NSE IPO: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित IPO का इंतजार अब खत्म होने की ओर है। कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI ने NSE को अपना पब्लिक इश्यू लाने की मंजूरी दे दी है। करीब एक दशक से अटके इस IPO के लिए अब रास्ता साफ हो गया है। माना जा रहा है कि यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO हो सकता है।
NSE के बोर्ड ने फरवरी 2026 में IPO लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद एक्सचेंज ने जून 2026 में IPO का ड्राफ्ट SEBI के पास दाखिल किया था। अब नियामकीय मंजूरी मिलने के बाद सितंबर में इश्यू आने और शेयरों की लिस्टिंग होने की संभावना जताई जा रही है।
बाजार हिस्सेदारी के मामले में NSE देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। ऐसे में इसके IPO को लेकर रिटेल निवेशकों से लेकर बड़े संस्थागत निवेशकों तक में काफी दिलचस्पी है। आइए जानते हैं NSE IPO से जुड़ी अब तक की अहम जानकारी।
करीब 30,000 करोड़ रुपये का हो सकता है NSE IPO
NSE का प्रस्तावित IPO करीब 30,000 करोड़ रुपये का हो सकता है। खास बात यह है कि यह इश्यू पूरी तरह Offer for Sale (OFS) होगा।
इसका मतलब है कि IPO के तहत NSE के नए शेयर जारी नहीं किए जाएंगे। मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी के कुछ शेयर बेचेंगे। इसलिए IPO से मिलने वाली रकम NSE के पास नहीं जाएगी, बल्कि उन मौजूदा निवेशकों को मिलेगी जो अपने शेयर OFS के तहत बेचेंगे।
मौजूदा शेयरधारक करीब 14.89 करोड़ शेयर, यानी लगभग 6 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री के लिए रख सकते हैं।
NSE IPO में कौन बेच सकता है अपनी हिस्सेदारी?
OFS में NSE के कई मौजूदा शेयरधारक हिस्सा ले सकते हैं। इनमें घरेलू वित्तीय संस्थानों के साथ विदेशी निवेशक और बीमा कंपनियां भी शामिल हैं।
संभावित शेयर बेचने वालों में:
- LIC
- SBI
- SBI Capital Markets
- Temasek Holdings की संबंधित इकाइयां
- MS Strategic (Mauritius) Limited
- Canada Pension Plan Investment Board (CPPIB)
- Bank of Baroda
- Stock Holding Corporation of India Limited
- General Insurance Corporation of India
- The New India Assurance Company
- National Insurance Company
- United India Insurance Company
शामिल हैं।
जानकारी के मुताबिक, SBI करीब 0.65 प्रतिशत और SBI Capital Markets करीब 0.35 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच सकती है। वहीं MS Strategic (Mauritius) Limited करीब 1.60 करोड़ शेयर OFS में बेच सकती है।
कब खुलेगा NSE IPO?
NSE IPO की सटीक तारीख अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं हुई है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक इश्यू 15 सितंबर 2026 के आसपास खुल सकता है।
शेयरों की लिस्टिंग 24 या 25 सितंबर के आसपास होने की संभावना जताई जा रही है। प्रस्तावित प्लान के अनुसार NSE के शेयर BSE पर लिस्ट हो सकते हैं।
हालांकि, निवेशकों को अंतिम तारीखों के लिए NSE और संबंधित आधिकारिक IPO दस्तावेजों में जारी जानकारी का इंतजार करना होगा।
जल्द आ सकता है प्राइस बैंड और लॉट साइज
NSE IPO के प्राइस बैंड, लॉट साइज और अन्य महत्वपूर्ण डिटेल्स का ऐलान भी जल्द हो सकता है। माना जा रहा है कि एक्सचेंज अगले सप्ताह इन जानकारियों को सार्वजनिक कर सकता है।
प्राइस बैंड सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि रिटेल निवेशकों को NSE IPO में आवेदन करने के लिए न्यूनतम कितनी रकम की जरूरत होगी।
भारत का सबसे बड़ा IPO बनने की रेस में NSE
करीब 30,000 करोड़ रुपये के अनुमानित आकार के साथ NSE IPO भारत के सबसे बड़े IPO की सूची में सबसे ऊपर पहुंच सकता है।
फिलहाल भारत में सबसे बड़े IPO का रिकॉर्ड Hyundai Motor India के पास है। अक्टूबर 2024 में आए इस IPO का आकार करीब 27,858.75 करोड़ रुपये था।
अगर NSE करीब 30,000 करोड़ रुपये का IPO लाता है, तो वह Hyundai Motor India का रिकॉर्ड पीछे छोड़ सकता है।
हालांकि, भविष्य में Jio Platforms का प्रस्तावित IPO इससे बड़ा हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक Jio Platforms करीब 37,700 करोड़ रुपये का इश्यू ला सकती है, लेकिन इसकी टाइमलाइन अभी स्पष्ट नहीं है।
IPO के बाद NSE की टॉप-10 कंपनियों में हो सकती है एंट्री
NSE IPO का एक और बड़ा पहलू इसका संभावित वैल्यूएशन है। रिपोर्ट्स के मुताबिक IPO के बाद NSE का मार्केट कैप 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।
अगर ऐसा होता है तो NSE बाजार पूंजीकरण के लिहाज से भारत की टॉप-10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल हो सकता है।
इससे NSE की स्थिति भारतीय कैपिटल मार्केट में और मजबूत हो सकती है। एक्सचेंज पहले से ही इक्विटी कैश मार्केट और डेरिवेटिव्स कारोबार में अपनी मजबूत बाजार हिस्सेदारी के लिए जाना जाता है।
NSE के प्रमुख शेयरधारक कौन हैं?
