Bike Taxi Update: देश में बाइक टैक्सी को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यों से निजी मोटरसाइकिल और स्कूटर मालिकों को यात्रियों को बाइक से ले जाने की अनुमति देने की अपील की है। उनका मानना है कि अगर राज्यों में बाइक टैक्सी को मंजूरी मिलती है तो खासकर ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में लोगों के लिए कमाई के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
हालांकि, केंद्र की ओर से समर्थन मिलने के बावजूद पूरे देश में निजी बाइक को टैक्सी के तौर पर चलाने की अनुमति अपने आप नहीं मिल जाती। इसका फैसला संबंधित राज्य सरकारों के नियमों और नीतियों पर निर्भर करता है।
गडकरी ने राज्यों से क्यों की बाइक टैक्सी शुरू करने की अपील?
महाराष्ट्र में सरकार के ‘सुरक्षा’ पायलट कार्यक्रम के शुभारंभ के दौरान नितिन गडकरी ने बाइक टैक्सी के मुद्दे पर राज्यों से आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि केंद्र ने इसके लिए अनुमति दी है, लेकिन कुछ राज्य अभी इसे लागू नहीं कर रहे हैं।
गडकरी के मुताबिक, परिवहन से जुड़े नियमों में राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि बाइक टैक्सी को अनुमति मिलने से बड़ी संख्या में लोगों को आजीविका का साधन मिल सकता है।
उनका खास जोर ग्रामीण क्षेत्रों पर है, जहां कई लोगों के पास अपनी मोटरसाइकिल या स्कूटर है और वे इसे अतिरिक्त कमाई के साधन के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं।
राज्यों के हाथ में क्यों है बाइक टैक्सी की चाबी?
बाइक टैक्सी को लेकर सबसे अहम बात यह है कि केंद्र सरकार की नीति और राज्य सरकार के नियम अलग-अलग स्तर पर काम करते हैं। परिवहन से जुड़े मामलों में राज्यों की भूमिका महत्वपूर्ण होने के कारण हर राज्य अपने क्षेत्र में बाइक टैक्सी के संचालन को लेकर अलग नियम बना सकता है।
यही वजह है कि किसी एक राज्य में बाइक टैक्सी को मंजूरी मिलना यह जरूरी नहीं करता कि दूसरे राज्य में भी निजी बाइक को यात्रियों को ढोने के लिए इस्तेमाल किया जा सके।
Motor Vehicle Aggregator Guidelines, 2025 के तहत एग्रीगेटर्स को पैसेंजर सर्विस के लिए नॉन-ट्रांसपोर्ट मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल करने की अनुमति देने का फ्रेमवर्क उपलब्ध कराया गया है। लेकिन इसका वास्तविक संचालन राज्य के नियमों और मंजूरी पर निर्भर करता है।
क्या अपनी निजी बाइक को टैक्सी में बदल सकते हैं?
अगर आपके पास मोटरसाइकिल या स्कूटर है तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप उसे तुरंत बाइक टैक्सी के रूप में चलाना शुरू कर सकते हैं। इसके लिए राज्य के नियम, परमिट, वाहन का रजिस्ट्रेशन, बीमा और अन्य जरूरी शर्तें लागू हो सकती हैं।
अलग-अलग राज्यों में बाइक टैक्सी को लेकर स्थिति भी अलग है। कर्नाटक और महाराष्ट्र इसके दो अलग उदाहरण हैं।
कर्नाटक में क्या हुआ?
