आज के प्रतिस्पर्धी आईटी सेक्टर में नौकरी मिलना जितना चुनौतीपूर्ण है, उतना ही मुश्किल उसे लंबे समय तक बनाए रखना भी हो गया है। हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है। इस पोस्ट में इंजीनियर ने दावा किया कि एक भारतीय आईटी कंपनी में कॉन्ट्रैक्ट पर काम शुरू करने के महज छह महीने बाद उसे अचानक नौकरी से निकाल दिया गया। इतना ही नहीं, बाद में मिले 15 लाख रुपये सालाना (LPA) के जॉब ऑफर को भी उसने अपने अनुभव और स्किल्स के हिसाब से “शर्मनाक” बताया।
इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर वर्कप्लेस कल्चर, परफॉर्मेंस रिव्यू सिस्टम और कर्मचारियों के साथ कंपनियों के व्यवहार को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
छह महीने बाद अचानक खत्म हुआ कॉन्ट्रैक्ट

Reddit पर शेयर किए गए अनुभव के मुताबिक इंजीनियर ने एक भारतीय आईटी कंपनी में कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर काम शुरू किया था। करीब छह महीने तक काम करने के बाद उसे अचानक बताया गया कि उसका कॉन्ट्रैक्ट समाप्त किया जा रहा है।
कंपनी की ओर से कारण “खराब प्रदर्शन” बताया गया, लेकिन इंजीनियर का कहना है कि उसे इससे पहले कभी कोई आधिकारिक चेतावनी नहीं मिली। न तो किसी तरह का परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट प्लान (PIP) दिया गया और न ही कोई लिखित फीडबैक साझा किया गया।
इंजीनियर का आरोप है कि उसे अपनी बात रखने या सुधार का मौका भी नहीं दिया गया।
क्लाइंट टीम से फीडबैक लेने पर उठाए सवाल
पोस्ट में इंजीनियर ने दावा किया कि वह सात सदस्यों वाली टीम का हिस्सा था। उसके अनुसार, टीम द्वारा पूरे किए गए करीब 90 स्टोरी पॉइंट्स में से लगभग 40 स्टोरी पॉइंट्स पर उसने स्वयं काम किया था।
उसने सवाल उठाया कि यदि उसका प्रदर्शन वास्तव में कमजोर था तो कंपनी ने रोज उसके साथ काम करने वाली क्लाइंट टीम से फीडबैक क्यों नहीं लिया। उसका कहना था कि निर्णय लेने से पहले वास्तविक कार्य प्रदर्शन का निष्पक्ष मूल्यांकन होना चाहिए था।
बग्स और देरी के आरोपों पर दी सफाई
इंजीनियर ने अपने ऊपर लगाए गए ज्यादा बग्स और प्रोडक्शन इश्यू के आरोपों को भी खारिज किया।
उसके अनुसार, कई प्रोडक्शन समस्याएं बाद में उसके पास इसलिए भेजी गईं क्योंकि वे लाइव सिस्टम से जुड़ी थीं और उन्हें तत्काल ठीक करना जरूरी था। ऐसे मामलों को उसके खिलाफ नकारात्मक प्रदर्शन के रूप में देखा गया।
इसके अलावा उसने बताया कि एक दिन मेडिकल अपॉइंटमेंट के कारण वह डेली स्टैंडअप मीटिंग में कुछ मिनट देरी से पहुंचा था। टीम और मैनेजर को इसकी पहले से जानकारी थी, लेकिन बाद में इसे भी परफॉर्मेंस इश्यू के तौर पर दर्ज किया गया।
AI ट्रेनिंग और ऑनलाइन एक्टिव स्टेटस पर जताई नाराजगी
इंजीनियर ने कंपनी की कुछ कार्य नीतियों पर भी सवाल उठाए।
उसका कहना था कि अनिवार्य AI ट्रेनिंग सेशन उसके वास्तविक प्रोजेक्ट से ज्यादा संबंधित नहीं थे, फिर भी उन पर काफी समय देना पड़ता था। इसके अलावा रिमोट कर्मचारियों से पूरे दिन Slack और Microsoft Teams पर “Active” स्टेटस बनाए रखने की अपेक्षा को भी उसने अव्यावहारिक बताया।
उसने लिखा कि सबसे ज्यादा निराशा इस बात की रही कि उसे न तो पारदर्शी फीडबैक मिला और न ही सुधार का कोई अवसर।
15 लाख रुपये सालाना का ऑफर भी नहीं आया पसंद
पोस्ट में इंजीनियर ने यह भी बताया कि नौकरी जाने के बाद उसे 15 लाख रुपये सालाना (15 LPA) का एक नया ऑफर मिला। हालांकि पांच साल के अनुभव के हिसाब से उसने इस पैकेज को बेहद कम बताया और इसे “शर्मनाक” करार दिया।
इसी टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर एक नई बहस शुरू हो गई। कुछ लोगों का कहना था कि मौजूदा आईटी जॉब मार्केट को देखते हुए 15 LPA भी एक अच्छा ऑफर है, जबकि कई यूजर्स ने कहा कि पांच साल के अनुभवी डेवलपर के लिए यह पैकेज अपेक्षाकृत कम हो सकता है। यह पूरी तरह उम्मीदवार की स्किल, टेक्नोलॉजी स्टैक, कंपनी और शहर पर निर्भर करता है।
Reddit पर यूजर्स ने किया समर्थन
पोस्ट वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में Reddit यूजर्स ने इंजीनियर का समर्थन किया।
कई लोगों ने कहा कि किसी भी कर्मचारी को नौकरी से निकालने से पहले उसे स्पष्ट फीडबैक, लिखित चेतावनी और प्रदर्शन सुधारने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए।
कुछ यूजर्स ने अपने अनुभव साझा करते हुए लिखा कि कई कंपनियों में रिमोट कर्मचारियों के साथ इसी तरह का व्यवहार देखने को मिलता है। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि परफॉर्मेंस रिव्यू सिस्टम को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की जरूरत है।
कुछ यूजर्स ने दूसरी तरफ भी रखा पक्ष
हालांकि सभी लोग इंजीनियर की बात से पूरी तरह सहमत नहीं दिखे।
कुछ यूजर्स ने लिखा कि सोशल मीडिया पर केवल एक पक्ष सामने आया है और कंपनी की प्रतिक्रिया के बिना पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं हो सकती। उनका मानना था कि किसी भी विवाद में दोनों पक्षों की बात सुनना जरूरी होता है।
फिर भी अधिकांश लोगों ने इस बात पर सहमति जताई कि किसी कर्मचारी के करियर से जुड़े बड़े फैसले लेने से पहले स्पष्ट संवाद, नियमित फीडबैक और सुधार का अवसर मिलना चाहिए।
वर्कप्लेस कल्चर पर फिर उठे सवाल
यह मामला एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि क्या कंपनियों के परफॉर्मेंस रिव्यू सिस्टम में अधिक पारदर्शिता की जरूरत है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित फीडबैक, स्पष्ट अपेक्षाएं और कर्मचारियों को सुधार का अवसर देना किसी भी स्वस्थ कार्य संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।
हालांकि Reddit पर वायरल इस पोस्ट में किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और कंपनी की ओर से इस मामले पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