NSE के शेयरहोल्डिंग पैटर्न में घरेलू वित्तीय संस्थानों, बीमा कंपनियों, विदेशी निवेशकों और अन्य निवेशकों की हिस्सेदारी है।
LIC NSE का प्रमुख शेयरधारक है और उसके पास करीब 10.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई जाती है।
इसके अलावा General Insurance Corporation of India और The New India Assurance Company की भी NSE में हिस्सेदारी है।
SBI और SBI Capital Markets की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 7.5 प्रतिशत बताई जाती है। वहीं Stock Holding Corporation of India Limited (SHCIL) की हिस्सेदारी करीब 4.44 प्रतिशत है।
विदेशी निवेशकों में Temasek से जुड़ी Aranda Investments और Canada Pension Plan Investment Board जैसे बड़े संस्थागत निवेशक शामिल हैं।
करीब 10 साल से अटका था NSE IPO
NSE IPO का इतिहास काफी पुराना है। एक्सचेंज ने पहली बार दिसंबर 2016 में IPO के लिए प्रॉस्पेक्टस दाखिल किया था।
उस समय OFS के जरिए करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना थी। लेकिन नियामकीय मुद्दों और NSE के को-लोकेशन मामले से जुड़ी चिंताओं के कारण IPO की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
इसके बाद करीब एक दशक तक NSE IPO का मामला लंबित रहा। अब SEBI की मंजूरी के बाद एक्सचेंज के पब्लिक होने की प्रक्रिया दोबारा तेज हो गई है।
IPO की तैयारी में बड़े निवेश बैंक और लॉ फर्म
NSE ने IPO की तैयारी के लिए बड़े निवेश बैंकों को भी शामिल किया है। मार्च 2026 की शुरुआत में करीब 20 इनवेस्टमेंट बैंकों को शॉर्टलिस्ट किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
इनमें Kotak Mahindra Capital, Citi, JM Financial, JPMorgan, HSBC Securities और Morgan Stanley जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
इसके अलावा IPO से जुड़े कानूनी काम के लिए करीब 7 से 9 लॉ फर्म्स को शॉर्टलिस्ट किया गया था। इनमें Cyril Amarchand Mangaldas, Trilegal और Latham & Watkins जैसे नाम शामिल हैं।
NSE की वित्तीय स्थिति कैसी है?
NSE के पास करीब 1.8 लाख शेयरहोल्डर हैं। वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो अप्रैल-जून 2026 तिमाही में एक्सचेंज का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर करीब 7 प्रतिशत बढ़कर 3,120 करोड़ रुपये हो गया।
इसी अवधि में NSE की कुल आय करीब 9 प्रतिशत बढ़कर 5,252 करोड़ रुपये रही।
हालांकि, पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में NSE का नेट प्रॉफिट करीब 15 प्रतिशत घटकर 10,302 करोड़ रुपये रह गया। इस दौरान कुल आय भी घटकर करीब 18,713 करोड़ रुपये रही।
निवेशकों के लिए NSE IPO क्यों महत्वपूर्ण है?
NSE भारत के कैपिटल मार्केट का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसकी मजबूत बाजार हिस्सेदारी, डेरिवेटिव्स कारोबार और बड़े निवेशक आधार के कारण IPO को लेकर बाजार में काफी उत्सुकता है।
अगर इश्यू करीब 30,000 करोड़ रुपये के आकार में आता है और कंपनी का वैल्यूएशन 5 लाख करोड़ रुपये से ऊपर जाता है, तो NSE की लिस्टिंग भारतीय शेयर बाजार के लिए एक बड़ा बाजार घटनाक्रम होगी।
हालांकि, निवेशकों को सिर्फ कंपनी के नाम या IPO के आकार को देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। प्राइस बैंड, वैल्यूएशन, वित्तीय प्रदर्शन, IPO की शर्तें और लिस्टिंग के बाद की संभावनाओं का अध्ययन करना जरूरी होगा।
Disclaimer
यह लेख केवल सामान्य जानकारी और समाचार के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी IPO या शेयर में निवेश करने से पहले कंपनी के आधिकारिक दस्तावेजों और वित्तीय आंकड़ों का अध्ययन करें तथा जरूरत पड़ने पर SEBI-पंजीकृत निवेश सलाहकार से सलाह लें। NewsJagran.in किसी भी शेयर या IPO में निवेश करने की सलाह नहीं देता।


