नई दिल्ली | आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों के बीच लगातार चर्चाएं तेज हैं। इस बीच बच्चों की शिक्षा से जुड़े चिल्ड्रेन एजुकेशन अलाउंस (CEA) और हॉस्टल सब्सिडी को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने हाल ही में एक कॉरिजेंडम (Corrigendum) जारी कर दोनों भत्तों की मौजूदा दरों को स्पष्ट किया है। दूसरी ओर, ऑल इंडिया एनपीएस इम्प्लॉई फेडरेशन (AINPSEF) ने बढ़ती शिक्षा लागत का हवाला देते हुए आठवें वेतन आयोग से इन भत्तों में भारी बढ़ोतरी की मांग की है।
यदि आयोग इन सुझावों को स्वीकार करता है, तो भविष्य में लाखों केंद्रीय कर्मचारियों को अपने बच्चों की पढ़ाई और हॉस्टल खर्च में बड़ी राहत मिल सकती है।
DoPT ने CEA और हॉस्टल सब्सिडी की मौजूदा दरें कीं स्पष्ट
DoPT द्वारा जारी कॉरिजेंडम के अनुसार, केंद्रीय कर्मचारियों को चिल्ड्रेन एजुकेशन अलाउंस (CEA) के तहत प्रति बच्चे ₹2,812.50 प्रति माह, यानी ₹33,750 प्रति वर्ष तक की प्रतिपूर्ति मिलेगी।
इसी तरह हॉस्टल सब्सिडी के तहत प्रति बच्चे ₹8,437.50 प्रति माह या वास्तविक बोर्डिंग एवं लॉजिंग खर्च (जो भी कम हो) की प्रतिपूर्ति की जाएगी।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि 17 जुलाई 2018 और 25 अप्रैल 2024 को जारी कार्यालय ज्ञापनों (Office Memorandum) की अन्य सभी शर्तें पहले की तरह लागू रहेंगी।
किन कर्मचारियों को मिलता है CEA?
चिल्ड्रेन एजुकेशन अलाउंस का उद्देश्य केंद्रीय कर्मचारियों को बच्चों की शिक्षा पर होने वाले खर्च में आर्थिक सहायता देना है। इसके तहत सामान्यतः दो बच्चों तक शिक्षा संबंधी खर्च की प्रतिपूर्ति की जाती है। इसमें स्कूल फीस, ट्यूशन फीस, किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य निर्धारित शैक्षणिक खर्च शामिल हो सकते हैं, जो संबंधित नियमों के अधीन होते हैं।
दो साल पहले बढ़ी थी CEA की सीमा
चिल्ड्रेन एजुकेशन एलाउंस यानी #CEA के रूप में एक वर्ष में ₹33750.00 (2812.50 प्रति वर्ष) का है प्रावधान। यह भी अभी दो वर्ष पहले ही बढ़ाकर किया गया था। इससे पहले यह महज ₹27000.00 प्रति वर्ष था। हॉस्टल सब्सिडी के रूप में ₹8437.50 प्रति mah सरकार दो बच्चों तक प्रदान करती है।… pic.twitter.com/7fJCRCq3kK
— Dr Manjeet Singh Patel (@ManjeetIMOPS) July 2, 2026 ऑल इंडिया एनपीएस इम्प्लॉई फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने बताया कि वर्तमान में CEA की अधिकतम सीमा ₹33,750 प्रति वर्ष है, जिसे लगभग दो वर्ष पहले बढ़ाया गया था।
इससे पहले कर्मचारियों को अधिकतम ₹27,000 प्रति वर्ष तक का लाभ मिलता था। हालांकि उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में निजी और सरकारी दोनों स्कूलों की फीस, किताबों, परिवहन और हॉस्टल शुल्क में काफी वृद्धि हुई है। ऐसे में मौजूदा भत्ते वास्तविक खर्च की तुलना में काफी कम पड़ रहे हैं।
आठवें वेतन आयोग से क्या मांग की गई?
फेडरेशन ने आठवें वेतन आयोग के समक्ष कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे हैं। इनमें प्रमुख मांगें हैं—
- प्रत्येक बच्चे के लिए CEA बढ़ाकर न्यूनतम ₹84,000 प्रति वर्ष किया जाए।
- हॉस्टल सब्सिडी बढ़ाकर ₹2.50 लाख प्रति वर्ष की जाए।
- बढ़ती शिक्षा महंगाई को देखते हुए भविष्य में इन भत्तों की समय-समय पर समीक्षा की जाए।
फेडरेशन का कहना है कि इससे कर्मचारियों पर बच्चों की शिक्षा का आर्थिक बोझ काफी कम होगा।
क्यों बढ़ रही है CEA बढ़ाने की मांग?
पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा क्षेत्र में खर्च तेजी से बढ़ा है। आज अधिकांश स्कूलों में—
- वार्षिक फीस में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
- परिवहन शुल्क पहले की तुलना में अधिक है।
- किताबें और स्टेशनरी महंगी हो गई हैं।
- हॉस्टल और बोर्डिंग चार्ज में भी लगातार वृद्धि देखी गई है।
ऐसे में कर्मचारी संगठनों का मानना है कि वर्तमान CEA और हॉस्टल सब्सिडी वास्तविक खर्च का केवल एक हिस्सा ही कवर कर पा रही है।
क्या तुरंत बढ़ जाएगा CEA?
फिलहाल ऐसा कोई सरकारी फैसला नहीं हुआ है। DoPT ने केवल मौजूदा दरों को स्पष्ट किया है। वहीं CEA और हॉस्टल सब्सिडी बढ़ाने की मांग कर्मचारी संगठन की ओर से आठवें वेतन आयोग के सामने रखी गई है।
यदि आयोग अपनी सिफारिशों में इन प्रस्तावों को शामिल करता है और केंद्र सरकार उन्हें मंजूरी देती है, तभी नई दरें लागू होंगी।
आठवें वेतन आयोग से कर्मचारियों को क्या उम्मीद?
केंद्रीय कर्मचारियों को उम्मीद है कि आठवां वेतन आयोग केवल वेतन और फिटमेंट फैक्टर ही नहीं बल्कि शिक्षा, चिकित्सा और अन्य भत्तों में भी समयानुकूल संशोधन की सिफारिश करेगा। खासकर बच्चों की शिक्षा पर बढ़ते खर्च को देखते हुए CEA और हॉस्टल सब्सिडी में वृद्धि कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।
हालांकि अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही सामने आएगा।
निष्कर्ष
DoPT ने फिलहाल CEA और हॉस्टल सब्सिडी की मौजूदा दरों को स्पष्ट कर दिया है, लेकिन कर्मचारी संगठन इन दोनों भत्तों में बड़ी बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। यदि आठवां वेतन आयोग इन मांगों पर सकारात्मक सिफारिश करता है, तो लाखों केंद्रीय कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा का आर्थिक बोझ काफी हद तक कम हो सकता है। फिलहाल कर्मचारियों की नजर आयोग की आगामी सिफारिशों पर टिकी हुई है।


