देश में आठवें वेतन आयोग की चर्चाओं और पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर लगातार बढ़ती मांगों के बीच केंद्र सरकार के कर्मचारियों से जुड़ा एक बड़ा और संवेदनशील फैसला सामने आया है। कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में उन कर्मचारियों को राहत देने पर सहमति बनी है, जिनके परिवार के सदस्य की सरकारी सेवा के दौरान साल 2003 में मृत्यु हो गई थी और उनके आश्रितों को साल 2004 में अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिली थी।
यह फैसला इसलिए बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि साल 2004 से केंद्र सरकार ने नई पेंशन योजना (NPS) लागू कर दी थी। ऐसे में लंबे समय से यह विवाद बना हुआ था कि जिन परिवारों के मूल कर्मचारी की मृत्यु OPS लागू रहने के दौरान हुई, लेकिन आश्रित को नौकरी NPS लागू होने के बाद मिली, उन्हें कौन सी पेंशन योजना का लाभ मिलेगा।
अब इस मामले में सरकार की तरफ से बड़ा संकेत मिला है कि ऐसे पात्र कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ दिया जा सकता है।
क्या है पूरा मामला?
अनुकम्पा के आधार / Compassionate Ground पर नियुक्ति वालो को OPS पर महत्वपूर्ण जानकारी@AIRF_DELHI pic.twitter.com/7n2jd7xkRs
— Shiva Gopal Mishra (@ShivaGopalMish1) May 19, 2026 नेशनल काउंसिल ऑफ ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) के स्टाफ साइड सेक्रेटरी Shiva Gopal Mishra ने जानकारी देते हुए बताया कि कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा हुई।
बैठक में रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी, वित्त विभाग के प्रतिनिधि और कई मंत्रालयों के सचिव शामिल हुए। चर्चा का मुख्य विषय उन कर्मचारियों का भविष्य था जिन्हें अनुकंपा नियुक्ति तो 2004 में मिली, लेकिन जिनके माता-पिता या परिवार के सदस्य की सरकारी सेवा के दौरान मृत्यु 2003 में हुई थी।
अब सरकार ने सिद्धांत रूप से यह माना है कि यदि मूल कर्मचारी OPS व्यवस्था के तहत कार्यरत था, तो उसके आश्रित को भी पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिलना चाहिए।
किन कर्मचारियों को मिलेगा OPS का लाभ?
बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, निम्न शर्तें पूरी करने वाले कर्मचारियों को OPS का लाभ मिल सकता है:
- सरकारी कर्मचारी की मृत्यु वर्ष 2003 में हुई हो
- आश्रित को अनुकंपा के आधार पर 2004 में नौकरी मिली हो
- कर्मचारी ने पद के लिए जरूरी योग्यता पूरी की हो
- आयु सीमा और पात्रता नियमों का पालन किया गया हो
- नियुक्ति सरकार के मान्य नियमों के तहत हुई हो
यानी यह फैसला सभी NPS कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा, बल्कि केवल एक विशेष श्रेणी के कर्मचारियों को राहत देगा।
OPS और NPS का विवाद क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत सरकार ने 1 जनवरी 2004 से नई पेंशन योजना यानी NPS लागू की थी। इसके बाद केंद्र सरकार के अधिकांश नए कर्मचारियों को OPS से बाहर कर दिया गया।
OPS में कर्मचारियों को: अंतिम वेतन के आधार पर निश्चित पेंशन मिलती है, महंगाई राहत (DA) का लाभ मिलता है, पारिवारिक सुरक्षा ज्यादा मजबूत मानी जाती है वहीं NPS बाजार आधारित योजना है, जिसमें पेंशन रिटर्न निवेश के प्रदर्शन पर निर्भर करता है।
इसी कारण कई कर्मचारी संगठन लंबे समय से OPS बहाली की मांग कर रहे हैं।
पेंशन मंत्रालय के साथ क्या हुई बातचीत?
NC-JCM के अनुसार, यह मुद्दा नया नहीं है। कर्मचारी संगठन पिछले कई वर्षों से इस मांग को उठा रहे थे। इस संबंध में पेंशन मंत्रालय के साथ कई दौर की बातचीत भी हुई थी।
सूत्रों के मुताबिक: मंत्रालय स्तर पर चर्चा के मिनट्स भी तैयार किए गए थे, कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर राय ली गई थी लेकिन अंतिम फैसला बार-बार टलता रहा अब कैबिनेट सचिव स्तर पर मामला पहुंचने के बाद इसमें तेजी आई है।
टीवी सोमनाथन की भूमिका क्यों अहम मानी जा रही?
कैबिनेट सचिव T. V. Somanathan की अध्यक्षता में हुई बैठक को कर्मचारी संगठनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिव गोपाल मिश्रा ने कहा कि कैबिनेट सचिव ने इस मामले को “संवेदनशील” मानते हुए गंभीरता से सुना और इसका समाधान निकालने की दिशा में सकारात्मक रुख अपनाया।
सरकारी कर्मचारियों के संगठनों का मानना है कि इससे भविष्य में OPS से जुड़े अन्य मामलों में भी समाधान का रास्ता खुल सकता है।
रेलवे कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा?
इस बैठक में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन, मेंबर फाइनेंस और पीडीआईआर अधिकारियों की मौजूदगी को भी काफी अहम माना जा रहा है। दरअसल, रेलवे में बड़ी संख्या में अनुकंपा नियुक्तियां होती रही हैं। ऐसे में इस फैसले का असर हजारों कर्मचारियों पर पड़ सकता है, खासकर उन परिवारों पर जो लंबे समय से पेंशन को लेकर कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई लड़ रहे थे।
क्या इससे सभी कर्मचारियों के लिए OPS बहाल होगी?
फिलहाल ऐसा नहीं कहा जा सकता। यह फैसला केवल एक सीमित श्रेणी के कर्मचारियों के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि कर्मचारी संगठनों का मानना है कि इससे OPS बहाली की बहस को नई ताकत जरूर मिलेगी।
देश के कई राज्यों में पहले ही OPS को लेकर अलग-अलग फैसले लिए जा चुके हैं। ऐसे में केंद्र सरकार के स्तर पर इस तरह के निर्णय भविष्य की नीति चर्चाओं को प्रभावित कर सकते हैं।
8th Pay Commission के बीच क्यों बढ़ी चर्चा?
आठवें वेतन आयोग को लेकर केंद्र सरकार के कर्मचारियों में पहले से ही काफी उम्मीदें हैं। वेतन, फिटमेंट फैक्टर, DA और पेंशन सुधार जैसे मुद्दों पर लगातार चर्चा चल रही है।
ऐसे समय OPS से जुड़ा यह फैसला आने से कर्मचारी संगठनों में नई उम्मीद जगी है। कई कर्मचारी संगठन इसे “मानवीय दृष्टिकोण” वाला निर्णय बता रहे हैं।
जल्द जारी हो सकते हैं आधिकारिक मिनट्स
NC-JCM के अनुसार, बैठक के आधिकारिक मिनट्स जल्द जारी किए जा सकते हैं। इसके बाद संबंधित विभागों की तरफ से विस्तृत आदेश भी सामने आ सकते हैं।
यदि यह फैसला औपचारिक रूप से लागू होता है, तो लंबे समय से इंतजार कर रहे कई परिवारों को बड़ी राहत मिल सकती है।
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