पहले इंटरनेट कैफे का कारोबार सिर्फ एक साल में बंद हो गया। इसके बाद अभिषेक साहू ने महज ₹30 हजार के लोन से सैंडविच बेचने का काम शुरू किया। YouTube से रेसिपी सीखकर शुरू किया गया यह छोटा बिजनेस आज सोशल मीडिया पर चर्चा में है। दावा है कि उनके यहां रोजाना 600 से ज्यादा सैंडविच बिकते हैं और महीने का टर्नओवर करीब ₹25 लाख तक पहुंच गया है।
कारोबार में पहली कोशिश असफल हो जाए तो दोबारा शुरुआत करने का हौसला जुटाना आसान नहीं होता। कई लोग पहली नाकामी के बाद बिजनेस का ख्याल ही छोड़ देते हैं। लेकिन भोपाल के अभिषेक साहू ने ऐसा नहीं किया। करीब 15 साल पहले उनका इंटरनेट कैफे कारोबार शुरू होने के महज एक साल के भीतर बंद हो गया। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और एक छोटे से फूड बिजनेस के जरिए नई शुरुआत की।
अभिषेक ने सिर्फ ₹30 हजार का लोन लेकर सैंडविच कार्ट लगाया। न उनके पास कोई बड़ा रेस्टोरेंट था और न ही फूड इंडस्ट्री की कोई खास प्रोफेशनल ट्रेनिंग। उन्होंने YouTube से सैंडविच बनाना सीखा और धीरे-धीरे अपने स्वाद और काम के दम पर ग्राहकों की संख्या बढ़ाई। आज सोशल मीडिया पर उनके बिजनेस की कहानी तेजी से शेयर की जा रही है।
पहला बिजनेस नहीं चला, एक साल में बंद करना पड़ा इंटरनेट कैफे
This is Abhishek Sahu.
15 years ago, he moved to Bhopal and started an internet café. It shut down within a year.
He then took a ₹30,000 loan and started a small sandwich cart after learning recipes on YouTube.
Today, Hari Har Sandwich sells:
⁰• 600+ sandwiches on weekdays… pic.twitter.com/mwjGaaChuU
— Pratham (@CapitalLens_) September 1, 2026 अभिषेक साहू करीब 15 साल पहले भोपाल आए थे। उस समय इंटरनेट कैफे का कारोबार काफी लोकप्रिय था। इसी उम्मीद के साथ उन्होंने भी इंटरनेट कैफे शुरू किया। शुरुआत में उन्हें उम्मीद थी कि यह कारोबार अच्छा चलेगा, लेकिन परिस्थितियां उनके पक्ष में नहीं रहीं।
करीब एक साल के भीतर उन्हें इंटरनेट कैफे बंद करना पड़ा। पहली कोशिश का इस तरह खत्म होना किसी के लिए भी निराशाजनक हो सकता है। हालांकि, अभिषेक ने इस असफलता को अपने कारोबार के सफर का अंत नहीं बनने दिया।
इसके बजाय उन्होंने ऐसा काम शुरू करने के बारे में सोचा, जिसमें कम पूंजी लगाकर शुरुआत की जा सके और ग्राहकों की पसंद के हिसाब से धीरे-धीरे बिजनेस को आगे बढ़ाया जा सके।
सिर्फ ₹30 हजार के लोन से शुरू किया सैंडविच कार्ट
इंटरनेट कैफे बंद होने के बाद अभिषेक ने फूड बिजनेस में हाथ आजमाने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने करीब ₹30 हजार का लोन लिया और एक छोटा सा सैंडविच कार्ट शुरू किया।
इस बिजनेस की खास बात यह थी कि अभिषेक किसी बड़े होटल या रेस्टोरेंट से ट्रेनिंग लेकर नहीं आए थे। उन्होंने सैंडविच की अलग-अलग रेसिपी YouTube के जरिए सीखीं। इसके बाद उन्होंने उन रेसिपी को अपने हिसाब से तैयार किया और ग्राहकों को परोसना शुरू किया।
यानी इस बिजनेस की शुरुआत बड़े निवेश से नहीं हुई। सीमित पैसे, खुद सीखने की कोशिश और लगातार प्रयोग के साथ अभिषेक ने अपने काम को आगे बढ़ाना शुरू किया।
स्वाद पसंद आया तो बढ़ने लगी ग्राहकों की भीड़
शुरुआत में अभिषेक का सैंडविच कार्ट काफी छोटा कारोबार था। लेकिन जैसे-जैसे लोगों को उनका खाना पसंद आने लगा, ग्राहकों की संख्या भी बढ़ने लगी।
धीरे-धीरे उनके सैंडविच की चर्चा भोपाल के दूसरे इलाकों तक पहुंची। इस सफर में सोशल मीडिया ने भी बड़ी भूमिका निभाई। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उनके सैंडविच कार्ट से जुड़ी एक Instagram Reel वायरल हो गई। इसके बाद शहर के अलग-अलग हिस्सों से लोग उनके यहां सैंडविच खाने पहुंचने लगे।
सोशल मीडिया की पहुंच ने उस छोटे से कार्ट को बड़ी संख्या में नए ग्राहकों तक पहुंचाने में मदद की।
