Business Idea: अमेरिका में करीब 1 करोड़ रुपये सालाना की नौकरी, 14 साल की जिंदगी और एक सुरक्षित करियर छोड़कर भारत लौटना आसान फैसला नहीं था। लेकिन चेन्नई के उद्यमी विवेक तिरुवेंगडम (Vivek Thiruvengadam) ने अपने परिवार और एक नए उद्देश्य के लिए यह जोखिम उठाया। भारत लौटने के समय उनके पास सिर्फ 90 हजार रुपये की बचत थी। इसी रकम से उन्होंने अपना बिजनेस शुरू किया और आज छह साल बाद उन्होंने वह आर्थिक लक्ष्य हासिल कर लिया है, जिसे कभी उन्होंने अपने लिए तय किया था।
अमेरिका में अच्छी नौकरी और शानदार कमाई के बावजूद विवेक तिरुवेंगडम को लगा कि जिंदगी का मकसद केवल ज्यादा पैसा कमाना नहीं है। परिवार के करीब रहना और ऐसा काम करना, जिसका समाज पर सकारात्मक असर हो, उनके लिए ज्यादा महत्वपूर्ण था। इसी सोच के साथ उन्होंने अमेरिका छोड़कर भारत लौटने का फैसला किया।
उनकी यह कहानी उन लोगों के लिए खास तौर पर प्रेरणादायक है, जो अच्छी नौकरी होने के बावजूद अपना बिजनेस शुरू करने का सपना देखते हैं। विवेक की यात्रा यह दिखाती है कि बिजनेस शुरू करने के लिए हमेशा करोड़ों रुपये की जरूरत नहीं होती। कई बार सही आइडिया, लगातार मेहनत और जोखिम उठाने का साहस ही सबसे बड़ी पूंजी बन जाता है।
अमेरिका में 14 साल बिताने के बाद लिया भारत लौटने का फैसला
विवेक तिरुवेंगडम ने अमेरिका में करीब 14 साल बिताए। वहां उनका करियर अच्छा चल रहा था और उनकी सालाना कमाई करीब 1 करोड़ रुपये बताई गई। सामान्य तौर पर ऐसी नौकरी छोड़कर भारत लौटना आर्थिक रूप से बड़ा जोखिम माना जाएगा।
लेकिन विवेक और उनकी पत्नी ने अपने जीवन को एक अलग दिशा देने का फैसला किया। उस समय उनकी 11 महीने की बेटी भी थी। परिवार के साथ ज्यादा समय बिताने और भारत में रहकर कुछ नया शुरू करने की इच्छा ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए प्रेरित किया।
विवेक ने अपनी छह साल की कारोबारी यात्रा सोशल मीडिया पर साझा करते हुए बताया कि भारत लौटने का फैसला केवल कमाई से जुड़ा नहीं था। वह ऐसा काम करना चाहते थे, जिसमें आर्थिक सफलता के साथ उद्देश्य और संतुष्टि भी हो।
उनका मानना था कि परिवार के साथ रहकर अपने दम पर कुछ नया खड़ा करना किसी बड़ी नौकरी से मिलने वाली सुविधाओं से ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।
सिर्फ 90 हजार रुपये से शुरू किया बिजनेस
भारत लौटने के बाद विवेक ने जनवरी 2021 में Qubit Fitness की शुरुआत की। उस समय न उनके पास कोई बड़ा ऑफिस था, न निवेशकों की टीम और न ही कोई बड़ी पूंजी।
उनके पास था एक लैपटॉप, अपना समय और करीब 90 हजार रुपये की बचत।
यही रकम उनके शुरुआती बिजनेस की पूंजी बनी। किसी बड़े निवेश के बिना बिजनेस शुरू करना अपने आप में चुनौतीपूर्ण था, खासकर तब जब वह अमेरिका में करीब 1 करोड़ रुपये सालाना की नौकरी कर चुके थे।
शुरुआती दौर में कारोबार बहुत बड़ा नहीं था। पहले साल कंपनी का कारोबार करीब 20 लाख रुपये तक पहुंचा। यह आंकड़ा उनकी अमेरिका की सालाना आय के मुकाबले काफी कम था। लेकिन विवेक ने इसे असफलता नहीं माना।
उन्होंने धीरे-धीरे बिजनेस मॉडल को मजबूत किया, ग्राहकों की जरूरतों को समझा और लगातार अपने काम को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया।
पहले साल की कम कमाई से नहीं मानी हार
किसी बिजनेस के शुरुआती साल में कमाई का कम होना असामान्य नहीं है। खासकर तब, जब संस्थापक बिना बड़े निवेश और टीम के शुरुआत कर रहा हो। विवेक के लिए भी पहला साल सीखने और बिजनेस को समझने का दौर था।
पहले साल करीब 20 लाख रुपये के कारोबार के बाद उन्होंने अपने प्रयास जारी रखे। समय के साथ नए ग्राहक जुड़ते गए और कंपनी का कामकाज बढ़ता गया।
यहां विवेक की कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सामने आता है—उन्होंने तेज सफलता की उम्मीद करने के बजाय लंबे समय तक लगातार काम करने पर भरोसा किया।
छह साल की यात्रा के बाद उन्होंने वह आर्थिक लक्ष्य हासिल कर लिया, जिसके लिए उन्होंने अमेरिका की नौकरी छोड़ने और भारत लौटने का जोखिम उठाया था।
विवेक की सफलता का सबसे बड़ा मंत्र क्या है?
