Mirzapur The Movie Review: ‘मिर्जापुर’ की दुनिया को बड़े पर्दे पर देखने का इंतजार कर रहे फैंस के लिए ‘मिर्जापुर द मूवी’ एक अलग सिनेमाई अनुभव लेकर आई है। फिल्म में पुराने किरदारों की वापसी के साथ कहानी में नया विलेन भी देखने को मिलता है। इस बार कहानी का सबसे बड़ा चेहरा रवि किशन बने हैं, जो बब्बन बबुआ यादव के किरदार में मिर्जापुर की गद्दी पर अपनी नजरें गड़ाए हुए हैं।
फिल्म का आधार भले ही ‘मिर्जापुर’ सीरीज की दुनिया से जुड़ा है, लेकिन इसे बड़े पर्दे के हिसाब से पेश करने की कोशिश की गई है। कालीन भैया यानी पंकज त्रिपाठी का रौब बरकरार है, जबकि मुन्ना भैया के रूप में दिव्येंदु की वापसी फैंस के लिए सबसे बड़ा आकर्षण है।
फिल्म: मिर्जापुर द मूवी
कलाकार: पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु, जीतेंद्र, रवि किशन, रसिका दुग्गल, श्वेता त्रिपाठी, कुलभूषण खरबंदा और अन्य
निर्देशक: गुरमीत सिंह
निर्माता: रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर
रेटिंग: 3/5
क्या है ‘मिर्जापुर द मूवी’ की कहानी?
फिल्म की कहानी उसी दुनिया में आगे बढ़ती है, जिसे दर्शक ‘मिर्जापुर’ सीरीज के जरिए काफी करीब से जान चुके हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार मिर्जापुर की गद्दी पर कब्जे की लड़ाई में एक नया खिलाड़ी सामने है।
कहानी का केंद्र बब्बन बबुआ यादव यानी रवि किशन हैं। बब्बन एक बिजनेस डील के बहाने कालीन भैया के करीब पहुंचता है। ऊपर से उसका मकसद कारोबार दिखाई देता है, लेकिन असल में उसकी नजर मिर्जापुर की गद्दी पर है।
बब्बन कालीन भैया और उनके बेटे मुन्ना को रास्ते से हटाकर खुद मिर्जापुर का नया राजा बनना चाहता है। अपने इस प्लान को अंजाम तक पहुंचाने के लिए वह कई लोगों की मदद लेता है। इस खेल में सीएम के छोटे भाई जेपी यादव और जरीना जैसे किरदार भी अहम भूमिका निभाते हैं।
बब्बन के साथ उसकी साथी मुमताज बीबी यानी सोनल चौहान भी दिखाई देती हैं। वहीं मोहित मलिक का बिरजू लोहार उसके बेहद वफादार साथी और सुरक्षा कवच की भूमिका में नजर आता है।
बब्बन आखिरकार मुन्ना और बबलू के जरिए कालीन भैया तक पहुंचने में कामयाब हो जाता है और बिजनेस डील भी पक्की कर लेता है। लेकिन इसके पीछे उसका असली इरादा कालीन भैया को मिर्जापुर से बाहर ले जाकर खत्म करने का है।
अब क्या बब्बन अपने इस खतरनाक प्लान में कामयाब होता है? क्या कालीन भैया एक बार फिर अपने दुश्मन पर भारी पड़ते हैं? और मुन्ना भैया की वापसी कहानी को किस मोड़ पर ले जाती है? इन सवालों के जवाब फिल्म देखने पर ही मिलेंगे।
रवि किशन ने जीता दिल
अगर फिल्म में किसी एक कलाकार को सबसे बड़ा सरप्राइज पैकेज कहा जाए तो वह रवि किशन हैं। बब्बन बबुआ के किरदार में उन्हें काफी स्क्रीन टाइम मिला है और उन्होंने इसका भरपूर फायदा उठाया है।
चाहे गुस्से वाला सीन हो, एक्शन हो या इमोशनल मोमेंट, रवि किशन हर जगह अपने किरदार की पकड़ बनाए रखते हैं। उनके अंदाज में देसी तेवर और खतरनाक महत्वाकांक्षा दोनों नजर आती हैं।
उनके सामने पंकज त्रिपाठी का कालीन भैया वाला अंदाज भी फीका नहीं पड़ता। अखंडानंद त्रिपाठी के किरदार में पंकज एक बार फिर अपने शांत लेकिन दबदबे वाले अंदाज से प्रभावित करते हैं।
वहीं मुन्ना भैया के रूप में दिव्येंदु की वापसी फिल्म की बड़ी खासियत है। उनका अंदाज, डायलॉग डिलीवरी और बकैती वाले सीन मिर्जापुर के पुराने फैंस को खास तौर पर पसंद आ सकते हैं।
बबलू के किरदार में जीतेंद्र ने भी अच्छा काम किया है। इसके अलावा मोहित मलिक, अभिषेक बनर्जी, रसिका दुग्गल, श्वेता त्रिपाठी, श्रिया पिलगांवकर, सुशांत सिंह और शीबा चड्ढा समेत बाकी कलाकारों ने भी अपने-अपने किरदारों के साथ न्याय किया है।
निर्देशन में कहां रह गई कमी?
