Air India News: लगातार बढ़ते घाटे और कर्ज के दबाव से जूझ रही एयर इंडिया के लिए टाटा ग्रुप की ओर से बड़ी राहत की खबर सामने आई है। टाटा संस के बोर्ड ने एयर इंडिया में 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की नई पूंजी लगाने को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब एयर इंडिया का घाटा एक साल में दोगुने से ज्यादा बढ़ चुका है और कंपनी पर बैंकों का करीब 40,000 करोड़ रुपये का कर्ज है।
नई दिल्ली: एयर इंडिया के लिए टाटा ग्रुप की नई फंडिंग काफी अहम मानी जा रही है। टाटा संस ने एयर इंडिया में एक साल से ज्यादा समय से इक्विटी निवेश रोक रखा था। अब बोर्ड की मंजूरी के बाद एयरलाइन में बड़े पूंजी निवेश का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है।
टाटा ग्रुप ने जनवरी 2022 में एयर इंडिया का नियंत्रण अपने हाथ में लिया था। इसके बाद एयरलाइन को दोबारा मजबूत बनाने, उसके संचालन में सुधार करने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए ग्रुप की ओर से कई बड़े कदम उठाए गए हैं।
टाटा संस बोर्ड ने दी निवेश को मंजूरी
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, एयर इंडिया में नए निवेश को लेकर फैसला जून में हुई टाटा संस बोर्ड की बैठक में लिया गया था। बैठक की अध्यक्षता तत्कालीन टाटा संस चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने की थी।
बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और वाइस-चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन समेत अन्य निदेशक भी मौजूद थे।
टाटा संस के नियमों के अनुसार, 100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के लिए टाटा ट्रस्ट्स के नॉमिनी डायरेक्टर्स के बहुमत का समर्थन जरूरी होता है। ऐसे में 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की फंडिंग को मिली मंजूरी एयर इंडिया के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
निवेश के साथ रखी गई है बड़ी शर्त
हालांकि टाटा संस ने एयर इंडिया को फंडिंग देने के लिए पूरी तरह से खुली छूट नहीं दी है। रिपोर्ट के अनुसार, एयर इंडिया और ग्रुप की अन्य कंपनियों को जब भी नई पूंजी की जरूरत होगी, उन्हें फंडिंग मांगने के साथ एक विस्तृत बिजनेस केस पेश करना होगा।
इसका मतलब है कि भविष्य में पूंजी निवेश कंपनी की जरूरत, कारोबार की स्थिति और प्रस्तावित बिजनेस प्लान के आधार पर किया जाएगा।
टाटा संस ने पिछले एक साल से ज्यादा समय से एयर इंडिया में इक्विटी फंडिंग नहीं की थी। अब नई मंजूरी से एयरलाइन की वित्तीय स्थिति को संभालने और उसके विस्तार की योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
एयर इंडिया का घाटा बना बड़ी परेशानी
एयर इंडिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसका लगातार बढ़ता घाटा है। वित्त वर्ष 2025-26 में एयरलाइन का घाटा 22,238 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है।
घाटे में इस तेज बढ़ोतरी ने एयर इंडिया के वित्तीय प्रदर्शन को लेकर चिंता बढ़ाई है। माना जा रहा है कि एयरलाइन के लगातार खराब वित्तीय प्रदर्शन और भविष्य में उसे और पूंजी की जरूरत पड़ने की संभावना ने टाटा ग्रुप के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी की है।
एयर इंडिया पर करीब ₹40,000 करोड़ का कर्ज
घाटे के साथ एयर इंडिया पर कर्ज का बोझ भी काफी बढ़ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, एयर इंडिया पर करीब 11 बैंकों का कुल बकाया लगभग 40,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
इनमें भारतीय स्टेट बैंक यानी SBI का एक्सपोजर सबसे ज्यादा बताया गया है। SBI का एयर इंडिया से जुड़ा एक्सपोजर करीब 18,500 करोड़ रुपये है। वहीं बैंक ऑफ बड़ौदा का एक्सपोजर करीब 5,938 करोड़ रुपये बताया गया है।
ऐसे में टाटा संस की नई पूंजी एयर इंडिया के लिए केवल विस्तार ही नहीं, बल्कि उसकी बैलेंस शीट को मजबूत करने के लिहाज से भी अहम हो सकती है।
एयर इंडिया में किसकी कितनी हिस्सेदारी?
एयर इंडिया में टाटा संस की हिस्सेदारी करीब 73.8 फीसदी है। वहीं कर्मचारियों के पास SBICAP Trustee Company के जरिए लगभग 1.5 फीसदी हिस्सेदारी बताई गई है।
सिंगापुर एयरलाइंस की भी एयर इंडिया में बड़ी हिस्सेदारी है। उसके पास करीब 24.7 फीसदी हिस्सेदारी है।
नई फंडिंग के बीच सिंगापुर एयरलाइंस के लिए भी अपनी हिस्सेदारी बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। रिपोर्ट के अनुसार, हिस्सेदारी कम होने से बचाने के लिए उसे करीब 3,350 करोड़ रुपये का निवेश करना पड़ सकता है।
चंद्रशेखरन के बाद एयर इंडिया पर रहेगी नजर
एयर इंडिया में नए निवेश की मंजूरी ऐसे समय में सामने आई है जब टाटा संस के नेतृत्व में भी बदलाव की तैयारी चल रही है। एन चंद्रशेखरन ने पिछले महीने घोषणा की थी कि वह टाटा संस के चेयरमैन के रूप में तीसरे कार्यकाल के लिए अपना नाम आगे नहीं बढ़ाएंगे।
उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होगा। ऐसे में आने वाले महीनों में टाटा संस के नए नेतृत्व और एयर इंडिया की रणनीति पर बाजार और एविएशन सेक्टर की नजर रहेगी।
फिलहाल एयर इंडिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती घाटे को कम करना, कर्ज के बोझ को संभालना और अपने कारोबार को ज्यादा टिकाऊ बनाना है। 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की नई पूंजी की मंजूरी एयरलाइन को इन चुनौतियों से निपटने में कितनी मदद करती है, यह आने वाले वित्तीय नतीजों से स्पष्ट होगा।


