकेदार एंट्री की थी। यह करीब दो दशक के अंतराल के बाद Tata Group की पहली बड़ी पब्लिक पेशकश थी।
कंपनी के शेयर ने लिस्टिंग वाले दिन अपने इश्यू प्राइस के मुकाबले करीब 163 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार शुरू किया था। इसके बाद भी स्टॉक में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
हालिया ब्लॉक डील ने एक बार फिर Tata Technologies के शेयर को बाजार के फोकस में ला दिया है।
1994 में हुई थी Tata Technologies की शुरुआत
Tata Technologies की स्थापना वर्ष 1994 में हुई थी। यह Tata Motors की सब्सिडियरी कंपनी है और ऑटोमोबाइल समेत कई इंडस्ट्रीज को इंजीनियरिंग और डिजिटल सॉल्यूशंस उपलब्ध कराती है।
कंपनी मुख्य रूप से ऑटोमोटिव, एयरोस्पेस और इंडस्ट्रियल सेक्टर से जुड़े ग्राहकों को डिजाइन, इंजीनियरिंग और डिजिटल टेक्नोलॉजी से जुड़ी सेवाएं प्रदान करती है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
पूर्व CEO द्वारा हिस्सेदारी घटाने से शेयर पर शॉर्ट टर्म में दबाव देखने को मिल सकता है, लेकिन इस सौदे को केवल नकारात्मक संकेत के तौर पर देखना जरूरी नहीं है। खास बात यह है कि दूसरी ओर कई बड़े संस्थागत निवेशकों ने ब्लॉक डील के जरिए शेयर खरीदे हैं।
वहीं, पिछले छह महीनों में करीब 40 फीसदी की तेजी यह दिखाती है कि स्टॉक ने हाल की कमजोरी से पहले मजबूत प्रदर्शन किया है। ऐसे में निवेशकों को केवल एक ब्लॉक डील के आधार पर फैसला लेने के बजाय कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, वैल्यूएशन और भविष्य की ग्रोथ संभावनाओं पर भी ध्यान देना चाहिए।