जनवरी 2026 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने मोटरसाइकिलों को ट्रांसपोर्ट व्हीकल के तौर पर इस्तेमाल किए जाने के मुद्दे पर महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे। कोर्ट ने अधिकारियों से उन वाहन मालिकों के आवेदनों पर विचार करने को कहा था, जो मोटरसाइकिलों के लिए पीली नंबर प्लेट और कॉन्ट्रैक्ट पैसेंजर कैरियर के तौर पर काम करने के लिए परमिट चाहते थे।
हालांकि, कर्नाटक सरकार ने यात्रियों की सुरक्षा, इंश्योरेंस, महिलाओं की सुरक्षा और बाइक टैक्सी के लिए व्यापक नियमों की कमी जैसे मुद्दों को लेकर इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
इससे साफ है कि बाइक टैक्सी को लेकर केवल अनुमति का सवाल नहीं है, बल्कि सुरक्षा और रेगुलेशन भी बड़ा मुद्दा है।
महाराष्ट्र में पहले से मौजूद है बाइक टैक्सी का फ्रेमवर्क
महाराष्ट्र ने इस मामले में अलग रास्ता अपनाया है। राज्य सरकार ने 2025 में बाइक टैक्सी से जुड़े नियमों को नोटिफाई किया था। इसमें एग्रीगेटर्स, परमिट और ऑपरेशन से संबंधित शर्तों को शामिल किया गया है।
महाराष्ट्र के फ्रेमवर्क में इलेक्ट्रिक बाइक और स्कूटर को भी शामिल किया गया है। यानी राज्य स्तर पर नियम बनाकर बाइक टैक्सी सर्विस को नियंत्रित तरीके से संचालित करने का रास्ता तैयार किया जा सकता है।
8 करोड़ लोगों के लिए बन सकता है कमाई का जरिया
नितिन गडकरी का मानना है कि बाइक टैक्सी को व्यापक स्तर पर अनुमति मिलने से रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जिन लोगों के पास पहले से टू-व्हीलर है, वे इसका इस्तेमाल अतिरिक्त कमाई के लिए कर सकते हैं।
हालांकि, करीब 8 करोड़ लोगों को कमाई का अवसर मिलने का आंकड़ा एक संभावित रोजगार अवसर के रूप में गडकरी के बयान से जुड़ा है। इसे पूरे देश में तत्काल बनने वाली नौकरियों की निश्चित संख्या के तौर पर नहीं समझना चाहिए।
बाइक टैक्सी का विस्तार होने पर यात्रियों को भी छोटी दूरी की यात्रा के लिए अपेक्षाकृत सुविधाजनक विकल्प मिल सकता है। वहीं ड्राइवरों के लिए यह पार्ट-टाइम या फुल-टाइम कमाई का जरिया बन सकता है।
ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर भी सख्ती की तैयारी
बाइक टैक्सी के अलावा नितिन गडकरी ने सड़क सुरक्षा को लेकर भी एक प्रस्तावित बदलाव की जानकारी दी। मंत्रालय ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के लिए ‘नेगेटिव पॉइंट सिस्टम’ लाने की तैयारी कर रहा है।
इस व्यवस्था में बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले ड्राइवरों के खाते में नेगेटिव पॉइंट जुड़ सकते हैं। लगातार उल्लंघन करने पर ड्राइविंग लाइसेंस को निलंबित या रद्द करने जैसी कार्रवाई का प्रावधान हो सकता है।
इसका उद्देश्य वाहन चालकों को ट्रैफिक नियमों का पालन करने के लिए ज्यादा जिम्मेदार बनाना है।
‘सुरक्षा’ पायलट प्रोग्राम में 10 हजार लोगों को शामिल करने का लक्ष्य
महाराष्ट्र में शुरू किए गए ‘सुरक्षा’ पायलट कार्यक्रम का फोकस सड़क और कामगारों की सुरक्षा से जुड़ा है। इसके तहत हाईवे और खनन गतिविधियों से जुड़े ड्राइवरों तथा श्रमिकों को मुफ्त मेडिकल जांच और काउंसलिंग जैसी सुविधाएं देने की योजना है।
पायलट प्रोजेक्ट के शुरुआती चरण में NH-44 पर नागपुर से काम्टी तक करीब 150 किलोमीटर के हिस्से और चंद्रपुर के खनन क्षेत्र को कवर किया जाएगा। इसमें शुरुआत में करीब 10,000 लोगों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
बाइक टैक्सी का भविष्य राज्यों के फैसले पर निर्भर
कुल मिलाकर केंद्र सरकार बाइक टैक्सी के जरिए रोजगार और किफायती परिवहन के विकल्प को बढ़ावा देना चाहती है, लेकिन इसका व्यापक विस्तार राज्यों की मंजूरी पर निर्भर करेगा। राज्यों को यात्रियों की सुरक्षा, बीमा, परमिट, वाहन की फिटनेस और ड्राइवरों की जिम्मेदारी जैसे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अपने नियम तय करने होंगे।
अगर ज्यादा राज्य स्पष्ट और सुरक्षित नियमों के साथ निजी टू-व्हीलर को बाइक टैक्सी के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति देते हैं, तो लाखों बाइक मालिकों के लिए अतिरिक्त कमाई का रास्ता खुल सकता है।