सैंडविच के लिए 30 से 50 मिनट तक इंतजार
किसी छोटे फूड बिजनेस की लोकप्रियता का अंदाजा उसके ग्राहकों की संख्या और ऑर्डर के लिए लगने वाले इंतजार से लगाया जा सकता है। अभिषेक के मामले में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उनके यहां सैंडविच के ऑर्डर के लिए ग्राहकों को करीब 30 से 50 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है। इसके बावजूद ग्राहकों की भीड़ बनी रहती है।
यह इस बात का संकेत है कि सोशल मीडिया पर चर्चा के साथ-साथ उनके प्रोडक्ट को लेकर ग्राहकों के बीच भी अच्छी दिलचस्पी पैदा हुई है।
रोज 600 से ज्यादा सैंडविच बेचने का दावा
सोशल मीडिया पर अभिषेक की कहानी शेयर करने वाले यूजर प्रथम के मुताबिक, उनका Hari Har Sandwich रोजाना 600 से ज्यादा सैंडविच बेचता है।
पोस्ट के अनुसार, वीकेंड पर बिक्री में और तेजी आ जाती है। शनिवार और रविवार को 1,000 से ज्यादा सैंडविच बिकने का दावा किया गया है।
इसी सोशल मीडिया पोस्ट में इस कारोबार का मासिक टर्नओवर करीब ₹25 लाख बताया गया है। हालांकि, यह आंकड़ा सोशल मीडिया पर किए गए दावे पर आधारित है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
₹30 हजार से ₹25 लाख तक का सफर कितना बड़ा है?
अगर सोशल मीडिया पर दिए गए आंकड़ों को देखें, तो अभिषेक की कहानी इसलिए खास बन जाती है क्योंकि इसकी शुरुआत बेहद छोटे स्तर से हुई थी।
पहले बिजनेस में असफलता मिली। उसके बाद उन्होंने बड़ा कर्ज या महंगा रेस्टोरेंट खोलने के बजाय कम लागत वाला सैंडविच कार्ट चुना। सिर्फ ₹30 हजार की रकम से काम शुरू किया और अपनी स्किल खुद विकसित की।
YouTube से रेसिपी सीखना, ग्राहकों की पसंद समझना और धीरे-धीरे कारोबार को आगे बढ़ाना उनके सफर का हिस्सा रहा। बाद में सोशल मीडिया की पहुंच ने इस बिजनेस को और ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में मदद की।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई कमबैक की कहानी
अभिषेक साहू की कहानी हाल में सोशल मीडिया पर इसलिए भी चर्चा में आई क्योंकि इसे सिर्फ एक सफल फूड बिजनेस की कहानी के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। लोग इसे असफलता के बाद दोबारा शुरुआत करने की मिसाल के तौर पर शेयर कर रहे हैं।
X पर प्रथम नाम के यूजर ने अभिषेक के सफर से जुड़ी जानकारी शेयर की। पोस्ट वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने उनकी मेहनत और दोबारा कारोबार शुरू करने के फैसले की तारीफ की।
कुछ यूजर्स ने कहा कि कहानी की सबसे बड़ी खासियत ₹25 लाख के कथित टर्नओवर से ज्यादा यह है कि इंटरनेट कैफे बंद होने के बाद अभिषेक ने सिर्फ ₹30 हजार से फिर शुरुआत करने का फैसला किया।
असफलता के बाद दोबारा शुरुआत ही बनी सबसे बड़ी ताकत
अभिषेक साहू की कहानी का सबसे बड़ा सबक सिर्फ यह नहीं है कि एक सैंडविच कार्ट बड़ा कारोबार बन सकता है। इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि पहली असफलता के बाद उन्होंने खुद को दोबारा आजमाया।
इंटरनेट कैफे बंद हुआ तो उन्होंने कारोबार छोड़ने के बजाय बिजनेस मॉडल बदला। कम पूंजी वाला काम चुना, खुद सीखकर स्किल विकसित की और ग्राहकों की प्रतिक्रिया के आधार पर अपने काम को आगे बढ़ाया।
आज उनके सैंडविच कार्ट की लोकप्रियता और सोशल मीडिया पर हो रही चर्चा इस बात को दिखाती है कि छोटे स्तर से शुरू किया गया कारोबार भी सही मेहनत, स्वाद, ग्राहक सेवा और प्रचार के साथ आगे बढ़ सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सोशल मीडिया पोस्ट और मीडिया रिपोर्ट में सामने आए दावों पर आधारित है। ₹25 लाख के मासिक टर्नओवर, दैनिक बिक्री और अन्य कारोबार संबंधी आंकड़ों की NewsJagran.in ने स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है। इन्हें सत्यापित वित्तीय आंकड़े या आय के प्रमाण के तौर पर नहीं माना जाना चाहिए।