‘मिर्जापुर’ सीरीज के निर्देशन के लिए गुरमीत सिंह को काफी पसंद किया गया है। यही वजह है कि फिल्म से भी दर्शकों की उम्मीदें काफी ज्यादा थीं।
हालांकि बड़े पर्दे पर वही असर पूरी तरह नजर नहीं आता। फिल्म में सीरीज की दुनिया और किरदार तो मौजूद हैं, लेकिन कई जगह कहानी उस स्तर की पकड़ नहीं बना पाती, जिसकी उम्मीद ‘मिर्जापुर’ जैसे लोकप्रिय फ्रेंचाइजी से की जाती है।
कई किरदार कुछ समय के लिए दिखाई देते हैं और फिर गायब हो जाते हैं। कुछ कलाकारों को कहानी में अपेक्षित स्पेस नहीं मिल पाता। कहीं कहानी धीमी होती नजर आती है तो कहीं घटनाएं अचानक बहुत तेजी से आगे बढ़ती हैं।
यही असमान गति फिल्म को सीरीज के मुकाबले थोड़ा कमजोर बनाती है। अगर आपने ‘मिर्जापुर’ के सीजन देखे हैं तो आपको कई जगह तुलना खुद-ब-खुद महसूस होगी।
फिल्म में क्या अच्छा है?
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसके पुराने और पसंदीदा किरदार हैं। खास तौर पर मुन्ना भैया की वापसी दर्शकों को उत्साहित करती है।
थिएटर में फिल्म की टाइटल थीम और बैकग्राउंड म्यूजिक भी माहौल बनाने में कामयाब रहते हैं। कुछ एक्शन और ड्रामा वाले सीन प्रभाव छोड़ते हैं। क्लाइमैक्स में भी फिल्म अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करती है और कुछ हिस्से काफी शानदार लगते हैं।
रवि किशन का प्रदर्शन भी फिल्म के पक्ष में जाता है। बब्बन बबुआ के रूप में उनका अंदाज फिल्म को जरूरी एनर्जी देता है।
कहां कमजोर पड़ती है फिल्म?
फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसकी तुलना ‘मिर्जापुर’ सीरीज से होने वाली है। सीरीज में जिस तरह का कच्चापन, हिंसा, डार्क ह्यूमर और लगातार बना रहने वाला तनाव देखने को मिलता था, फिल्म हर जगह उसी स्तर को बरकरार नहीं रख पाती।
कुछ हिस्से जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं, जबकि कुछ घटनाएं जल्दबाजी में आगे बढ़ती हैं। गाने भी कहानी की रफ्तार को कई जगह रोकते हुए महसूस होते हैं।
यानी फिल्म में अच्छे मोमेंट्स जरूर हैं, लेकिन पूरी फिल्म एक जैसी मजबूती के साथ आगे नहीं बढ़ती।
देखें या नहीं?
अगर आप ‘मिर्जापुर’ सीरीज के फैन हैं और कालीन भैया, मुन्ना भैया और इस पूरी दुनिया को बड़े पर्दे पर देखना चाहते हैं तो ‘मिर्जापुर द मूवी’ आपको निराश नहीं करेगी। मुन्ना की वापसी और रवि किशन का प्रदर्शन फिल्म देखने की दो बड़ी वजहें हैं।
लेकिन अगर आप सीरीज से तुलना किए बिना एक बिल्कुल नई और बेहद कसी हुई कहानी की उम्मीद कर रहे हैं, तो फिल्म कुछ जगह आपको कमजोर लग सकती है।
कुल मिलाकर ‘मिर्जापुर द मूवी’ में भौकाल, एक्शन, पुराने किरदार और रवि किशन का दमदार प्रदर्शन है, लेकिन कहानी और निर्देशन में वह सीरीज वाली धार हर जगह नजर नहीं आती।
हमारी रेटिंग: 3/5


