भारत की सर्वर तकनीक में नया अध्याय
जोहो कॉरपोरेशन ने भारत में पूरी तरह डिजाइन और विकसित किए गए अपने नए सर्वर ‘नाथू ला’ को लॉन्च कर देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी का दावा है कि यह सर्वर न केवल विदेशी सर्वर तकनीकों पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि डेटा सेंटर और एंटरप्राइज ग्राहकों के लिए परिचालन लागत में भी उल्लेखनीय कमी ला सकता है।
मैनेजइंजन और जोहो जैसे लोकप्रिय सॉफ्टवेयर उत्पादों की मूल कंपनी जोहो ने बताया कि ‘नाथू ला’ सर्वर का डिजाइन, हार्डवेयर आर्किटेक्चर, फर्मवेयर और सिस्टम मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म भारत में विकसित किए गए हैं। इस प्रोजेक्ट पर पिछले छह वर्षों से काम किया जा रहा था और इसका रिसर्च एवं डेवलपमेंट केंद्र महाराष्ट्र के नागपुर में स्थापित किया गया था।
कंपनी के अनुसार, सर्वर में नवीनतम Intel Xeon 6 प्रोसेसर का उपयोग किया गया है, जिसे इंटेल के तकनीकी सहयोग से विकसित किया गया है। इससे बेहतर प्रोसेसिंग क्षमता, ऊर्जा दक्षता और स्केलेबिलिटी मिलने की उम्मीद है।
विदेशी सर्वर पर निर्भरता क्यों है बड़ी चुनौती?
भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते डिजिटल बाजारों में शामिल है। क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल पेमेंट्स और सरकारी डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ देश में डेटा सेंटर उद्योग भी तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि, इस पूरी व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले सर्वर सिस्टम का बड़ा हिस्सा अभी भी विदेशी कंपनियों से आयात किया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आयातित सर्वर तकनीक पर निर्भरता के कारण भारतीय कंपनियों को लाइसेंस शुल्क, रॉयल्टी और सपोर्ट फीस के रूप में अतिरिक्त लागत वहन करनी पड़ती है। इसके अलावा सप्लाई चेन बाधित होने या वैश्विक व्यापार नियमों में बदलाव की स्थिति में घरेलू उद्योग प्रभावित हो सकता है।
इसी पृष्ठभूमि में भारत में डिजाइन और विकसित किया गया सर्वर सिस्टम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
छह साल पहले शुरू हुई थी परियोजना
जोहो ने वर्ष 2020 में नागपुर में एक छोटी रिसर्च टीम के साथ इस परियोजना की शुरुआत की थी। कंपनी का उद्देश्य भारत में ही सर्वर डिजाइन और हार्डवेयर इंजीनियरिंग क्षमता विकसित करना था।
बाद में भारत सरकार द्वारा सर्वर सहित कई कंप्यूटिंग उपकरणों के आयात को लेकर स्थानीय विनिर्माण और डिजाइन क्षमताओं को बढ़ावा देने की नीति अपनाई गई। इससे ऐसे प्रोजेक्ट्स को और प्रोत्साहन मिला।
कंपनी ने बताया कि इस दौरान स्थानीय इंजीनियरों और तकनीकी प्रतिभाओं को प्रशिक्षित किया गया तथा उन्हें हार्डवेयर डिजाइन, सिस्टम आर्किटेक्चर और फर्मवेयर विकास जैसे जटिल क्षेत्रों में विशेषज्ञता प्रदान की गई।
नाथू ला सर्वर की प्रमुख खूबियां
जोहो के अनुसार इस सर्वर में कई ऐसी विशेषताएं शामिल की गई हैं जो इसे पारंपरिक सर्वर सिस्टम से अलग बनाती हैं।
इसमें कस्टमाइज्ड पावर डिलीवरी सिस्टम दिया गया है, जिससे ऊर्जा दक्षता बेहतर होती है। कंपनी द्वारा विकसित DC-SCM मॉड्यूल सर्वर प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाता है। इसके अलावा मॉड्यूलर चेसिस डिजाइन के कारण विभिन्न प्रकार की जरूरतों के अनुसार इसे आसानी से कॉन्फिगर किया जा सकता है।
कंपनी का दावा है कि इन तकनीकी सुधारों की वजह से बिजली की खपत में 12 से 18 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। वहीं कुल स्वामित्व लागत (Total Cost of Ownership) में 20 से 30 प्रतिशत तक बचत होने की संभावना है।
डेटा सेंटर उद्योग को कैसे होगा फायदा?
भारत में डेटा सेंटर उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है। रियल एस्टेट कंसल्टेंसी और उद्योग रिपोर्ट्स के अनुसार आने वाले वर्षों में देश में डेटा स्टोरेज और क्लाउड सेवाओं की मांग कई गुना बढ़ने की उम्मीद है।
डेटा सेंटर ऑपरेटरों के लिए बिजली सबसे बड़ा खर्च होता है। यदि किसी सर्वर तकनीक से ऊर्जा खपत कम होती है तो उसका सीधा असर परिचालन लागत पर पड़ता है। यही कारण है कि ऊर्जा दक्ष सर्वर को उद्योग में काफी महत्व दिया जाता है।
नाथू ला सर्वर की ऊर्जा बचत क्षमता यदि व्यावहारिक स्तर पर भी सफल रहती है तो इससे डेटा सेंटर कंपनियों, क्लाउड सेवा प्रदाताओं और बड़े एंटरप्राइज ग्राहकों को लागत कम करने में मदद मिल सकती है।
भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
जोहो कॉर्प के सीईओ शैलेश दवे ने कहा कि कंपनी को ऐसा सर्वर सिस्टम विकसित करने पर गर्व है जिसे पूरी तरह भारत में डिजाइन किया गया है। उनके अनुसार यह केवल एक तकनीकी उत्पाद नहीं, बल्कि भारत की इंजीनियरिंग क्षमता और स्थानीय प्रतिभा का प्रमाण भी है।
उन्होंने कहा कि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाएं भी विश्वस्तरीय तकनीकी समाधान विकसित कर सकती हैं। लगातार रिसर्च, डेवलपमेंट और कौशल निर्माण में निवेश करके कंपनी भविष्य की तकनीकों के लिए मजबूत आधार तैयार कर रही है।
भारत के लिए इसका क्या मतलब है?
नाथू ला सर्वर का लॉन्च केवल एक उत्पाद लॉन्च नहीं माना जा रहा है। यह भारत के उस प्रयास का हिस्सा है जिसके तहत देश सेमीकंडक्टर, सर्वर, इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहा है।
यदि भारतीय कंपनियां बड़े पैमाने पर स्वदेशी सर्वर तकनीक अपनाती हैं तो इससे विदेशी निर्भरता कम होगी, घरेलू हार्डवेयर उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और देश में उच्च कौशल वाली नौकरियों का सृजन भी होगा। आने वाले वर्षों में यह पहल भारत को वैश्विक डेटा सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर हब बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।