विवेक के मुताबिक, उनकी यात्रा ने उन्हें यह सिखाया कि सफलता के लिए केवल प्रतिभा काफी नहीं है। निरंतरता और धैर्य भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
उनका मानना है कि किसी भी बिजनेस में शुरुआती समय मुश्किल हो सकता है। कई बार मेहनत के बावजूद तत्काल परिणाम दिखाई नहीं देते। ऐसे समय में बिजनेस आइडिया पर भरोसा बनाए रखना और लगातार उसे बेहतर करते रहना जरूरी होता है।
विवेक ने अपनी यात्रा से जुड़े अनुभव साझा करते हुए इस बात पर भी जोर दिया कि उद्देश्य के साथ किया गया काम अलग तरह की संतुष्टि देता है। उनके लिए सफलता सिर्फ बैंक बैलेंस बढ़ने तक सीमित नहीं रही, बल्कि परिवार के करीब रहते हुए अपना काम खड़ा करना भी इस सफलता का हिस्सा है।
परिवार को दिया सफलता का श्रेय
विवेक ने अपनी कामयाबी का श्रेय अकेले खुद को नहीं दिया। उन्होंने अपने परिवार, ग्राहकों और शुरुआती दिनों में साथ देने वाले लोगों को भी अपनी यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
उनके मुताबिक, लोगों का भरोसा और सहयोग बिजनेस को आगे बढ़ाने में बेहद अहम रहा। यही वजह है कि छह साल की यात्रा पूरी होने के बाद भी वह अपने शुरुआती दौर को नहीं भूले हैं।
सोशल मीडिया पर उनकी कहानी सामने आने के बाद कई लोगों ने उनकी सोच और फैसले की तारीफ की। कुछ लोगों ने उनके सफर को परिवार और करियर के बीच संतुलन बनाने की प्रेरणा बताया, तो कई यूजर्स ने उनकी बिजनेस यात्रा को जोखिम लेने और अपने सपने पर विश्वास करने का उदाहरण माना।
नौकरी छोड़कर बिजनेस शुरू करने वालों के लिए बड़ी सीख
विवेक तिरुवेंगडम की कहानी को केवल एक सफल बिजनेस की कहानी के तौर पर नहीं देखा जा सकता। इसमें उन लोगों के लिए भी कई सबक हैं, जो नौकरी छोड़कर अपना कारोबार शुरू करने के बारे में सोचते हैं।
पहली सीख यह है कि बड़ी शुरुआत के लिए हमेशा बड़ी पूंजी जरूरी नहीं होती। विवेक ने 90 हजार रुपये से शुरुआत की और धीरे-धीरे अपने कारोबार को आगे बढ़ाया।
दूसरी सीख यह है कि पहले कुछ सालों में धैर्य रखना जरूरी है। पहले साल 20 लाख रुपये का कारोबार होने के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से पीछे हटने के बजाय बिजनेस पर काम जारी रखा।
तीसरी सीख है कि सिर्फ कमाई को सफलता का पैमाना नहीं मानना चाहिए। परिवार, व्यक्तिगत संतुष्टि और अपने काम का उद्देश्य भी किसी उद्यमी की यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकते हैं।
चौथी और शायद सबसे बड़ी सीख है—निरंतरता। विवेक के अनुभव के अनुसार प्रतिभा आपको शुरुआत दिला सकती है, लेकिन लंबे समय तक लगातार काम करना ही बिजनेस को आगे ले जाता है।
90 हजार रुपये से शुरू हुआ सफर बना प्रेरणा
अमेरिका की करीब 1 करोड़ रुपये सालाना वाली नौकरी छोड़ना, 14 साल बाद भारत लौटना और सिर्फ 90 हजार रुपये की बचत से बिजनेस शुरू करना विवेक तिरुवेंगडम के लिए बड़ा जोखिम था। लेकिन छह साल की लगातार मेहनत के बाद उन्होंने अपने तय आर्थिक लक्ष्य को हासिल किया।
उनकी कहानी यह बताती है कि बिजनेस की सफलता हमेशा बड़े निवेश, बड़े ऑफिस या बड़ी टीम से शुरू नहीं होती। कई बार एक छोटा संसाधन, स्पष्ट उद्देश्य और लगातार मेहनत भी बड़े बदलाव की शुरुआत बन सकती है।
विवेक का सफर खास तौर पर उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो नौकरी की सुरक्षा और अपने सपने के बीच उलझे हुए हैं। हालांकि, किसी भी बिजनेस में उतरने से पहले वित्तीय स्थिति, बाजार की मांग, जोखिम और वैकल्पिक आय जैसे पहलुओं का आकलन करना जरूरी है।
विवेक की कहानी का सार यही है कि भरोसा शुरुआत करा सकता है, लेकिन निरंतरता मंजिल तक पहुंचाती है।


